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Meerut News: मोबाइल ने उड़ाई मेरठियों की नींद...बढ़ रहा डिप्रेशन
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मेरठ। नींद किसी वरदान से कम नहीं, लेकिन कम मेहनत, देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल, ज्यादा तनाव और खराब दिनचर्या ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। इससे याददाश्त कमजोर हो रही है, मानसिक परेशानियां, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक 12 माह में जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में आए 16 हजार मरीजों की अवलोकन में खुलासा हुआ है कि इनमें से करीब 47 प्रतिशत लोगों को नींद न आने की बीमारी इनसोम्निया भी थी।
इन मरीजों में डिप्रेशन के शिकार 37 प्रतिशत थे। माइग्रेन के 31, स्कीजोफ्रेनिया के सात, अल्जाइमर के छह, अत्यधिक गुस्सा आने के पांच, मिर्गी के पांच, हिस्टीरिया चार व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। इनमें से 47 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल के मुताबिक जिले में हर साल करीब सवा दो करोड़ रुपये कीमत की नींद की गोलियां लोग गटक जा रहे हैं।
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तनाव के कारण नहीं आती नींद
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ कमलेंद्र किशोर ने बताया कि जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी की स्टडी में पता चला है कि इनमें काफी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो किसी न किसी कारण से तनाव में रहते थे, जिस कारण उन्हें नींद नहीं आती थी। देर रात तक मोबाइल देखना भी इसकी बड़ी वजह है। बाद में वह डिप्रेशन में चले गए। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने नींद के लिए लंबे समय तक स्लीपिंग पिल्स ली थीं।
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अन्य बीमारियां भी हो जाती है पैदा
जिला अस्पताल की क्लिनिकल साइकलोजिस्ट (नैदानिक मनोविज्ञानी) डॉ. विभा नागर ने बताया कि अनिद्रा अपने आप में बीमारी ही नहीं बल्कि दूसरी बीमारियों का लक्षण भी है। इसकी वजह से उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा समस्याओं से ग्रस्त भी हो सकते हैं। =====
कम सोने का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर
मानसिक रोग रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि कम सोने का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग तरोताजा नहीं हो पाता है। जिस समय हम सोते हैं, हमारे कई अंग शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करने का काम करते हैं। इससे हम तरोताजा रहते हैं। नींद पूरी न होने से ये विषाक्त पदार्थ नहीं निकलते।
गहरी नींद चाहिए तो यह बरतें एहतियात
- सोने और जागने का समय तय करें
- सोते समय मोबाइल से दूर रहें
- नींद नहीं आ रही तो गुनगुने पानी से पैर धो लें
- दिन में ज्यादा न सोएं, रात में ही पूरी नींद लें
- चाय-कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल न करें
- रोजाना सात से आठ घंटे की नींद जरूरी लें
- बिना चिकित्सक की सलाह के नींद की गोली न लें
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इन मरीजों में डिप्रेशन के शिकार 37 प्रतिशत थे। माइग्रेन के 31, स्कीजोफ्रेनिया के सात, अल्जाइमर के छह, अत्यधिक गुस्सा आने के पांच, मिर्गी के पांच, हिस्टीरिया चार व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। इनमें से 47 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल के मुताबिक जिले में हर साल करीब सवा दो करोड़ रुपये कीमत की नींद की गोलियां लोग गटक जा रहे हैं।
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तनाव के कारण नहीं आती नींद
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ कमलेंद्र किशोर ने बताया कि जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी की स्टडी में पता चला है कि इनमें काफी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो किसी न किसी कारण से तनाव में रहते थे, जिस कारण उन्हें नींद नहीं आती थी। देर रात तक मोबाइल देखना भी इसकी बड़ी वजह है। बाद में वह डिप्रेशन में चले गए। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने नींद के लिए लंबे समय तक स्लीपिंग पिल्स ली थीं।
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अन्य बीमारियां भी हो जाती है पैदा
जिला अस्पताल की क्लिनिकल साइकलोजिस्ट (नैदानिक मनोविज्ञानी) डॉ. विभा नागर ने बताया कि अनिद्रा अपने आप में बीमारी ही नहीं बल्कि दूसरी बीमारियों का लक्षण भी है। इसकी वजह से उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा समस्याओं से ग्रस्त भी हो सकते हैं। =====
कम सोने का सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर
मानसिक रोग रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि कम सोने का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग तरोताजा नहीं हो पाता है। जिस समय हम सोते हैं, हमारे कई अंग शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करने का काम करते हैं। इससे हम तरोताजा रहते हैं। नींद पूरी न होने से ये विषाक्त पदार्थ नहीं निकलते।
गहरी नींद चाहिए तो यह बरतें एहतियात
- सोने और जागने का समय तय करें
- सोते समय मोबाइल से दूर रहें
- नींद नहीं आ रही तो गुनगुने पानी से पैर धो लें
- दिन में ज्यादा न सोएं, रात में ही पूरी नींद लें
- चाय-कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल न करें
- रोजाना सात से आठ घंटे की नींद जरूरी लें
- बिना चिकित्सक की सलाह के नींद की गोली न लें