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धुंध, धुआं और धूम्रपान... जिगर के टुकड़े को कर रहा बीमार
Mon, 29 Apr 2019 03:13 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Mon, 29 Apr 2019 03:13 AM IST
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सड़कों पर उड़ती धूल
- फोटो : अमर उजाला
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धुंध, धुआं और धूम्रपान आपके बच्चे को बीमार कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले 12 माह के दौरान मिले निमोनिया के 4671 मरीजों पर स्टडी की है, जिसमें पता चला है कि बढ़ता प्रदूषण निमोनिया की मुख्य वजह है। इनमें करीब 80 फीसदी बच्चे थे और इनमें से 10 प्रतिशत वह बच्चे थे जो एक साल के अंदर पैदा हुए थे। यह मरीज जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और अर्बन हेल्थ सेंटरों में आए थे। इस स्टडी को स्वास्थ्य विभाग ने भारत सरकार के इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म पोर्टल पर अपडेट किया है।
रिपोर्ट में पाया गया है कि धुआं, धुंध और धूम्रपान की वजह से हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। यह सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंचता है और संक्रमण की वजह बनता है। ऐसी स्थिति में बड़ों को भी दिक्कत होती है, मगर खासकर बच्चों को बुखार होने, जुकाम होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। अगर डॉक्टर को नहीं दिखाया गया तो बच्चे निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। गेहूं की कटाई के दौरान वातावरण में धुंध छा जाती है। ऐसे में बच्चों में जुकाम हो जाता है। लापरवाही बरती जाए तो सांस की नली और फेफड़े में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है।
यह है निमोनिया
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसमें फेफड़े में संक्रमण हो जाता है। इसमें फेफड़े में सूजन आ जाती है। कई बार पानी भी भर जाता है। यह बुखार और जुकाम होने के बाद होता है। पांच साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगल से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों पर चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के इसकी आशंका बढ़ जाती है।
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यह बरतें सावधानी
खांसते हुए अपने मुंह और नाक को ढक लें।
कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए बच्चों के हाथ धोते रहें।
घर में बच्चे की देखभाल के लिए किसी को रखा है तो यह ध्यान रखें कि वह भी सफाई का ध्यान रखती हो।
धुआं रहित वातावरण हों, घर में धूम्रपान न करें।
यह लक्षण दिखें तो बड़े भी कराएं जांच
कई दिनों तक बुखार आ रहा हो, और पसीने के साथ कंपकपी हो। सीने में दर्द और खांसी आए। गाढ़ा पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आ रहा हो। सीने की पसलियों में फोड़े जैसा टपकने वाला दर्द होना भी निमोनिया के लक्षण हैं।
बच्चों में ऐसे पहचानें लक्षण
बच्चे का बार-बार खांसना, फेफड़े में सूजन, सांस लेने में दिक्कत महसूस हो। तेज-तेज और कम गहरी सांसें खींचना। उसकी हंसली (कॉलरबोन) से ऊपर पसलियों के बीच की त्वचा का बार-बार अंदर धंसना। सांस लेते समय गले से सीटी जैसी आवाज आना। बच्चे के हाथ और अंगुली के नाखून का रंग नीला पड़ना।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित टीके लगवाएं
स्वास्थ्य विभाग ने निमोनिया से संबंधित जानकारी सरकार के पोर्टल पर डाली है। बच्चों में निमोनिया की बीमारी ज्यादा होती है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित टीके लगवाने चाहिए। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं
प्रदूषण के कारण फेफड़ों की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। शिशु को पहले छह महीने स्तनपान कराएं, इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। उन्हें निमोनिया होने का खतरा कम हो जाता है। - डॉ. श्रीओम, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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रिपोर्ट में पाया गया है कि धुआं, धुंध और धूम्रपान की वजह से हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। यह सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंचता है और संक्रमण की वजह बनता है। ऐसी स्थिति में बड़ों को भी दिक्कत होती है, मगर खासकर बच्चों को बुखार होने, जुकाम होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। अगर डॉक्टर को नहीं दिखाया गया तो बच्चे निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। गेहूं की कटाई के दौरान वातावरण में धुंध छा जाती है। ऐसे में बच्चों में जुकाम हो जाता है। लापरवाही बरती जाए तो सांस की नली और फेफड़े में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है।
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यह है निमोनिया
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसमें फेफड़े में संक्रमण हो जाता है। इसमें फेफड़े में सूजन आ जाती है। कई बार पानी भी भर जाता है। यह बुखार और जुकाम होने के बाद होता है। पांच साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगल से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों पर चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के इसकी आशंका बढ़ जाती है।
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यह बरतें सावधानी
खांसते हुए अपने मुंह और नाक को ढक लें।
कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए बच्चों के हाथ धोते रहें।
घर में बच्चे की देखभाल के लिए किसी को रखा है तो यह ध्यान रखें कि वह भी सफाई का ध्यान रखती हो।
धुआं रहित वातावरण हों, घर में धूम्रपान न करें।
यह लक्षण दिखें तो बड़े भी कराएं जांच
कई दिनों तक बुखार आ रहा हो, और पसीने के साथ कंपकपी हो। सीने में दर्द और खांसी आए। गाढ़ा पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आ रहा हो। सीने की पसलियों में फोड़े जैसा टपकने वाला दर्द होना भी निमोनिया के लक्षण हैं।
बच्चों में ऐसे पहचानें लक्षण
बच्चे का बार-बार खांसना, फेफड़े में सूजन, सांस लेने में दिक्कत महसूस हो। तेज-तेज और कम गहरी सांसें खींचना। उसकी हंसली (कॉलरबोन) से ऊपर पसलियों के बीच की त्वचा का बार-बार अंदर धंसना। सांस लेते समय गले से सीटी जैसी आवाज आना। बच्चे के हाथ और अंगुली के नाखून का रंग नीला पड़ना।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित टीके लगवाएं
स्वास्थ्य विभाग ने निमोनिया से संबंधित जानकारी सरकार के पोर्टल पर डाली है। बच्चों में निमोनिया की बीमारी ज्यादा होती है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित टीके लगवाने चाहिए। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं
प्रदूषण के कारण फेफड़ों की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। शिशु को पहले छह महीने स्तनपान कराएं, इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। उन्हें निमोनिया होने का खतरा कम हो जाता है। - डॉ. श्रीओम, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल