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Mission 2024: अगड़ों को साधा, पिछड़ों को लुभाया पश्चिमी यूपी से भाजपा की राष्ट्रीय टीम में चार पदाधिकारी
Sun, 30 Jul 2023 05:15 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sun, 30 Jul 2023 05:15 PM IST
सार
भाजपा ने मिशन 2024 के लिए राष्ट्रीय टीम के गठन में पश्चिमी यूपी को खास तवज्जो दी है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने पूरी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य के साथ ही गुर्जर पर दांव खेला है। हालांकि इसका भाजपा को कितना फायदा होगा यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा।
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JP Nadda
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भाजपा ने राष्ट्रीय टीम के गठन में वेस्ट यूपी को खासा तवज्जो दी है। पार्टी ने जहां अगड़ों को साधे रखा है वहीं, पिछड़ाें को भी लुभाने की कोशिश की है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी का कद बढ़ाया गया है। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र नागर को राष्ट्रीय सचिव बनाकर गुर्जरों में संदेश देने की कोशिश की है। मुरादाबाद निवासी संघ के वरिष्ठ प्रचारक शिव प्रकाश को सह संगठन मंत्री बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के वित्त मंत्र रह चुके बरेली निवासी राजेश अग्रवाल को कोषाध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने पूरी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को 36 सदस्यों वाली कार्यकारिणी की घोषणा की। इन सदस्यों में आठ उत्तर प्रदेश से हैं। इनमें अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चार पदाधिकारियों को रखा गया है। इससे साफ संकेत हैं कि भाजपा पश्चिम में कोई चूक नहीं करना चाहती है।
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भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र नागर को राष्ट्रीय सचिव बनाकर गुर्जरों में संदेश देने की कोशिश की है। मुरादाबाद निवासी संघ के वरिष्ठ प्रचारक शिव प्रकाश को सह संगठन मंत्री बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के वित्त मंत्र रह चुके बरेली निवासी राजेश अग्रवाल को कोषाध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है।
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2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने पूरी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को 36 सदस्यों वाली कार्यकारिणी की घोषणा की। इन सदस्यों में आठ उत्तर प्रदेश से हैं। इनमें अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चार पदाधिकारियों को रखा गया है। इससे साफ संकेत हैं कि भाजपा पश्चिम में कोई चूक नहीं करना चाहती है।
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इससे पहले प्रदेश कार्यकारिणी में भी पश्चिम पर खास फोकस रखा गया। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी पश्चिम से ही ताल्लुक रखते हैं। एकतरफ जहां उनको संगठन की महारथ हासिल है वहीं, उनके जरिए जाट समाज को भी साधने का काम किया गया। सतेंद्र सिसोदिया को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने पश्चिम में राजपूत समाज को भी साध लिया। अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मेरठ से डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई को उपाध्यक्ष बनाकर ब्राह्मण समाज को संदेश दिया गया है।
सुरेंद्र नागर गुर्जर समाज के बड़े नेता हैं। वे मूल रूप से बुलंदशहर के हैं। गौतमबुद्धनगर से बसपा के सांसद रहे इसके बाद समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य रहे। ऐसे में उनको कार्यकारिणी में रखकर गुर्जर समाज का प्रतिनिधित्व बरकरार रखा गया है।
मूल रूप से मुरादाबाद के बीरूवाला निवासी शिवप्रकाश संघ के वरिष्ठ प्रचारक हैं, उनको सह संगठन मंत्री बनाकर राजपूत समाज को संदेश दिया है। इसी तरह बरेली से पांच बार के विधायक वैश्य समाज के बड़े नेता राजेश अग्रवाल को दोबारा से कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
सुरेंद्र नागर गुर्जर समाज के बड़े नेता हैं। वे मूल रूप से बुलंदशहर के हैं। गौतमबुद्धनगर से बसपा के सांसद रहे इसके बाद समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य रहे। ऐसे में उनको कार्यकारिणी में रखकर गुर्जर समाज का प्रतिनिधित्व बरकरार रखा गया है।
मूल रूप से मुरादाबाद के बीरूवाला निवासी शिवप्रकाश संघ के वरिष्ठ प्रचारक हैं, उनको सह संगठन मंत्री बनाकर राजपूत समाज को संदेश दिया है। इसी तरह बरेली से पांच बार के विधायक वैश्य समाज के बड़े नेता राजेश अग्रवाल को दोबारा से कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
लक्ष्मीकांत पर फिर जताया भरोसा, प्रदेश अध्यक्ष रहते जीतीं थी 73 सीटें
राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद मेरठ में कार्यकर्ता बेहद उत्साहित हैं। दोपहर को उनके घर पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया। बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। शाम को डॉ. बाजपेई ने औघड़नाथ मंदिर, बुढ़ाना गेट मंदिर समेत कई मंदिरों में जाकर मत्था टेका। इस जिम्मेदारी पर डॉ. लक्ष्मीकांत ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की कृतज्ञा ज्ञापित करता हूं। जो जिम्मेदारी दी गई उसको पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ निभाऊंगा।
14 साल की उम्र में जनसंघ से जुड़ गए थे
डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी 14 साल की उम्र में जनसंघ से जुड़ गए थे। उन्हें 1977 में जनता पार्टी के यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया गया। 1980 में भाजपा मेरठ के महासचिव बने। उत्तर प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष बने। वर्ष 1989 में मेरठ की शहर सीट से पहली बार विधायक चुने गए। वर्ष 1993 में वे चुनाव हार गए। वर्ष 1996 में वह दूसरी बार विधायक बने।
वर्ष 2002 में वह फिर चुनाव जीते और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। लेकिन 2007 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 में वह फिर विधायक बने और दिसंबर 2012 में भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके कार्यकाल में पार्टी ने 73 सीटें जीतीं।
इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें फिर से निराशा हाथ लगी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने चुनाव न लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। उनको भाजपा ने ज्वाइनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद पार्टी ने उनको राज्यसभा सदस्य बनाया।
राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद मेरठ में कार्यकर्ता बेहद उत्साहित हैं। दोपहर को उनके घर पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया। बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। शाम को डॉ. बाजपेई ने औघड़नाथ मंदिर, बुढ़ाना गेट मंदिर समेत कई मंदिरों में जाकर मत्था टेका। इस जिम्मेदारी पर डॉ. लक्ष्मीकांत ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की कृतज्ञा ज्ञापित करता हूं। जो जिम्मेदारी दी गई उसको पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ निभाऊंगा।
14 साल की उम्र में जनसंघ से जुड़ गए थे
डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी 14 साल की उम्र में जनसंघ से जुड़ गए थे। उन्हें 1977 में जनता पार्टी के यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया गया। 1980 में भाजपा मेरठ के महासचिव बने। उत्तर प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष बने। वर्ष 1989 में मेरठ की शहर सीट से पहली बार विधायक चुने गए। वर्ष 1993 में वे चुनाव हार गए। वर्ष 1996 में वह दूसरी बार विधायक बने।
वर्ष 2002 में वह फिर चुनाव जीते और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। लेकिन 2007 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 में वह फिर विधायक बने और दिसंबर 2012 में भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके कार्यकाल में पार्टी ने 73 सीटें जीतीं।
इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें फिर से निराशा हाथ लगी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने चुनाव न लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। उनको भाजपा ने ज्वाइनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद पार्टी ने उनको राज्यसभा सदस्य बनाया।