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Meerut News: महंगाई की आग में दहन से पहले ही जल गए मेघनाद और कुंभकरण
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-इस बार रामलीला समिति केवल राणव के पुतले का करेगी दहन
-बजट कम होने और चंदा कम आने का तर्क दे रही रामलीला समिति
रजनीश त्यागी
बिजनौर। इस बार दशहरा पर बिजनौर रामलीला ग्राउंड में केवल रावण के पुतले का ही दहन होगा। महंगाई और बजट के अभाव में मेघनाद और कुंभकरण के पुतले नहीं बनवाए जा रहे हैं। रामलीला समिति का तर्क है कि चंदा कम आने और समिति की आमदनी घटने के कारण यह कटौती की जा रही है।
बिजनौर रामलीला समिति की ओर से पिछले वर्षों में राम बरात का जुलूस भव्य निकाला जाता था। इसमें 80 से ज्यादा झांकियां होती थी, लेकिन इस बार मात्र आठ झांकियों के साथ ही राम बारात निकाल दी गई। इससे पहले शहर में होने वाली सजावट में भी कटौती कर दी गई।
यह कटौती यहीं नहीं रुकी। शनिवार को दशहरा के दिन अब केवल रावण के पुतले का ही दहन किया जाएगा। इस बार मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले नहीं बनवाए गए हैं। रावण की पुतले की ऊंचाई भी घटकर इस बार 50 फिट के आसपास ही रह गई है।
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बाजार न लगने से घटी आमदनी
रामलीला समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि दुकानों का बहुत कम किराया आता है। चंदा भी मात्र दो से ढ़ाई लाख ही रह जाता है। ऐसे में बुध बाजार राम लीला ग्राउंड में लगता था। उससे होने वाली आमदनी से समिति का बजट बढ़ जाता था। हर साल रामलीला और उसके तहत होने वाले कार्यक्रमों पर 50 लाख रुपये तक खर्च होते थे। बाजार न लगने के कारण आमदनी घट गई। इस बार सभी आयोजन मात्र 10 से 12 लाख रुपये में ही समेटे जा रहे हैं।
रामलीला समिति के पास बजट कम रह गया। बाजार न लगने से आमदनी नहीं हो रही है। ऐसे में इस बार केवल रावण का पुतला ही बनवाया जा रहा है। आतिशबाजी भी पहले के मुकाबले कम की गई है। बजट कम होने से रामलीला की भव्यता पर असर पड़ा है। - संजय गुप्ता, मुख्य संरक्षक, रामलीला समिति बिजनौर
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-बजट कम होने और चंदा कम आने का तर्क दे रही रामलीला समिति
रजनीश त्यागी
बिजनौर। इस बार दशहरा पर बिजनौर रामलीला ग्राउंड में केवल रावण के पुतले का ही दहन होगा। महंगाई और बजट के अभाव में मेघनाद और कुंभकरण के पुतले नहीं बनवाए जा रहे हैं। रामलीला समिति का तर्क है कि चंदा कम आने और समिति की आमदनी घटने के कारण यह कटौती की जा रही है।
बिजनौर रामलीला समिति की ओर से पिछले वर्षों में राम बरात का जुलूस भव्य निकाला जाता था। इसमें 80 से ज्यादा झांकियां होती थी, लेकिन इस बार मात्र आठ झांकियों के साथ ही राम बारात निकाल दी गई। इससे पहले शहर में होने वाली सजावट में भी कटौती कर दी गई।
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यह कटौती यहीं नहीं रुकी। शनिवार को दशहरा के दिन अब केवल रावण के पुतले का ही दहन किया जाएगा। इस बार मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले नहीं बनवाए गए हैं। रावण की पुतले की ऊंचाई भी घटकर इस बार 50 फिट के आसपास ही रह गई है।
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बाजार न लगने से घटी आमदनी
रामलीला समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि दुकानों का बहुत कम किराया आता है। चंदा भी मात्र दो से ढ़ाई लाख ही रह जाता है। ऐसे में बुध बाजार राम लीला ग्राउंड में लगता था। उससे होने वाली आमदनी से समिति का बजट बढ़ जाता था। हर साल रामलीला और उसके तहत होने वाले कार्यक्रमों पर 50 लाख रुपये तक खर्च होते थे। बाजार न लगने के कारण आमदनी घट गई। इस बार सभी आयोजन मात्र 10 से 12 लाख रुपये में ही समेटे जा रहे हैं।
रामलीला समिति के पास बजट कम रह गया। बाजार न लगने से आमदनी नहीं हो रही है। ऐसे में इस बार केवल रावण का पुतला ही बनवाया जा रहा है। आतिशबाजी भी पहले के मुकाबले कम की गई है। बजट कम होने से रामलीला की भव्यता पर असर पड़ा है। - संजय गुप्ता, मुख्य संरक्षक, रामलीला समिति बिजनौर