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तीन तलाक बिल से मुस्लिम महिलाओं में जगी इंसाफ की आस, पुरुष बोले- हम केवल शरीयत मानेंगे

Wed, 31 Jul 2019 01:39 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 31 Jul 2019 01:39 PM IST
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Meerut women are happy on triple talaq bill pass, says it is beneficial to future generations
एडवोकेट सैयद जैनब नकवी, व शिक्षिका रुखसाना निजामी - फोटो : अमर उजाला
राज्यसभा में तीन तलाक पर बिल पास होने से जिले की कई महिलाओं को इंसाफ की आस जगी है। देखें आखिर क्या है तीन तलाक बिल के राज्यसभा में पास होने पर मेरठ के निवासियों की राय -
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सालों से मुस्लिम तलाकशुदा महिलाएं सड़कों पर धक्के खा रही हैं। अब तीन तलाक के कोई मायने नहीं रह गए। कुरान और हदीस की रोशनी में तलाक के नियमों को लोग मानेंगे। आने वाली पीढ़ियों को इसका फायदा होगा। केंद्र सरकार के दृढ़ निश्चय से ये मुमकिन हो पाया है। विरोधी दल भी झुक गए। - एडवोकेट शाहीन परवेज, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजिका 
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यह एक नई सुबह है
तीन तलाक बिल पास होने के बाद मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं में जो खुशी है, वो बयान नहीं की जा सकती। अब महिलाएं सशक्त होंगी। युवा पीढ़ी को नई दिशा मिलेगी। सालों से मुस्लिमों में एक दबका तीन तलाक का गलत इस्तेमाल कर रहा था। अब ऐसा नहीं होगा सकेगा। यह एक नई सुबह है। - एडवोकेट सैयद जैनब नकवी
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ये नाकाफी है...
बिल का पास होना अच्छी बात है, लेकिन ये नाकाफी है। इस्लाम में कुरान और हदीस की रोशनी में ही तलाक और निकाह होते हैं। तलाक किन हालातों में दिया जाता है, यह सभी को पता है। इस्लाम से छेड़छाड़ के बिना कानून बनाया जाता, तो बेहतर होता।  - रुखसाना निजामी, शिक्षिका 

मैं इस बिल से सहमत नहीं
इस बिल का फायदा कितना होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। इस्लाम और हदीस के जरिये ही महिलाएं निकाह में आती हैं। तीन तलाक बिल पास तो हो गया, लेकिन इसे लागू कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। मैं इस बिल से सहमति नहीं हूं। - शबाना खान, शिक्षिका 
 

Meerut women are happy on triple talaq bill pass, says it is beneficial to future generations
शहर काजी जैनुस साजिद्दीन व कारी शफीकुरर्हमान - फोटो : अमर उजाला
मुस्लिम बुद्धिजीवी बोले, हम सिर्फ शरियत को मानेंगे
इस्लाम में तलाक को सबसे बुरा काम करार दिया गया है। एक वक्त में तीन तलाक देना शरियत और सुन्नत के मुताबिक सही नहीं है। जो चीज शरियत के खिलाफ है, उस पर अमल नहीं होगा। यह बिल भी शरियत के खिलाफ है। अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जो फैसला लेगा, उसके मुताबिक काम किया जाएगा। - प्रो.जैनुस साजिदीन, शहर काजी  

नुकसान पहुंचाना सरकार का मकसद
केंद्र में भाजपा की सरकार है, इसलिए उसे जो करना है, वह करेगी। मोदी सरकार को मुस्लिम महिलाओं से कोई हमदर्दी नहीं है। किसी भी तरह मुस्लिम समाज को नुकसान पहुंचाना इनका मकसद है। यह बिल मुसलमानों के हकों को नुकसान पहुंचाने वाला है। - कारी शफीकुर्रहमान, जिलाध्यक्ष, मिल्ली कौंसिल

महिलाओं को होगा नुकसान
तीन तलाक बिल इस्लामी शरियत में सरासर दखलंदाजी है। बहुमत के बल पर कुछ भी पास किया जा सकता है। सही मायनों में यह बिल मुस्लिम महिलाओं के लिए भी नुकसानदायक साबित होगा।- हाजी इकबाल अंसारी, पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी

मुसलमान को केवल शरियत पसंद
इस बिल से मुस्लिम महिलाओं को कोई फायदा होने वाला नहीं है। मुसलमान कभी भी शरियत के खिलाफ नहीं चलेगा। उसे तमाम चीजों से ज्यादा शरियत के उसूल पसंद हैं। यह बिल मुसलमानों को नुकसान देने के लिए पास किया है। - मौलाना जिब्राईल, इमाम दरियागंज मस्जिद

इस कानून को नहीं, शरीअत को मानेंगे मुस्लिम : रफीक अंसारी
 शहर विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि तीन तलाक पर जो कानून बनाया जाएगा, वह अमल में नहीं आएगा। मुसलमान इस बिल को गंभीरता से नहीं लेगा। इस्लाम में शादी एक समझौता है। वह शरीअत के हिसाब से ही जीवन गुजारेगा।

वहीं सपा के महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी का कहना है कि मुसलमान शरीअत के हिसाब से चलते हैं। बुजुर्ग और उलेमा जो बताते हैं, उसे मानते हैं। मुसलमान पाक कुरान शरीफ पर अमल करते हैं। कोई भी कानून बन जाए, मुस्लिम शरीयत को ही मानेंगे। 

Meerut women are happy on triple talaq bill pass, says it is beneficial to future generations
खुशी मनाती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

महिलाओं में जगी इंसाफ की उम्मीद
मेरठ के परिवार परामर्श केंद्र में कुल 914 दंपती के मामले चल रहे हैं। इनमें पांच मुस्लिम महिलाओं के ऐसे मामले हैं, जिनके पति उन्हें तलाक दे चुके हैं। अब इन महिलाओं में इंसाफ की उम्मीद जगी है। 
परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी रेनू सक्सेना का कहना है कि ये पांच महिलाएं हर तारीख पर आती हैं, लेकिन उनके पति नहीं आते।

एक मामले में लिसाड़ीगेट थाने में तीन महीने पहले पति पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें पति जेल गया था। बाकी चार महिलाएं तलाक बिल पास होने का इंतजार कर रही थीं। रेनू सक्सेना ने बताया कि चारों महिलाएं निकाह के वक्त तय की गई मेहर दिलाने की मांग कर रही हैं। लिसाड़ीगेट की करीब 52 साल की महिला को छोड़कर उसके पति ने दूसरी शादी कर दी है। महिला कहती है कि पति ने तलाक दे दिया है। वह भी अब मेहर चाहती है। 

तीन तलाक से जुड़े सभी मामलों की जांच होगी। राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद महिलाओं को इंसाफ मिलने की उम्मीद है। -अजय साहनी, एसएसपी 

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