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मेरठ : एक साथ शुरू होंगे गैस संचालित दो शवदाह गृह, आज आएंगी गाजियाबाद की कंपनी के अधिकारी

Wed, 12 May 2021 10:42 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 12 May 2021 10:42 AM IST
सार

नगर आयुक्त और कंपनी के अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया

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Meerut: Two gas-powered crematoriums will start simultaneously
covid-19 death in meerut - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ के सूरजकुंड श्मशान में एक साथ गैस संचालित दो शवदाह गृह शुरू होंगे। नगर आयुक्त सहित फरीदाबाद की कंपनी के अधिकारियों ने यहां स्थलीय निरीक्षण किया। इसके साथ पूर्व में संचालित विद्युत शवदाह गृह को भी देखा गया। कुछ फेरबदल के बाद यह भी संचालित हो जाएगा। आज गाजियाबाद की कंपनी के अधिकारी स्थलीय निरीक्षण करेंगे।
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आर्य समाज के सहयोग से अब सूरजकुंड में शव लेकर आने वाले लोगों के साथ आसपास की आबादी की बड़ी राहत मिलेगी। धूआं, बदबू सहित अन्य सभी परेशानियों से लोगों को आने वाले एक माह में मुक्ति मिल जाएगी। फरीदाबाद की कंपनी ओम साईं ने अपनी कोटेशन में 20 लाख के अतिरिक्त जीएसटी और ट्रांसपोर्ट में 25 लाख रुपये का खर्च बताया है। दिल्ली स्थित सराय काले खां शवदाह गृह की तर्ज पर इसे तैयार किया जाएगा। 
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आर्य समाज बुढ़ाना गेट के अध्यक्ष अशोक सुधाकर ने बताया कि गाजियाबाद की कंपनी ने इसी शवदाह गृह निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की कोटेशन दी है। बुधवार को कंपनी के अधिकारी स्थलीय निरीक्षण करेंगे। गंगा मोटर कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि पूर्व में संचालित विद्युत शवदाह गृह का निर्माण इस तरह किया गया था कि यहां एक साथ दो फर्नेस लगाई जा सकें।
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पुरानी विद्युत फर्नेस को भी सही कर उसे भी गैस संचालित किया जाएगा। ऐसे में शवदाह गृह में एक दिन में 50 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार हो सकेगा। अब फरीदाबाद की कंपनी सिविल वर्क के लिए भी कोटेशन देगी। गाजियाबाद या फरीदाबाद की किसी एक कंपनी को बुधवार को फाइनल कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बुधवार से शवदाह गृह सफाई के साथ अन्य कार्य शुरू हो जाएंगे।
 
ऐसे संचालित होता है गैस संचालित शवदाह गृह
ओम साईं कंपनी के अधिकारी गौरव ने बताया कि नई तकनीक से बने शवदाह गृह में एक शव जाने पर 40 मिनट में अंतिम संस्कार के बाद फूल बाहर आ जाते हैं। इसमें गैस संचालित फर्नेस लगाई जाती है। सूरजकुंड के मुख्य द्वार तक गैस की पाइपलाइन है, जिसे शवदाह गृह तक बिछाना होगा। इसमें एलोब्रिक एक स्थान होता है, जिसमें शव जाता है।

आईसी फैन चिमनी से कनेक्ट होता है जो धुएं को खींच लेता है। इसके साथ स्क्रबर भी लगाया जाता है। यह काले धुंए को पानी की मदद से शुद्ध कर देता है। चिमनी भी इस तरह लगाई जाती है कि धुएं से आसपास के लोगों को नुकसान न पहुंचे। वाटर टैंक से ही गुजरकर धुएं में मौजूद कण शुद्ध हो जाते हैं। पैनल और बर्नर एक हजार डिग्री से अधिक का तापमान भट्टी में बनाते हैं।

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