World joint family day: अच्छे जीवन का आधार है संयुक्त परिवार, मजबूत होता विश्वास का बंधन, खुशियां अपार
संयुक्त परिवारों के बुजुर्गों का सानिध्य छोटों में संस्कार और अनुशासन लाता है विश्व संयुक्त परिवार दिवस पर ऐसे ही कुछ परिवारों से बात की जो एक दूसरे का ख्याल रखते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
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संयुक्त परिवारों में बुजुर्गों का सानिध्य छोटों में संस्कारों के बीज बोता है और अनुशासन लाता है। बात संयुक्त परिवार की हो तो रिश्तों की डोरी से बंधा स्नेह और विश्वास का बंधन और भी खास हो जाता है, तब समझौता छोटा और खुशियां अपार हो जाती हैं। शहर के काका नगर में एक ऐसा ही संयुक्त परिवार हैं, जो एक दूसरे की जरूरतों का ख्याल रखते हुए कई वर्षों से साथ हैं। आज एकल परिवार के चलन के बीच एकता के सूत्र में बंधा ये संयुक्त परिवार खास है।
काका नगर में सत्यप्रभा वशिष्ठ अपने तीन पुत्र और पुत्रवधू व सात पौत्र-पौत्रियों के साथ रहती हैं। पुत्र अवनीश वशिष्ठ, अग्निवेश वशिष्ठ, कुमार भारत वशिष्ठ और पुत्रवधू नेहा, अश्मि, अदिति के अलावा पौत्र-पौत्रियों में अनुष्का, अमितेष, भुवन, अर्णव, उदय आदित्य और सारा हैं। परिवार में कुल 14 सदस्य सभी एक साथ एक छत के नीचे रहते हैं। यहां नियम है, जिसका कठोरता से पालन भी किया जाता है। पूरा परिवार दिन में एक बार साथ खाने पर जरूर बैठता है।
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सुनिश्चित किया जाता है कि सभी परिवार के सदस्य एक-दूसरे के हर पहलू को यहां साझा कर सकें। सत्यप्रभा वशिष्ठ ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से संयुक्त रूप से रह रहा है। संयुक्त परिवार का फायदा सबसे अधिक है। किसी तरह की कोई चिंता नहीं होती है। दिनभर आपके आसपास आपके अपने रहते हैं।
परिवार के सदस्यों से ज्यादा कौन किसकी मदद कर सकता है। सभी एक साथ रहते हैं। सभी एक-दूसरे की मदद करने के लिए आगे आते हैं। बच्चों को भी बाहरी दोस्तों की जरूरत नहीं होती है। एक साथ मिलकर पूरी टीम बना लेते हैं। खेल का रंग जमता है। बच्चे भी खुश रहते हैं। एकल परिवार में यह खुशियां कहां से मिलेंगी। संयुक्त परिवार का अपना महत्व है। इसे कायम रखना हम सभी की जिम्मेदारी हैं।
संयुक्त परिवार
पेलखा निवासी 78 वर्षीय प्रीतम सिंह बताते हैं कि संयुक्त परिवारों का सुख भी अलग ही था। भारतीय संस्कृति और सभ्यता कितने ही परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। महत्वकांक्षा और भागदौड़ भरी जिंदगी में अब परिवारों का विघटन दुख देता है।
संयुक्त परिवार आज भी जीवन का आधार बने हुए हैं। सामाजिक, मनोरंजनात्मक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने में ऐसे परिवार को मानसिक तनाव, असुरक्षा, पारिवारिक कलह आदि की भावना छू तक नहीं पाई है।