वंदे मातरम् पर बोर्ड मीटिंग में बवाल, भिड़े BJP-BSP पार्षद, अल्लाह-हू-अकबर से गूंजा सदन
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नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक में वंदेमातरम गायन पर जमकर बवाल हुआ। सदन में जहां वंदेमात्रम पर राजनीति हुई वहीं, राष्ट्रगान का भी खूब अपमान किया गया। भाजपा और बसपा के पार्षद आपस में भिड़ गए जिसके बाद जमकर लात-घूंसे चले। यही नहीं भाजपाइयों ने महापौर की मेज से माइक नीचे गिरा दिया।
टाउन हॉल के तिलक सभागार में महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता और नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान के संचालन में परिचय बैठक की शुरुआत हुई। महापौर ने वंदेमातरम का विरोध नहीं किया परंतु साउंड सिस्टम पर वंदेमातरम के बजाय फिल्मी गीतों की धुन बजने पर भाजपाइयों ने हंगामा कर दिया। हालांकि इसससे पहले ही पार्षद मोहम्मद कासिम, दिलशाद, हाजी सईद, गफ्फार, इरफान आदि समेत अन्य सदन से बाहर चले गए। जैसे ही भाजपाइयों ने फिल्मी गीत की धुन का विरोध किया तो मुस्लिम पार्षद सदन में पहुंच गए और जय भीम, अल्लाह हू अकबर के नारे लगाने लगे।
उधर, भाजपाइयों ने भारत माता की जय का उद्घोष शुरू कर दिया। इस पर बसपा और भाजपा के पार्षद आमने सामने आ गए। दोनों पक्षों में जमकर लात-घूंसे और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। सदन में गालियों की भी बौछार हुई। जिसके चलते महापौर को पीछे कमरे में जाना पड़ा। पार्षद हंगामा करते समय मेजों पर चढ़ गए। बसपा की महापौर के सामने भाजपाइयों की एक नहीं चली। महापौर ने भाजपा के पार्षदों को प्रस्ताव रखने का मौका नहीं दिया। हालांकि बसपा की एक महिला पार्षद ने छह प्रस्ताव रखे। महापौर खेमे के अतिरिक्त किसी ने भी प्रस्तावों को सहमति नहीं दी। आनन-फानन में राष्ट्रगान के बाद बोर्ड बैठक समाप्त कर दी गई।
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भाजपा पार्षदों ने दी चेतावनी
इस तरह पहली बोर्ड बैठक में शहर के विकास पर चर्चा के बजाय, राजनीति की भेंट चढ़कर रह गई। पहली बोर्ड बैठक में हंगामे की नींव रख दी गई। हंगामे की सूचना पाकर एसपी सिटी, सीओ और कई थानों की फोर्स लेकर पहुंचे तथा मामला संभाला। इसके पश्चात दोबारा सदन में वंदेमातरम का गायन हुआ। बोर्ड बैठक में पार्षद विपिन जिंदल, राकेश शर्मा, नीरज ठाकुर, पूनम गुप्ता, प्रिया, अंशुल गुप्ता, संदीप रेवड़ी आदि सहित अन्य सभी पार्षद रहे।
बाहरी लोगों ने भी किए पार्षदों पर हाथ साफ
जिसका डर था वही हुआ। टाउन हॉल में लगाई फोर्स और नगर निगम प्रशासन बाहरी लोगों को सदन में रोकने में कामयाब नहीं हो सका। बाहरी लोगों का तिलक सभागार के साथ उसके पीछे स्थित हॉल में खासकर बसपाइयों का कब्जा रहा। यही कारण रहा कि हंगामे के दौरान बाहरी लोगों ने भी पार्षदों पर हाथ साफ किए। हालांकि बाद में पुलिस ने बाहरी लोगों को सदन से बाहर खदेड़ा।
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