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Meerut: डीजल-पेट्रोल की महंगाई से उद्योग बेहाल, 200 करोड़ का बढ़ा बोझ, अब महंगे होंगे उत्पाद

Tue, 26 May 2026 12:10 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 26 May 2026 12:10 PM IST
सार

डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर मेरठ के उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। उद्योग संगठनों के अनुसार ईंधन महंगा होने से हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और कई उत्पादों की लागत बढ़ने लगी है।

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Meerut: Rising Fuel Prices Add rs200 Crore Monthly Burden on Industries, Product Costs Likely to Rise
डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने का असर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने मेरठ के औद्योगिक क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। करीब 4000 करोड़ रुपये मासिक कारोबार वाले औद्योगिक क्षेत्र पर ईंधन महंगाई का सीधा असर पड़ रहा है। उद्योग संगठनों का दावा है कि ईंधन दरों में हालिया बढ़ोतरी से उद्योगों पर हर महीने लगभग 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में निर्माण सामग्री से लेकर खेल सामग्री और ट्रैक्टर कलपुर्जों तक कई उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
परतापुर औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन के अनुसार बीते पंद्रह दिनों में दूसरी बार ईंधन की कीमतें बढ़ने का सबसे अधिक प्रभाव निर्माण और भवन निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबार पर पड़ा है। निर्माण कार्यों में बड़ी मात्रा में परिवहन और मशीनों का उपयोग होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से परियोजनाओं की लागत में तेजी से वृद्धि हो रही है।
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माल भाड़ा बढ़ा, निर्माण सामग्री हुई महंगी
मेरठ परिवहन एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा का कहना है कि ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। उनके अनुसार निर्माण क्षेत्र में लागत लगभग पांच प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। आने वाले दिनों में यह प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो सकता है।

खेल सामग्री से ट्रैक्टर कलपुर्जों तक बढ़ी लागत
ध्यानचंद नगर औद्योगिक एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पुंडीर का कहना है कि डीजल आधारित परिवहन महंगा होने से कच्चे माल की ढुलाई और तैयार उत्पादों की आपूर्ति दोनों प्रभावित हुई हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ के प्रमुख उद्योगों में शामिल खेल सामग्री, व्यायाम उपकरण, ट्रांसफार्मर, ट्रैक्टर कलपुर्जे और अभियांत्रिकी उत्पादों की लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
 

सूक्ष्म और लघु उद्योगों पर सबसे अधिक दबाव
भारतीय उद्योग संघ के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल के अनुसार उद्योग पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा की चुनौती का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ईंधन की महंगाई ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। उनका कहना है कि सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। यदि ईंधन की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो इसका सीधा प्रभाव बाजार में दिखाई देगा और उत्पादों की कीमतें बढ़ना लगभग तय है।

कारोबारियों को लागत और मांग दोनों की चिंता
उद्योग जगत की चिंता केवल बढ़ती लागत तक सीमित नहीं है। कारोबारियों का मानना है कि उत्पादों के दाम बढ़ने से बाजार में मांग भी प्रभावित हो सकती है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन लागत में निरंतर वृद्धि उद्योगों के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकती है, जिसका असर उत्पादन, परिवहन और उपभोक्ता कीमतों पर दिखाई देगा।

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