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टिड्डी दल का हमला रोकने को मेरठ तैयार
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टिड्डी दल का हमला रोकने को मेरठ तैयार
मेरठ। पाकिस्तान के पंजाब और राजस्थान के बाड़मेर व जालौर जिले के अलावा गुजरात के बांसवाड़ा में हाहाकार मचाने वाले टिड्डी दल से निपटने के लिए मेरठ पूरी तरह तैयार है। यह बातें शुक्रवार को विकास भवन सभागार में हुई बैठक में आधा दर्जन विभागों के अधिकारियों ने कही। बैठक की अध्यक्षता जिला विकास अधिकारी दिग्विजयनाथ तिवारी और संचालन जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रमोद सिरोही ने किया।
सिरोही ने बताया कि टिड्डी अपने भार से अधिक भोजन खाती है और उसका आहार हरी पत्तियां, फसल के फूल और बीज हैं। वर्तमान में इसकी उपस्थिति गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में दिखाई दे रही है। जनपद में उपलब्ध समस्त संसाधनों और मानवीय श्रम द्वारा इस चुनौती से निपटा जाएगा। कीट के नियंत्रण हेतु लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाया गया है। किसान हेल्प लाइन नंबर 0552-2732063 पर कॉल कर जानकारी दे सकते हैं।
बचाव को किसान यह करें उपाय
किसान एकजुट होकर ढोल, नगाड़ा और डीजे बजाकर टिड्डी दल को फसल पर न बैठने दें। रात में इन्हें विश्राम न करने दें और खेत किनारे गहरी नालियां बनाकर इस कीट के शिशु/निम्फ को मिट्टी से दबाएं, लाइट ट्रैप का प्रयोग कर कीटों को नष्ट कर दें। फसलों को बचाने के लिए मैलाथियान 96 प्रतिशत टैक्नीकल का छिड़काव करें। क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी की 1.25 लीटर मात्रा या लैम्डासायहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत की 400 एमएल मात्रा को 750 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी ओमवीर सिंह ने बताया कि 2.5 से 3 लीटर नीम ऑयल 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करें।
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मेरठ। पाकिस्तान के पंजाब और राजस्थान के बाड़मेर व जालौर जिले के अलावा गुजरात के बांसवाड़ा में हाहाकार मचाने वाले टिड्डी दल से निपटने के लिए मेरठ पूरी तरह तैयार है। यह बातें शुक्रवार को विकास भवन सभागार में हुई बैठक में आधा दर्जन विभागों के अधिकारियों ने कही। बैठक की अध्यक्षता जिला विकास अधिकारी दिग्विजयनाथ तिवारी और संचालन जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रमोद सिरोही ने किया।
सिरोही ने बताया कि टिड्डी अपने भार से अधिक भोजन खाती है और उसका आहार हरी पत्तियां, फसल के फूल और बीज हैं। वर्तमान में इसकी उपस्थिति गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में दिखाई दे रही है। जनपद में उपलब्ध समस्त संसाधनों और मानवीय श्रम द्वारा इस चुनौती से निपटा जाएगा। कीट के नियंत्रण हेतु लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाया गया है। किसान हेल्प लाइन नंबर 0552-2732063 पर कॉल कर जानकारी दे सकते हैं।
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बचाव को किसान यह करें उपाय
किसान एकजुट होकर ढोल, नगाड़ा और डीजे बजाकर टिड्डी दल को फसल पर न बैठने दें। रात में इन्हें विश्राम न करने दें और खेत किनारे गहरी नालियां बनाकर इस कीट के शिशु/निम्फ को मिट्टी से दबाएं, लाइट ट्रैप का प्रयोग कर कीटों को नष्ट कर दें। फसलों को बचाने के लिए मैलाथियान 96 प्रतिशत टैक्नीकल का छिड़काव करें। क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी की 1.25 लीटर मात्रा या लैम्डासायहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत की 400 एमएल मात्रा को 750 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी ओमवीर सिंह ने बताया कि 2.5 से 3 लीटर नीम ऑयल 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करें।
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