मेरठ : पर्क फार्मास्युटिकल सील, मालिक फरार, नशीली दवाइयां सप्लाई करने वाले चार गिरफ्तार
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मेरठ के परतापुर थानाक्षेत्र में नशीली दवाइयों को पंजाब में सप्लाई के मामले में चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। फर्म मालिक मौके से फरार हो गया। आरोपियों को साथ लेकर कारोबार में शामिल अन्य लोगों की तलाश में गाजियाबाद और दिल्ली में भी छापा मारा गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पुलिस ने 43 लाख रुपये कीमत की दवाइयां बरामद की है।
पंजाब पुलिस और एसओजी ने परतापुर इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित पर्क फार्मास्युटिकल व उसके मोहिद्दीनपुर स्थित गोदाम पर छापा मारकर नशे के कारोबार में लिप्त रैकेट का भंड़ाफोड़ किया था। नशे की गोलियां जब्त कर फैक्टरी को सील कर दिया गया। गोदाम पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
आरोपी जान सैफी निवासी छोटी मस्जिद कोतवाली, फरजान सैफी निवासी शाहपीर गेट कोतवाली, सादिक पुत्र शाबिर अली निवासी भवानी नगर नौचंदी और सूर्या प्रकाश उर्फ छुट्टन पुत्र इंद्रजीत गोयल निवासी गांव काशी परतापुर को गिरफ्तार कर स्पेशल सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।
पर्क फार्मास्युटिकल मालिक अमरजीत फरार है। जिसकी तलाश की जा रही है। गुरुवार दिनभर पुलिस जांच में लगी रही। पंजाब पुलिस के निरीक्षक सतवंत सिंह ने बताया कि नशे की दवा का कारोबार कईं राज्यों में चल रहा था।
43 लाख टेबलेट और 4900 इंजेक्शन ले गई पंजाब पुलिस
मेरठ। परतापुर स्थित दवा फैक्टरी से पंजाब पुलिस 43 लाख दर्द निवारक टेबलेट और 4900 दर्द निवारक डायजापाम इंजेक्शन ले गई है। यह दवाएं पंजाब में नारकोटिक्स के तहत आती हैं। बृह्स्पतिवार को पंजाब पुलिस और ड्रग्स विभाग ने मोहिउद्दीनपुर में एक दवा गोदाम में भी छापा मारा। इंजेक्शन यहीं से बरामद हुए हैं। इसके अलावा लाखों टेबलेट और इंजेक्शन और मिले हैं। इनकी पड़ताल ड्रग्स विभाग करेगा।
ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि विभाग दस्तावेज खंगाल रहा है। कई अनियमितताएं मिली हैं। लाइसेंस किसी के नाम और फैक्ट्री कोई और चला रहा था। पंजाब पुलिस पेन किलर दवा की वजह से यहां आई थी। यह दवा पंजाब में प्रतिबंधित हैं, लेकिन लुधियाना में यह दवा मिली थी।
जिसके आधार पर पंजाब पुलिस ने यहां छापा मारा था। हालांकि इस फैक्टरी में और उत्तर प्रदेश में इस दवा को बनाने की अनुमति है और इनके पास इसका लाइसेंस भी है। ड्रग्स विभाग की टीम ने यहां से 10 दवाओं के सैंपल लिए हैं, जिनमें कुछ नारकोटिक्स की दवा है। इन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
जीएसटी विभाग भी करेगा पड़ताल
ड्रग्स इंस्पेक्टर ने बताया कि यह फर्म जीएसटी में पंजीकृत है। अभी जीएसटी टीम नहीं आई है। लेकिन वह भी पड़ताल कर सकती है। कंपनी रिटर्न दाखिल कर रही है या नहीं। जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि छानबीन की जाएगी कि जीएसटी चोरी तो नहीं की जा रही।