मेरठ: पराग डेयरी में 100 करोड़ के भ्रष्टाचार पर शिकंजा, चेयरमैन समेत पांच पर आरोप; दुग्ध आयुक्त ने बैठाई जांच
मेरठ की गगोल स्थित पराग डेयरी में करीब 100 करोड़ रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार और डेयरी को नुकसान के आरोपों पर दुग्ध आयुक्त ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। शिकायत में चेयरमैन समेत पांच लोगों के नाम हैं।
विस्तार
मेरठ के गगोल स्थित पराग डेयरी में सरकारी अनुदान के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार, डेयरी को आर्थिक नुकसान और दुग्ध उत्पादकों को चार महीने से भुगतान नहीं मिलने के आरोपों पर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने पीसीडीएफ लखनऊ के प्रबंध निदेशक को मामले के सभी 12 बिंदुओं पर प्रारंभिक जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
चेयरमैन समेत पांच लोगों पर लगाए गए आरोप
दूध उत्पादक सहकारी समिति के प्रतिनिधि वेदप्रकाश ने 27 जुलाई को दुग्ध आयुक्त को शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। इसमें पराग दुग्ध संघ की चेयरमैन रजनी देवी, महाप्रबंधक अविनाश सत्यार्थी, क्षेत्रीय दुग्धशाला विकास अधिकारी नत्थू सिंह, चेयरमैन के ससुर बलराज और देवर प्रदीप को नामजद किया गया है।
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फर्जी सप्लाई और परिवहन के नाम पर गड़बड़ी का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गगोल डेयरी के दूध की बागपत, दिल्ली और हापुड़ में फर्जी सप्लाई दर्शाकर परिवहन और किराए के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट की गई।
इसके अलावा प्लांट में बायोमास की आपूर्ति और प्रबंधन में वित्तीय अनियमितता तथा ठेकेदार से कथित कमीशन की राशि रिश्तेदार के खाते में स्थानांतरित कराने का आरोप भी लगाया गया है।
फर्जी गाड़ियों और समितियों के नाम पर भुगतान की जांच
जांच के दायरे में फर्जी वाहनों के नाम पर रकम निकालने, बंद पड़ी समितियों के नाम पर फर्जी अभिलेख तैयार कर नकली दूध की आपूर्ति दिखाने और बिना ड्यूटी किए कुछ लोगों के नाम पर वेतन आहरित करने के आरोप भी शामिल हैं।
शिकायत में किसानों और दुग्ध उत्पादकों के कल्याण के लिए आए करीब 100 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगाया गया है।
चार महीने से भुगतान नहीं मिलने का भी आरोप
शिकायत में डेयरी से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को चार महीने से भुगतान नहीं मिलने का मामला भी उठाया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वित्तीय अनियमितताओं के कारण डेयरी और दुग्ध उत्पादकों दोनों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
दोषी मिले तो होगी वसूली
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पीसीडीएफ लखनऊ के प्रबंध निदेशक को विस्तृत प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम-1965 की धारा 65 और 68 के तहत क्षतिपूर्ति की वसूली का प्रस्ताव तैयार कर उपलब्ध कराया जाए।
नत्थू सिंह बोले- पहले भी हुई थी उच्चस्तरीय जांच
क्षेत्रीय दुग्धशाला विकास अधिकारी नत्थू सिंह ने कहा कि वेदप्रकाश ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इसके बाद एमडी की ओर से एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर पहले भी जांच कराई गई थी। हालांकि उन्होंने कहा कि उस जांच के निष्कर्ष की उन्हें जानकारी नहीं है। मामले में पराग डेयरी के महाप्रबंधक अविनाश सत्यार्थी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
12 बिंदुओं पर होगी प्रारंभिक जांच
दुग्ध आयुक्त के निर्देश के बाद अब मामले के सभी 12 आरोपों और शिकायत में बताए गए वित्तीय लेनदेन की जांच की जाएगी। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित वित्तीय नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है।