मेरठ की छात्रा ने खोजी किचन के कचरे से जैविक सोना बनाने की तकनीक, आप भी उठा सकते हैं फायदा
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किचन से निकले कचरे को कूड़ेदान में फेंकने से पहले सोच लें। यह जैविक सोना हो सकता है। जी हां शहर में इसकी शुरुआत गंगानगर निवासी छात्रा स्वाति ने की है। वह दिल्ली स्थित इंडियन स्कूल ऑफ डेवलपमेंट मैनेजमेंट में पढ़ रही हैं। देश की प्रतिष्ठित एनजीओ सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट में दो साल कार्य करने के बाद स्वाति ने पर्यावरण के क्षेत्र में काम को मिशन बनाया है...
स्ट मैनेजमेंट की शुरुआत करते हुए स्वाति ने एरोबिक कंपोस्टिंग यानि हवा के साथ बनने वाले जैविक खाद को चुना है। यह खाद गार्डन और खेती में इस्तेमाल होता है। इससे कचरा निपटान के साथ अपनी जरूरत पूरी होने के बाद बिक्री करके कमाई की जा सकती है।
ऐसे बनता है जैविक सोना
घरों की किचन से हर दिन औसतन एक किलोग्राम तक कचरा निकलता है। इसमें सब्जी और फलों के छिलकों के अतिरिक्त बची हुई खाद्य सामग्री होती है। लोग इस कचरे को फेंक देते हैं। यह कूड़ा निगम के ढलावघर से होता हुआ लैंडफिल में पहुंचकर बर्बाद हो जाता है। स्वाति ने बताया कि कंपोस्टर (विशेष डिजायन के तीन बर्तन) के जरिये इस कचरे को जैविक खाद में बदला जाता है। गीले कचरे को कंपोस्टर में प्रतिदिन डालकर उसमें मिक्सिंग पाउडर डाला जाता है ताकि कार्बन और नाइट्रोजन का संतुलन बना रहे।
नगर निगम दे रही कंपोस्टर पर 80 फीसदी सब्सिडी
नगर निगम ने स्वाति के प्रोजेक्ट को अपनाया है। इसमें थ्री पॉट, मिक्सिंग पाउडर, माइक्रोब्स व एक रैक शामिल है। इनकी कीमत 1500 रुपये है। इसमें नगर निगम 80 फीसदी सब्सिडी दे रही है। शुरुआती चरण में यह योजना आरडब्लूए के लिए है। धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जाएगा ताकि मेरठ को स्वच्छता मिशन में बड़ा मुकाम हासिल कराया जा सके। अब तक एक दर्जन से ज्यादा आरडीब्लूए के 100 से अधिक घरों ने इसे अपनाया है।
लैंडफिल कूड़े से होता है नुकसान
स्वाति ने बताया कि लैंडफिल कूड़े से निकलने वाली मीथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है। वहीं, लीचैट भूजल को प्रदूषित कर देता है और आसपास रहने वाले लोगों को जानलेवा बीमारियां देता है।
कंपोस्टर से कई फायदे
स्वाति ने बताया कि किचन वेस्ट से जैविक खाद बनाना बहुत आसान है। इसे अपनाकर कचरे को जैविक खाद में बदल सकता है। जैविक खाद प्रक्रिया से कचरा निपटान, सफाई, मुफ्त कंपोस्ट उपलब्ध है। इस खाद से तैयार सब्जियां 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक, उपज जल्दी, ज्यादा और उम्दा होगी।
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