फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Meerut News: Know what is the history of Jayanti Mata Shaktipeeth in Hastinapur

जयंती माता शक्तिपीठ : दर्शन से ही पूरी हो जाती मन्नत, यहां दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

Mon, 18 Jan 2021 07:50 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 18 Jan 2021 07:50 PM IST
विज्ञापन
Meerut News: Know what is the history of Jayanti Mata Shaktipeeth in Hastinapur
प्राचीन जयंती माता मंदिर। संवाद - फोटो : अमर उजाला

महाभारतकालीन पांडव टीले पर स्थित प्राचीन श्री जयंती माता शक्तिपीठ का महत्व शिव पुराण में वर्णित है। आस्था के इस केंद्र पर सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना दर्शन-पूजन कर मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर यहां भंडारा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।

विज्ञापन


मंदिर के पुजारी एवं मठ पुरोहित पंडित शंकर लाल शुक्ला और प्राचीन जयंती माता शक्ति पीठ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि सती माता का एक अंग हस्तिनापुर में गिरा था। इसी स्थान को जयंती माता शक्तिपीठ कहा गया। इसका आभास लोगों को तब हुआ, जब सती ने किसी भक्त को सपने में आकर अपना स्थान बताया। खोजने पर मिट्टी में माता की पिंडी निकली, जो आज भी इस मंदिर में है। बाद में यहां जयंती माता की दिव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई।  
विज्ञापन


मान्यता है कि हस्तिनापुर में पांडव और कौरवों का भव्य महल था। बाद में यह उलट-पुलट हो गया था। इस स्थान को उल्टा खेड़ा के नाम से जाना जाता है। यहीं पर जयंती माता मंदिर स्थापित है। जयंती माता को कौरवों और पांडवों की कुलदेवी मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। महाभारत के युद्ध से पूर्व जयंती माता की पूजा करने पर दोनों को कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


जयंती माता शक्ति पीठ सेवा ट्रस्ट कई साल से मंदिर की देखभाल कर रहा है। कई दूसरे राज्यों के लोग मंदिर से जुड़े हुए हैं। मां के द्वार पर जो प्राणी सच्चे मन से मांगता है मां उसे कभी निराश नहीं करतीं। 

यह भी पढ़ें: पत्नी पर था शक, पहले रची खौफनाक साजिश, फिर सास-ससुर को दी ऐसी मौत, कांप उठे लोग, तस्वीरें

विकास की दरकार, पुरातत्व विभाग से रार
पांडव किला उल्टा खेड़ा पर स्थित होने के कारण मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। मंदिर समिति ट्रस्ट के पदाधिकारी यहां विकास कार्य करते हैं तो पुरातत्व विभाग उन पर मुकदमे दर्ज करा देता है। यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं सीमित ही हैं।

शूटिंग रेंज बनाए सरकार
स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र या प्रदेश की सरकार चाहे तो यहां पर्यटन अपार संभावनाएं बन सकती हैं। शूटिंग के लिए भी यहां अच्छी लोकेशन मौजूद हैं। इन्हें विकसित कर राजस्व के साथ-साथ यहां का आकर्षण और बढ़ाया जा सकता है।

माता के आशीर्वाद से सुरक्षित रहे
करीब 25 साल से माता की सेवा में हैं। एक समय जब वह जंगल के रास्ते परीक्षितगढ़ से हस्तिनापुर आते थे तो कई बार आश्चर्यजनक घटनाएं हुईं। माता के आशीर्वाद से वह हर बार सुरक्षित रहे। - सुदेश कुमार, अध्यक्ष, मंदिर समिति न्यास

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed