{"_id":"4949d0cc93d54054eec6a81a3c34267b","slug":"meerut-news-hindi-news-179","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘राष्ट्र भाव के अभाव में फैल रहा आतंकवाद’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘राष्ट्र भाव के अभाव में फैल रहा आतंकवाद’
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 28 Feb 2016 01:41 AM IST
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एनएएस डिग्री कॉलेज में शनिवार को ‘आतंकवाद : सभ्य समाज में बढ़ता प्रसार, कारण व निराकरण’ विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें मुख्य वक्ता और आरएसएस के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय जोशी ने कहा कि राष्ट्र भाव के अभाव में आतंकवाद फैल रहा है।
आतंकवादी हमलों के लिए कहा, ईट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। समाज शस्त्र से चलता है। अच्छे शासन हो तो मानसिक स्तर ऊंचा उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
संजय जोशी ने कहा, योजनाओं का लाभ नहीं मिलने पर जनता में असंतोष बढ़ाकर नक्सलवाद को पैदा किया गया।
देश में 26 आतंकवादी संगठन ऐसे हैं, जिन पर प्रतिबंध लगा है। विश्व के 67 देशों में 600 आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। आतंकवाद से पीड़ित देशों की फेहरिस्त में भारत का 13वां स्थान है। 2014 में आतंकवाद से 37 हजार लोग प्रभावित हुए। फ्रांस पर हाल में हुए आतंकवादी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया।
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पठानकोट हमलावर ऐसे ही सीमा में घुसकर हमला करने में कामयाब नहीं हुए, उन्हें कुछ लोगों का समर्थन रहा है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी ने कहा मुसलमानों के बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते। मुस्लिमों पर आधारित कहानियों पर फिल्में नहीं बन रहीं।
पाठ्यक्रमों से उर्दू के चैप्टर हटा दिए गए। समाज बंट रहा है। हरियाणा में जाट आरक्षण को लेकर हुए उपद्रव का उदाहरण देकर कहा जनता का डिविजन हो रहा है। आपसी रिश्तों में दरार पैदा होती जा रही है। यह समाज और देश के लिए घातक है। वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री ने कहा आतंकवाद विश्व की समस्या बन चुका है।
न्याय नहीं मिलने की वजह से लोगों में असंतोष पनप रहा है। मेरठ में मलियाना और हाशिमपुरा कांड के पीड़ित आज भी इंसाफ के लिए तरस रहे हैं। अशोक भारती ने भी संबोधित किया। लखन तोमर ने संचालन किया। कार्यक्रम सरोकार संस्था की ओर से आयोजित किया गया था।
आतंकवाद का एंटी डॉट खोज लिया
सामाजिक विचारक अभय दूबे ने कहा देश ने आतंकवाद का एंटी डॉट खोज लिया है। देश में दलितों ने सबसे ज्यादा शोषण सहा है। बावजूद इसके उन्होंने बगावत करके हथियार नहीं उठाए। इक्का-दुक्का घटनाएं हो सकती हैं। अलकायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों की राजनीतिक अपील का भारत के मुस्लिमों ने विरोध किया।
वह उनकी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। उन्हें देश के संविधान, लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रिया पर भरोसा है। ये दो बड़े उदाहरण आतंकवाद के खिलाफ खड़े हैं। अभय दूबे ने कहा आतंकवाद राजनीतिक औजार है और यह सबके इस्तेमाल के लिए खुला है। लोग इसका इस्तेमाल कर भी रहे हैं।
जेएनयू में काम कर रहा गिरोह : संजय
जेएनयू में देश विरोधी नारे लगने के मामले में मंच पर वक्ताओं में मतभेद नजर आए। संजय जोशी ने कहा जहां छह हजार छात्र पढ़ते हों और 500 करोड़ का खर्च सालाना आता है, उस संस्थान में देश विरोधी नारे लगना यह सोचने का विषय है। उन्होंने कहा जेएनयू कैंपस में गिरोह काम कर रहा है,
जिसकी वजह से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। उधर, सामाजिक विचारक अभय दूबे ने जेएनयू प्रकरण पर कहा सिर्फ नारे लगने को मुद्दा बनाने की आवश्यकता नहीं है। क्या हम देश को पुलिस स्टेट बनाना चाहते हैं? उदार बनने की जरूरत है।
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आतंकवादी हमलों के लिए कहा, ईट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। समाज शस्त्र से चलता है। अच्छे शासन हो तो मानसिक स्तर ऊंचा उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
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संजय जोशी ने कहा, योजनाओं का लाभ नहीं मिलने पर जनता में असंतोष बढ़ाकर नक्सलवाद को पैदा किया गया।
देश में 26 आतंकवादी संगठन ऐसे हैं, जिन पर प्रतिबंध लगा है। विश्व के 67 देशों में 600 आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। आतंकवाद से पीड़ित देशों की फेहरिस्त में भारत का 13वां स्थान है। 2014 में आतंकवाद से 37 हजार लोग प्रभावित हुए। फ्रांस पर हाल में हुए आतंकवादी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया।
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पठानकोट हमलावर ऐसे ही सीमा में घुसकर हमला करने में कामयाब नहीं हुए, उन्हें कुछ लोगों का समर्थन रहा है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी ने कहा मुसलमानों के बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते। मुस्लिमों पर आधारित कहानियों पर फिल्में नहीं बन रहीं।
पाठ्यक्रमों से उर्दू के चैप्टर हटा दिए गए। समाज बंट रहा है। हरियाणा में जाट आरक्षण को लेकर हुए उपद्रव का उदाहरण देकर कहा जनता का डिविजन हो रहा है। आपसी रिश्तों में दरार पैदा होती जा रही है। यह समाज और देश के लिए घातक है। वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री ने कहा आतंकवाद विश्व की समस्या बन चुका है।
न्याय नहीं मिलने की वजह से लोगों में असंतोष पनप रहा है। मेरठ में मलियाना और हाशिमपुरा कांड के पीड़ित आज भी इंसाफ के लिए तरस रहे हैं। अशोक भारती ने भी संबोधित किया। लखन तोमर ने संचालन किया। कार्यक्रम सरोकार संस्था की ओर से आयोजित किया गया था।
आतंकवाद का एंटी डॉट खोज लिया
सामाजिक विचारक अभय दूबे ने कहा देश ने आतंकवाद का एंटी डॉट खोज लिया है। देश में दलितों ने सबसे ज्यादा शोषण सहा है। बावजूद इसके उन्होंने बगावत करके हथियार नहीं उठाए। इक्का-दुक्का घटनाएं हो सकती हैं। अलकायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों की राजनीतिक अपील का भारत के मुस्लिमों ने विरोध किया।
वह उनकी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। उन्हें देश के संविधान, लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रिया पर भरोसा है। ये दो बड़े उदाहरण आतंकवाद के खिलाफ खड़े हैं। अभय दूबे ने कहा आतंकवाद राजनीतिक औजार है और यह सबके इस्तेमाल के लिए खुला है। लोग इसका इस्तेमाल कर भी रहे हैं।
जेएनयू में काम कर रहा गिरोह : संजय
जेएनयू में देश विरोधी नारे लगने के मामले में मंच पर वक्ताओं में मतभेद नजर आए। संजय जोशी ने कहा जहां छह हजार छात्र पढ़ते हों और 500 करोड़ का खर्च सालाना आता है, उस संस्थान में देश विरोधी नारे लगना यह सोचने का विषय है। उन्होंने कहा जेएनयू कैंपस में गिरोह काम कर रहा है,
जिसकी वजह से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। उधर, सामाजिक विचारक अभय दूबे ने जेएनयू प्रकरण पर कहा सिर्फ नारे लगने को मुद्दा बनाने की आवश्यकता नहीं है। क्या हम देश को पुलिस स्टेट बनाना चाहते हैं? उदार बनने की जरूरत है।