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सात साल की रिदा को कंठस्थ है गीता
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 18 Feb 2016 02:47 AM IST
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ब्लाइंड बालिका रिदा जेहरा आपसी सद्भावना और एकता की बेहतर मिसाल पेश करती है। ब्रजमोहन स्कूल फ ॉर द ब्लाइंड जागृति विहार में कक्षा तीन की छात्रा रिदा जेहरा मुस्लिम परिवार में पैदा हुई है, लेकिन उसे गीता का 15वां और 12वां अध्याय कंठस्थ है।
छात्रा के हुनर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गीता जयंती वर्ष समारोह में उसे सम्मानित किया था। 20 दिसंबर 2015 में चिन्मय मिशन द्वारा आयोजित गीता के 15वें अध्याय की प्रतियोगिता में रिदा ने पहला स्थान हासिल कर मेरठ का गौरव बढ़ाया था।
स्कूल के संचालक प्रवीन शर्मा ने बताया कि गीता के 15वें अध्याय पर चिन्मय मिशन ने प्रतियोगिता कराई थी। प्रतियोगिता में ब्लाइंड स्कूल के छात्रों ने भाग लिया। इसमें सात वर्षीय मुस्लिम बालिका रिदा सहित अन्य दो बच्चों ने क्रमश: तीन पुरस्कार जीते।
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रिदा 80 प्रतिशत दृष्टिहीन है। तीन साल से संस्था के साथ रह रही है। पिता रईस हैदर, मां शाहीन जेहरा हैं। लोहिया नगर निवासी रईस के दो बेटे हैं। दो साल पहले रिदा का ऑपरेशन कराया गया, लेकिन मात्र 20 प्रतिशत ही सफलता मिल पाई।
कहीं से भी पूछ लो श्लोक
गीता के 15वें अध्याय और 12वें अध्याय के श्लोक कोई कहीं से भी पूछे, कैसे भी पूछे रिदा उसको पूरा बता देगी। श्लोक का एक अक्षर बताने पर भी रिदा श्लोक को पूरा सुनाने में माहिर है।
प्रतियोगिता के दौरान कराया याद
रिदा को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ब्लाइंड स्कूल के शिक्षकों ने गीता का 15वां अध्याय याद कराया। शिक्षकों ने सभी बच्चों को तैयारी कराई, लेकिन रिदा सबसे आगे निकल गई। स्कूल में एनसीईआरटी के सिलेबस में रिदा सभी विषय ब्रेल लिपि से पढ़ती है। कंप्यूटर भी चला सकती है।
अभिभावकों ने नहीं किया विरोध
रिदा के माता-पिता ने भी हिंदू धर्मग्रंथ को पढ़ने का विरोध नहीं किया। स्कूल संचालक प्रवीन शर्मा ने बताया कि माता-पिता का कहना था कि कई मुस्लिम ऐसे हैं जिन्हें दूसरे ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। इसमें कोई बुराई नहीं, सभी धर्म समान हैं।
उपेक्षित बच्चों को बना सकूं सफल
स्वयं रिदा बड़ी तसल्ली से गीता का पाठ करती है। बकौल रिदा मेरा सपना पढ़-लिखकर सफल इंसान बनना है। ताकि अपनी तरह दूसरे उपेक्षित बच्चों का पढ़ाकर जीवन में सफल बना सकूं।
बच्चों को काबिल बनाना है सपना
प्रवीन शर्मा कहते हैं हमारा उद्देश्य बेसहारा बच्चों को काबिल बनाना है। धर्म हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता। रिदा गीता पढ़ती है, तो संस्था के दूसरे बच्चों क ो जो हिंदू हैं उन्हें हम कुरान याद करा रहे हैं, ताकि धर्म की दीवार सफलता में आड़े न आए।
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छात्रा के हुनर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गीता जयंती वर्ष समारोह में उसे सम्मानित किया था। 20 दिसंबर 2015 में चिन्मय मिशन द्वारा आयोजित गीता के 15वें अध्याय की प्रतियोगिता में रिदा ने पहला स्थान हासिल कर मेरठ का गौरव बढ़ाया था।
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स्कूल के संचालक प्रवीन शर्मा ने बताया कि गीता के 15वें अध्याय पर चिन्मय मिशन ने प्रतियोगिता कराई थी। प्रतियोगिता में ब्लाइंड स्कूल के छात्रों ने भाग लिया। इसमें सात वर्षीय मुस्लिम बालिका रिदा सहित अन्य दो बच्चों ने क्रमश: तीन पुरस्कार जीते।
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रिदा 80 प्रतिशत दृष्टिहीन है। तीन साल से संस्था के साथ रह रही है। पिता रईस हैदर, मां शाहीन जेहरा हैं। लोहिया नगर निवासी रईस के दो बेटे हैं। दो साल पहले रिदा का ऑपरेशन कराया गया, लेकिन मात्र 20 प्रतिशत ही सफलता मिल पाई।
कहीं से भी पूछ लो श्लोक
गीता के 15वें अध्याय और 12वें अध्याय के श्लोक कोई कहीं से भी पूछे, कैसे भी पूछे रिदा उसको पूरा बता देगी। श्लोक का एक अक्षर बताने पर भी रिदा श्लोक को पूरा सुनाने में माहिर है।
प्रतियोगिता के दौरान कराया याद
रिदा को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ब्लाइंड स्कूल के शिक्षकों ने गीता का 15वां अध्याय याद कराया। शिक्षकों ने सभी बच्चों को तैयारी कराई, लेकिन रिदा सबसे आगे निकल गई। स्कूल में एनसीईआरटी के सिलेबस में रिदा सभी विषय ब्रेल लिपि से पढ़ती है। कंप्यूटर भी चला सकती है।
अभिभावकों ने नहीं किया विरोध
रिदा के माता-पिता ने भी हिंदू धर्मग्रंथ को पढ़ने का विरोध नहीं किया। स्कूल संचालक प्रवीन शर्मा ने बताया कि माता-पिता का कहना था कि कई मुस्लिम ऐसे हैं जिन्हें दूसरे ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। इसमें कोई बुराई नहीं, सभी धर्म समान हैं।
उपेक्षित बच्चों को बना सकूं सफल
स्वयं रिदा बड़ी तसल्ली से गीता का पाठ करती है। बकौल रिदा मेरा सपना पढ़-लिखकर सफल इंसान बनना है। ताकि अपनी तरह दूसरे उपेक्षित बच्चों का पढ़ाकर जीवन में सफल बना सकूं।
बच्चों को काबिल बनाना है सपना
प्रवीन शर्मा कहते हैं हमारा उद्देश्य बेसहारा बच्चों को काबिल बनाना है। धर्म हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता। रिदा गीता पढ़ती है, तो संस्था के दूसरे बच्चों क ो जो हिंदू हैं उन्हें हम कुरान याद करा रहे हैं, ताकि धर्म की दीवार सफलता में आड़े न आए।