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किसानों से धोखा: पेराई सत्र पर जोर, बकाया भुगतान के लिए दबाव कमजोर, रालोद-भाकियू ने दी चेतावनी 

Tue, 03 Sep 2019 01:23 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 03 Sep 2019 01:23 PM IST
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Meerut News, focus on crushing session, pressure to get Outstanding payment is to weaken
गन्ना - फोटो : अमर उजाला
आगामी पेराई सत्र को शुरू कराने के लिए गन्ना विभाग शुगर इंडस्ट्री से गन्ना बकाया भुगतान कराने के मामले में बैकफुट पर नजर आने लगा है। सरकार द्वारा बकाया भुगतान का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद भी बकायेदार मिलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। इसके चलते किसानों में आक्रोश है। रालोद और भाकियू ने इस मामले पर जल्द ही आंदोलन की चेतावनी दी है। 
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उप्र गन्ना आपूर्ति एवं खरीद अधिनियम के तहत गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान करने और नहीं करने पर विलंब ब्याज देने का नियम है। लेकिन प्रदेश की शुगर इंडस्ट्री इस नियम को वर्षों से तोड़ती आ रही है। प्रदेश के किसानों का मिलों पर विलंब ब्याज भी 700 करोड़ से ज्यादा हो चुका है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों को विलंब ब्याज का भुगतान नहीं किया जा सका है। 
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पिछले पेराई सत्र 2018-19 के भुगतान की बात करें तो मेरठ मंडल की शुगर मिलों पर अभी भी 1554 करोड़ से ज्यादा का बकाया है। किसानों के बीच किरकिरी होने से बचने के लिए प्रदेश सरकार ने शुगर इंडस्ट्री को 31 अगस्त तक भुगतान करने का अल्टीमेटम दिया था।

दौराला शुगर मिल को छोड़कर बाकी 15 शुगर मिलों ने पूरा भुगतान नहीं किया है। भुगतान करने में सबसे खराब स्थित किनौनी, मोदीनगर, मलकपुर, सिंभावली, बृजनाथपुर, बुलंदशहर मिल की है। 

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भुगतान के लिए नहीं उठाए सख्त कदम
अल्टीमेटम के बाद भी शुगर मिलों ने संपूर्ण बकाये का भुगतान नहीं किया है। इसके बाद भी गन्ना विभाग मिलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा है। सूत्रों का कहना है कि आगामी पेराई सत्र 2019-20 की तैयारी शुरू हो चुकी है। 20 से 31 अक्तूबर के बीच पेराई सत्र शुरू करना है। इसे देखते हुए गन्ना विभाग शुगर इंडस्ट्री को नाराज नहीं करना चाहता है। उसे डर है कि कहीं मिलें नाराज होकर आगामी पेराई सत्र शुरू करने से हाथ खड़ा न कर दें।

 

रालोद और भाकियू ने दी चेतावनी 
गन्ना बकाया भुगतान नहीं होने पर रालोद और भाकियू ने आंदोलन की चेतावनी दी है। रालोद के प्रदेश संगठन महासचिव डॉ. राजकुमार सांगवान ने बताया कि सरकार का गन्ना बकाया भुगतान कराने का अल्टीमेटम 31 अगस्त को खत्म हो गया है। लेकिन मिलों ने सरकार की नहीं सुनी। सरकार चुप है, लेकिन रालोद चुप नहीं बैठेगा। वहीं भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने भी जल्द इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। 

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ये हैं जिले की मिलों के बकाये का हाल 
मिल                  गन्ना मूल्य बकाया (लाख रुपये में)
मवाना                    18988
किनौनी                   26754
नंगलामल                6556
सकौती                   580
मोहिउद्दीनपुर             3653

क्या बोले अधिकारी 
शुगर मिलों पर बकाया भुगतान कराने के लिए पूरा दबाव बनाया हुआ है। आगामी पेराई सत्र की तैयारी भी कराई जा रही है। शासन का जो भी निर्देश मिलेगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। -राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र 
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