खौफनाक थीं वारदातें: पुलिस रिमांड में कई बड़े राज खोल सकता है धर्मेंद्र किरठल, गिरोह में कई युवा शामिल
देहरादून से दबोचा गया कुख्यात धर्मेंद्र किरठल पुलिस रिमांड पर कई बड़े राज खोल सकता है।बागपत पुलिस ने उसके रिमांड की तैयारी शुरू कर दी है।
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पश्चिमी यूपी के मोस्ट वांटेड धर्मेंद्र किरठल को देहरादून से गिरफ्तार करने के बाद नोएडा एसटीएफ उससे पूछताछ कर रही है। अब बागपत पुलिस ने भी उसे रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि आरोपी रिमांड के दौरान कई राज खोल सकता है। उसके गिरोह में कई युवा भी शामिल हैं, जिनका रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है। ऐसे नए बदमाशों की जानकारी अब पुलिस को मिल सकती है।
एडीजी मेरठ जोन राजीव सभरवाल का कहना है कि धर्मेंद्र शातिर अपराधी है। उसे रिमांड पर लेकर बागपत पुलिस पूछताछ करेंगी। पूछताछ में बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर समेत अन्य जिलों में सक्रिय बदमाशों के धर्मेंद्र से संपर्क और उनके संभावित प्लान के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा। बागपत में अपराध का बोलबाला है। कुख्यात सुनील राठी, धर्मेंद्र किरठल, अमरपाल लुहारा सहित कई अपराधियों के गिरोह बने हैं। पंचायत चुनाव से पहले बागपत में कई हत्याएं हुईं, जिसमें इन बदमाशों की महत्वपूर्ण भूमिका मिली।
विरोधी का साथ देने पर की थी इरशाद की हत्या
12 दिसंबर 2020 को ग्राम किरठल की पट्टी मूले जाट निवासी इरशाद अली (58) की खेत में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इरशाद के बेटे सद्दाम हुसैन ने धर्मेंद्र किरठल, सुन्हेड़ा गांव निवासी सतेंद्र मुखिया, मुजफ्फरनगर के सिसौली निवासी सुभाष उर्फ छोटू और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इस मामले में धर्मेंद्र फरार था। इसके चलते आईजी प्रवीण कुमार ने उस पर 50 हजार का इनाम घोषित कराया था। यह हत्या चुनावी रंजिश को लेकर की गई थी। इरशाद विरोधी कृष्णपाल का साथ दे रहा था। पिछले पंचायत चुनाव में धर्मेंद्र किरठल की मां सुरेश देवी जिला पंचायत सदस्य और पत्नी सुदेश देवी ग्राम प्रधान बनी थीं। इस बार भी उसके परिजन चुनाव लड़ने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस के दबाव के चलते वे ऐसा नहीं कर पाए। इस बार कृष्णपाल की पत्नी मंजू ग्राम प्रधान बनी हैं।
आत्मसमर्पण करने की फिराक में था धर्मेंद्र
पुलिस के मुताबिक, आठ महीने पहले धर्मेंद्र बागपत की कोर्ट में एक केस में जमानत तुड़वाकर जेल जाना चाहता था। उस दिन कोर्ट बंद थी। इसके चलते वह वापस आ गया। दिसंबर में गांव में प्रधानी चुनाव के चलते इरशाद की हत्या हो गई। इसके बाद धर्मेंद्र फरार हो गया। पुलिस का दावा है कि धर्मेंद्र ने जेल जाने का प्लान भी बनाया था।
जेल में बंद रहते दरोगा से थी दोस्ती
मेरठ जिला जेल में 2012 में धर्मेंद्र किरठल बंद रहा है। यहां उसकी एक दरोगा से दोस्ती हो गई थी। बताया गया कि दरोगा जेल में सामान लाने और मुलाकात में मदद करता था। उसकी अन्य कई पुलिसकर्मियों से भी दोस्ती है। कुछ अपराधियों को पकड़वाने में भी उसने मदद की है।
धर्मेंद्र किरठल पर 49 मुकदमे
धर्मेंद्र किरठल के पर 49 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या के 15 से ज्यादा मुकदमे हैं। इनके अतिरिक्त लूट व रंगदारी के मामले हैं। ज्यादातर में उसे जमानत मिल चुकी है। धर्मेंद्र के खिलाफ 28 साल पहले लूट का पहला मुकदमा रमाला थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद से वह लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा है। यूपी के अलावा उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा में गिरोह बनाकर संगठित अपराध करता था। बीते वर्ष 15 अक्टूबर को शासन के निर्देश पर पुलिस ने उसकी 60 लाख रुपये की कीमत की संपत्ति कुर्क की थी। पिछले दिनों पंचायत चुनाव के दौरान धर्मेंद्र किरठल की उसके गांव किरठल के आसपास गतिविधियों की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने तब ड्रोन कैमरों की मदद से जंगल खंगाला था। हालांकि उसका सुराग नहीं लगा था।