UP: हलाल पर बवाल, खड़े हो रहे ये सवाल, इस खास रिपोर्ट में पढ़िए मुस्लिम धर्मगुरुओं का क्या कहना...
Meerut News : मौलाना कल्बे रुशैद कहते हैं कि किसी भी चीज को अंजाम देने का एक उसूल और तरीका होता है। उस तरीके के बगैर कोई काम किया जाता है तो वह हलाल नहीं होता है।
विस्तार
प्रदेश में हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट की खरीद-फरोख्त, भंडारण और वितरण पर प्रतिबंध के बाद शुरू हुआ बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि सरकार को गुमराह करके इस तरह के फैसले कराए गए हैं। किसी उत्पाद पर उसकी वास्तविकता लिख देना ग्राहक के हित में है न कि इससे जन भावनाएं आहत होती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंध अगर प्रमाणिकता को लेकर है तो कार्रवाई गलत प्रमाण पत्र जारी करने वालों पर होनी चाहिए। और जो चीज प्रदेश के अंदर गलत हो उसी उत्पाद के निर्यात के लिए वह प्रमाण पत्र सही कैसे हो सकता है।
नेशनल उलेमा पार्लियामेंट के सेक्रेटरी जनरल मौलाना कल्बे रुशैद कहते हैं कि किसी भी चीज को अंजाम देने का एक उसूल और तरीका होता है। उस तरीके के बगैर कोई काम किया जाता है तो वह हलाल नहीं होता है। मसलन अगर मुझे मालूम है कि कोई व्यापारी चावल का टैक्स अदा किए बगैर चावल बेच रहा है तो वह हलाल नहीं हो सकता। किसी चोरी के जानवर को पकड़ कर काट दिया जाए तो वह हलाल नहीं कहलाएगा। यानी केवल तरीका ही नहीं बल्कि सोर्स भी देखा जाता है कि गैरकानूनी तरीके से कारोबार तो नहीं किया जा रहा है, अगर ऐसा है तो वह उत्पाद हलाल नहीं कहलाएगा।
ग्राहकों की संतुष्टि के लिए उत्पाद के बारे में बताना जरूरी
हलाल और हराम अरबी भाषा का शब्द है। इसका मतलब पवित्र और अपवित्र, पाक और नापाक, अच्छा और बुरा, जायज और नाजायज होता है। देश की एक नामचीन कंपनी अपने विज्ञापन में बताती है कि उसके उत्पाद में गौ मूत्र नहीं है। क्यों कि गौमूत्र किसी मजहब के लिए हलाल है और किसी मजहब के लिए हलाल नहीं है। ग्राहक की संतुष्टि के लिए स्पष्ट लिखा जाता है। भारत के समाज में ग्राहक को भगवान माना जाता है। जहां तक प्रदेश में लगाए गए प्रतिबंध की बात है तो किसी धर्म के रहनुमा से अधिक उस धर्म की ऊंच-नीच को कोई नहीं समझ सकता। ऐसे में इस तरह के प्रतिबंध लगाने से पहले उस धर्म के लोगों की राय जरूर लेनी चाहिए।
राजस्व पर पड़ता असर, इसलिए निर्यात पर नहीं लगाई पाबंदी
जमीअत उलेमाए हिंद के मेरठ में कोषाध्यक्ष हाजी शीराज रहमान का कहना है कि यह सिर्फ सियासी हथकंडा है। एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। ऐसा कैसे मुमकिन है कि हुकूमत प्रदेश में हलाल प्रमाणीकरण, हलाल उत्पाद के खरीद-फरोख्त, भंडारण और वितरण पर प्रतिबंध लगा दे और उसी प्रमाणपत्र का उपयोग निर्यात में किया जाना वैध हो। क्योंकि निर्यात पर भी प्रतिबंध लग जाएगा तो प्रदेश को हासिल होने वाले राजस्व पर गहरा असर पड़ेगा इसलिए इस पाबंदी को निर्यात से दूर रखा गया। बहुत सारे ऐसे उत्पाद होते हैं जो ऐसे पशुओं के मांस या चर्बी से बने होते हैं जो इस्लाम धर्म में हराम है। ऐसे में उस उत्पाद के बारे में ग्राहकों को बताने में किसी को क्याें एतराज हो सकता है?
शीराज का कहना है कि अमेरिका जैसे विकसित देश भी अपने खान पान के उत्पाद पर हलाल लिखते हैं। हलाल उत्पाद सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि गैर मुस्लिम लोग भी इस्तेमाल करते हैं। शीराज ने कहा कि किसी उत्पाद पर हलाल इसलिए लिखा जाता है ताकि ग्राहक को उसके बारे में जानकारी रहे। मेरठ के नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन का कहना है कि सरकार को प्रामणीकरण से दिक्कत है तो गलत प्रमाणपत्र जारी करने वालों पर कार्रवाई करें। अगर प्रमाणीकरण पर एतराज है तो हलाल सर्टिफाइड उत्पाद के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए। हलाल लिखे उत्पाद को खरीदने बेचने, भंडारण और वितरण पर रोक गलत है।
ईमान से जुड़ा मामला, इसलिए एक्शन में है सरकार
आल इंडिया जमीअतुल कुरैश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूसुफ कुरैशी कहते हैं कि यह मुसलमानों के ईमान से जुड़ा हुआ मामला है। किसी उत्पाद पर अगर हलाल लिखा है तो उससे किसी को क्या दिक्कत हो सकती है। सरकार यह मैसेज देना चाहती है कि हम हलाल के मानने वालों को दबाना चाहते हैं। यह वर्ग विशेष पर अनुचित तरीके से दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर कोई एजेंसी, संस्था या समूह गलत तरीके से पैसे लेकर प्रमाणपत्र जारी कर रहा है तो उस पर कार्रवाई करे।
क्या है पूरा मामला
दर असल पिछले 17 नवंबर को लखनऊ के हजरतगंज थाने में भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार शर्मा ने एक एफआईआर दर्ज कराई जिसमें कहा गया था कि कुछ कंपनियां एक विशेष समुदाय में अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए हलाल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर रही हैं जिससे जनभावनाएं आहत हो रही हैं। इसी आधार पर अगले ही दिन प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर हलाल प्रमाणनयुक्त औषधि, चिकित्सा युक्ति व प्रसाधन सामग्रियों के निर्माण, भंडारण, वितरण और क्रय विक्रय करते हुए पाए जाने पर कार्रवाई करने को कहा गया। हजरतगंज थाने में दर्ज एफआईआर की जांच एसटीएफ काे सौंप दी गई और एसटीएफ ने तमाम जिलों में छापेमारी भी शुरू कर दी।
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क्यों जारी किया जाता है हलाल सर्टिफिकेट
हलाल सर्टिफिकेट कोई सरकारी एजेंसी जारी नहीं करती। जमीअत उलेमाए हिंद के साथ-साथ कई अन्य ट्रस्ट भी इस प्रमाणपत्र को जारी करते हैं। यह प्रमाणपत्र खास कर मुस्लिम वर्ग के लिए जारी किया जाता है ताकि उन्हें यह भरोसा हो सके प्रोडक्ट में कोई ऐसी चीज नहीं है, जो हराम हो। मांस के मामले में कटान झटके से नहीं हुई है और दवाओं के मामले में ऐसे जानवर के मांस या चर्बी का इस्तेेमाल नहीं किया गया है जो इस्लाम धर्म में हराम है।
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