Meerut Loksabha Seat: रावण की ससुराल में छाएंगे राम या नारी शक्ति पड़ेगी भारी, कांटे की टक्कर जारी
मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर फाइट दिलचस्प हो चली है। यहां सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा पर्दे के राम अरुण गोविल को कड़ी टक्कर देती नजर आ रही हैं। शुरुआत में अरुण गोविल ने बढ़त बनाई वहीं दोपहर बाद सुनीता वर्मा ने लीड ले ली।
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मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट की मतगणना जारी है। इस सीट पर मंगलार को जैसे ही मतगणना शुरू हुई तो भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल ने बढ़त बना ली। सुबह 11 बजे तक कमल खिलता दिखा तो वहीं दिन चढ़ते ही साइकिल ने रफ्तार पकड़ ली। यहां भाजपा भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल और सपा गठबंधन प्रत्याशी सुनीता वर्मा के बीच सीधा मुकाबला है।
रावण की ससुराल मेरठ में रामायण सीरियल के 'राम' जीतेंगे या नारी शक्ति कमाल करेगी, इस पर सबकी नजर है। हालांकि बसपा उम्मीदवार देवव्रत त्यागी भी मैदान में हैं। सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम में मतगणना जारी है।
मेरठ से तीन बार सीट जीत चुकी भाजपा को इस बार अपनी सीट बचाने मुश्किल दिख रही है। भाजपा के अरुण गोविंद सपा की सुनीता वर्मा से करीब 25000 वोटो से पीछे चल रहे हैं। सुनीता ने लगातार लीड बनाई है।
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2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो कड़ा मुकाबला हुआ था। भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल ने 5 लाख 86 हजार 184 वोट हासिल किए थे। बहुजन समाज पार्टी के हाजी याकूब कुरैशी को 5 लाख 81 हजार 455 वोट मिले। दोनों के बीच अंत तक कड़ा मुकाबला रहा और जीत आखिरकार राजेंद्र अग्रवाल के खाते में गई।
मेरठ में भाजपा की भारी मतों से जीत रही है। देश में भी भाजपा की सरकार बन रही है। लोगों से बहुत स्नेह मिला, इसके लिए सबका धन्यवाद। -अरुण गोविल, भाजपा प्रत्याशी
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर पहली बार सपा बड़े अंतर से जीतने जा रही है। भाजपा को हराकर जनता बदलाव चाहती है। - सुनीता वर्मा, सपा
सर्वसमाज ने बड़ी संख्या में वोट किया है। बहुत मजबूती से चुनाव लड़ा है। बसपा की जीत होगी। -देवव्रत त्यागी, बसपा प्रत्याशी
सीट का राजनीतिक इतिहास
-1952 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शहनवाज खान सांसद चुने गए जो लगातार 1962 तक मेरठ की सीट पर काबिज रहे। 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के महाराज सिंह भारती ने चुनाव जीता।
-1971 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और शहनवाज खान दोबारा सांसद चुने गए। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के कैलाश प्रकाश चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
-1980 और 1984 के चुनाव कांग्रेस के मोहसिना किदवई सांसद चुनी गईं। 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के हरीश पाल ने चुनाव जीता।
-1991, 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बाजी मारी और यहां से लगातार तीन बार अमर पाल सिंह सांसद बने।
-1999 में भाजपा के हाथ से सीट चली गई और एक बार फिर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना सांसद चुने गए।
-2004 के चुनाव में ये सीट बसपा की झोली में चली गई और यहां से हाजी शाहिद अखलाक जीतकर संसद पहुंचे।
-2009 के चुनाव में फिर भाजपा ने वापसी की। भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीन बार चुनाव जीते। अग्रवाल 2009, 2014 और 2019 में भी सांसद बने।