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तेंदुए की दहाड़ से वेस्ट यूपी में दहशत, विशेषज्ञों के चेहरे पर आई मुस्कान

Tue, 08 Jan 2019 05:28 PM IST
दुष्यंत शर्मा सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 08 Jan 2019 05:28 PM IST
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Meerut, Leopard's entry and expert in West UP became happy
फाइल फोटो

मेरठ में हस्तिनापुर सेंक्चुरी से सटे जिलों में आजकल तेंदुए की दहाड़ बहुत सुनाई देती है। कुछ माह पहले बागपत के जंगल में लगाए गए खटके में एक तेंदुए की मौत हो गई थी। वहीं अब इंचौली और मवाना क्षेत्र से तेंदुआ देखे जाने की खबरें आ रही हैं।

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इसको लेकर ग्रामीण परेशान हैं, लेकिन वाइल्ड लाइफ वैज्ञानिक खुशी जता रहे हैं। वैज्ञानिक सेंक्चुरी के आसपास के जिलों में तेंदुए के बढ़ते मूवमेंट को उनकी बढ़ती संख्या से जोड़ कर देख रहे हैं। 
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तेंदुए खुद ही इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। कभी-कभार खाने की तलाश में वो अंजाने ही इंसानी आबादी में घुस जाते हैं। लगातार शिकार के चलते बीते दशकों में तेंदुए और बाघ की संख्या देश में बेहद कम हो गई थी। हस्तिनापुर सेंक्चुरी और बिजनौर के जंगलों में कई बार इनके शिकार की सूचना मिली।
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कुछ सालों से शिकार पर सख्ती हुई तो इनकी संख्या में इजाफा होने लगा है। तेंदुए और बाघ पर रिसर्च कर रहे वाइल्फ लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिक यादवेंद्रदेव वी झाला बताते हैं कि तेंदुए की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। हस्तिनापुर सेंक्चुरी में तेंदुए की पसंद वाले जानवर होने के चलते वो वहां पर आ रहे हैं। यह एक अच्छी खबर है। तेंदुए का मूवमेंट सौ-डेढ़ सौ किलोमीटर में होना कोई बड़ी बात नहीं है।

लोग रहें जागरूक
मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार बताते हैं कि तेंदुए की संख्या बढ़ी है। इस वजह से उसका मूवमेंट भी बढ़ रहा है। अगर वह कहीं दिखता है तो वहां से हट जाएं। वन विभाग के अफसरों को जानकारी दें।

जैव विविधता का महत्व समझें

वैज्ञानिक यादवेंद्रदेव बताते हैं कि हम जितनी तेजी से जंगल खत्म करते रहेंगे, तेंदुआ भी उसी तेजी से हमारे पास आता रहेगा। हमें जैव विविधता के महत्व को समझने की जरूरत है। आज सबसे ज्यादा संख्या कुत्तों की बढ़ रही है। जंगलों में नील गाय की संख्या हस्तिनापुर सेंक्चुरी से ज्यादा है। ऐसे में वो आसानी से मिलने वाले भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाके में आता है। अगर तेंदुआ इन जानवरों का शिकार नहीं करेगा तो जैव विविधता का संतुलन बिगड़ जाएगा।

शहर में तीन बार आया
- बागपत में अक्तूबर माह में जंगल में लगाए गए खटके में फंसकर तेंदुए की मौत 
- मेरठ में सितंबर 2017 में सरधना क्षेत्र में करनाल हाईवे पर एक तेंदुए की मौत
- मेरठ में अप्रैल 2016 में कैंट मिलिस्ट्री अस्पताल आया तेंदुआ 
- फरवरी 2014 में आबूलेन पर कई दिन तेंदुआ घूमता रहा

तेंदुए के बारे में 
- भारत में करीब 12 हजार है तेंदए
- संसार में 37 वन्य बिल्ली प्रजातियों में आता है तेंदुआ 
- बहुत ही चालाक, फुर्तीला रात्रिचर है
- हिरण, नील गाय, कुत्ते, जंगली सूअर और बकरी बेहद पसंद  

हस्तिनापुर सेंक्चुरी में छह तेंदुए रिकॉर्ड

डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कि हस्तिनापुर सेंक्चुरी में छह तेंदुए रिकॉर्ड हैं। सेंक्चुरी के आसपास गन्ने की खेती की अधिकता के कारण तेंदुआ शिकार करते-करते आबादी में आ जाता है। तेंदुआ सुबह और शाम को शिकार करता है।

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