कोरोना अपडेट: दूसरी लहर का बड़ा असर, टॉप टेन में आया मेरठ, इस रिपोर्ट में पढ़िए अब तक का पूरा अपडेट
- मेरठ में फिर बढ़ रहा कोरोना, एक दिन में मिले 119 नये मरीज
- कोरोना का असर, मृत्यु के मामले में चौथे नंबर पर मेरठ
विस्तार
सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में मेरठ भले ही फिसड्डी है पर कोरोना संक्रमण में प्रदेश के टॉप टेन जिलों में शामिल है। कोरोना की दूसरी लहर के बावजूद नियमों के पालने में लोगों की बढ़ती लापरवाही से मेरठ जिला दोनों मंडलों (सहारनपुर-मेरठ) में सक्रिय और मृत्यु के मामलों में पहले स्थान पर है। प्रदेश के 75 जिलों में सक्रिय मरीजों में मेरठ छठे और मृत्यु के मामले में चौथे नंबर पर है।
हालांकि कोरोना के कुल मरीजों में मंडल में गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर क्रमश: 27 व 26 हजार से ज्यादा संक्रमित होने के कारण मेरठ से आगे हैं, लेकिन सक्रिय मामले और मौत मेरठ में अधिक हैं। शासन के आंकड़ों के मुताबिक, छह अप्रैल, 2021 तक मेरठ में 649 एक्टिव केस हैं और 443 लोगों की मौत हो चुकी है। मेरठ में पिछले 10 दिन में कोरोना का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ा है। इस दौरान 611 मरीज मिले हैं यानी करीब हर रोज 61 मरीज मिले। ऐसा तीन माह बाद हुआ है, जब मरीजों का औसत रोजाना इतना रहा है।
मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तलियान के मुताबिक, मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अन्य जिलों में भी बढ़ रहे हैं। कोशिश की जा रही है कि आने वाले वक्त में मरीजों की संख्या कम हो।
मेरठ और सहारनपुर मंडल की स्थिति
जिला सक्रिय मरीज कुल मौत
मेरठ 649 443
गौतमबुद्धनगर 579 93
गाजियाबाद 410 102
बुलंदशहर 130 94
बागपत 38 36
हापुड़ 51 68
सहारनपुर 392 135
मुजफ्फरनगर 336 115
बिजनौर 143 66
शामली 123 31
आंकड़ों में फर्क अब भी जारी
शासन और जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का फर्क अभी भी बरकरार है। मेरठ स्वास्थ्य विभाग कोरोना से 410 मौतें दिखा रहा है, जबकि शासन के आंकड़ों में यह संख्या 443 है।
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लापरवाही के कारण युवा ज्यादा हो रहे शिकार
जो जितनी ज्यादा लापरवाही बरतेगा, उसके उतने ही कोरोना की चपेट में आने की आशंका ज्यादा है। फिर चाहे वह युवा ही क्यों न हो? मास्क न लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने के कारण अब ज्यादा युवा कोरोना का शिकार हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अप्रैल में मिले 462 मरीजों पर किए गए अध्ययन से यह खुलासा हुआ है। इनमें 46.8 प्रतिशत 20 से 44 साल उम्र के और 22.6 प्रतिशत 45 से 59 साल उम्र के बीच के संक्रमित पाए गए हैं। शून्य से 10 साल तक की उम्र के बच्चे महज 4.8 फीसदी हैं और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का प्रतिशत भी 19.5 फीसदी है। 11 से 19 साल की उम्र के बीच के किशोर वर्ग की तादाद 7.3 प्रतिशत है, जबकि इनमें करीब तीस प्रतिशत महिला वर्ग हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बावजूद इसके युवा वर्ग इस बीमारी को हराने में बाकी के मुकाबले ज्यादा सक्षम हैं। अभी तक उनकी मृत्यु दर सबसे कम रही है।
किसी को भी हो सकता है संक्रमण
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि संक्रमण किसी को भी हो सकता है। इस वायरस से जुड़ी बारीकियों में से अहम बात यह है कि किसी व्यक्ति में यह संक्रमण बहुत हल्का हो सकता है, जहां संक्रमण के कोई संकेत या लक्षण नहीं दिखते, लेकिन फिर भी वह व्यक्ति वायरस का वाहक बन सकता है। उस व्यक्ति से यह दूसरे व्यक्ति में भी पहुंच सकता है।
अप्रैल में अध्ययन के आंकड़े
उम्र संक्रमित
0-10 22
11-19 33
20-44 214
45-59 103
60 से अधिक 90
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