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मेरठ: सूखा और गीला कूड़ा अलग नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना, नए साल से और सख्त होंगे नियम

Mon, 28 Dec 2020 02:17 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 28 Dec 2020 02:17 PM IST
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Meerut: If dry and wet garbage is not given separately, fine will be imposed
डोर-टू-डोर कूड़ा वाहन - फोटो : अमर उजाला
मेरठ को स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंक दिलाने के लिए एक जनवरी से नियम सख्त किए जा रहे हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा वाहनों को सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग देना जरूरी होगा। ऐसा नहीं करने पर भवन स्वामियों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 के तहत 200 रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। नगर आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि लापरवाही पर वार्ड के सफाई नायक और सफाई एवं खाद्य निरीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की सूची में मेरठ 47 में से 41वें पायदान पर आकर फिसड्डी साबित हुआ था। इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण की स्थिति सुधारने के लिए दो माह बचे हैं।
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160 वाहनों से उठाया जा रहा कूड़ा
90 वार्डों में निगम द्वारा 160 वाहनों से डोर टू डोर कूड़ा जमा किया जा रहा है। वाहन चालकों की कमी के चलते करीब 50 वाहन क्षेत्रीय डिपो में खड़े हैं। इसके चलते वार्ड के कुछ इलाके छूट रहे हैं।
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150 टन कूड़े का हो रहा निस्तारण
शहर से रोजाना करीब 900 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन गांवड़ी प्लांट पर बैलेस्टिक सैपरेटर मशीन से केवल 150 टन कूड़े का ही रोजाना निस्तारण हो रहा है। फिलहाल शहर से निकले कूड़े को लोहियानगर डंपिंग ग्राउंड पर डाला जा रहा है। यहां भी कूड़े का पहाड़ खड़ा होता जा रहा है। बढ़ते कूड़े के पहाड़ों पर एनजीटी सख्ती कर चुकी है। एनजीटी के आदेश पर ही गांवड़ी में डंप कूड़े को खत्म किया जा रहा है।

जुर्माने से बचने के लिए यह करना होगा
लोगों को घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों आदि में नीले और हरे रंग के डस्टबिन रखने होंगे। हरे डस्टबिन में फल एवं सब्जी के छिलके, खराब भोजन, सब्जी और दही आदि गीला कचरा तो नीले डस्टबिन में प्लास्टिक, कागज, बोतल, पैकेट, डिब्बे और कपड़े आदि सूखा कचरा रहेगा। कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में भी हरा और नीला डस्टबिन लगा है। लोगों को अपना कूड़ा इनमें अलग-अलग डालना होगा।

मेडिकल वेस्ट भी अलग
कूड़ा गाड़ियों में मेडिकल वेस्ट के लिए भी अलग से छोटा डस्टबिन रहेगा। लोगों को घरों के मेडिकल वेस्ट जैसे दवाई, इंजेक्शन, पट्टी, सिरींज आदि कूड़ा स्टाफ को एक अलग बैग में रखकर देनी होगी।

जन सहयोग जरूरी
नगर आयुक्त मनीष बंसल का कहना है कि शहर को स्वच्छ और हराभरा बनाना है तो हम सभी को सहयोग करना होगा। गीले और सूखे कूड़े के अलग-अलग कलेक्शन से बहुत बड़ी समस्या हल हो सकती है। लोग कूड़ा नाले और नालियों में फेंकने के बजाय कूड़ा वाहनों में व्यवस्थित तरीके से डालें। गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग नहीं देने पर जुर्माना वसूला जाएगा।

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