Meerut: जेल में बंद पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी का चचेरा भाई रंगदारी में पकड़ा, छह घंटे में थाने से छोड़ा
मेरठ में पूर्व मंत्री का चचेरा भाई रंगदारी में पकड़ा, छह घंटे में थाने से छोड़ दिया। बताया गया कि चचेरे भाई ने तीन करोड़ की 1400 गज जमीन पर कब्जा कर लिया था। वहीं पुलिस द्वारा रंगदारी के मामले में गिरफ्तार करते ही थाने पर भीड़ जुट गई। वहीं पुलिस ने आरोपी को नोटिस देकर छोड़ दिया।
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चार दिन से जेल में बंद पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी का रुतबा अभी तक बरकरार है। मंगलवार को लिसाड़ीगेट और कोतवाली पुलिस याकूब के चचेरे भाई यामीन कुरैशी को पांच लाख की रंगदारी और करीब तीन करोड़ की 1400 गज जमीन पर कब्जा करने के मुकदमे में गिरफ्तार करके लाई थी। लोगों की थाने पर भीड़ जुटी तो पुलिस ने सिर्फ छह घंटे में नामजद आरोपी को छोड़ दिया। इसे लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं कि यामीन को कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया। इस मामले की रिपोर्ट खुफिया विभाग ने शासन को भेज दी है।
याकूब कुरैशी और उनके दोनों बेटे इमरान व फिरोज जेल में हैं। पुलिस गैंगस्टर के तहत उनकी संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रही है। शुक्रवार रात ही पुलिस दिल्ली से याकूब और इमरान को गिरफ्तार करके लाई थी। दिल्ली से जेल तक याकूब की खूब खातिरदारी की गई थी। मंगलवार को लिसाड़ीगेट और कोतवाली पुलिस फिर से याकूब के रुतबे के सामने कमजोर दिखाई दी। पुलिस ने बताया कि चार जनवरी को कोतवाली निवासी अब्दुल रहमान की शिकायत पर याकूब के चचेरे भाई यामीन कुरैशी निवासी सराय बहलीम के खिलाफ रिपोर्ट हुई थी।
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आरोप था कि यामीन दबंग है और उसने पुराने कमेले के पास 1400 गज जमीन पर कब्जा किया हुआ है। इस पर अवैध पार्किंग की गई। यामीन पर रंगदारी, जमीन पर कब्जे की धारा में मुकदमा दर्ज है। इस मामले में पुलिस यामीन को पकड़कर लाई तो समर्थन में भीड़ जुट गई। बाद में आरोपी को नोटिस देकर छोड़ना पड़ा। एसपी सिटी पीयूष सिंह का कहना कि जमीन पर कब्जे का मामला था। आरोपी ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया, जिसके बाद उन्हें 41 (ए) का नोटिस देकर छोड़ा है।
वहीं, पीड़ित अब्दुल रहमान ने बताया कि कई साल से उनकी जमीन पर कब्जा था। अब जमीन कब्जा मुक्त हो गई। दावा किया कि उनके पास कोर्ट का आदेश भी है। वहीं, नामजद आरोपी यामीन कुरैशी का कहना है कि करीब 20 साल पहले ही उन्होंने यह जमीन खरीदी थी। अब्दुल रहमान ने कोर्ट में वाद दायर किया था। वर्ष 2018 में इसे खारिज कर दिया गया। पुलिस ने ऐसा क्यों किया है, यह बात कुछ समझ नहीं आ रही है। इस जमीन के पूरे कागज मेरे पास है, वह कोर्ट की भी शरण लेंगे।
एसपी सिटी के मुताबिक याकूब का हापुड़ रोड स्थित अलीपुर में मीट फैक्टरी, शास्त्रीनगर में अस्पताल और स्कूल मानक के विपरीत बने हैं। यह फैक्टरी अलफहीम मीटेक्स कंपनी के नाम से है। 26 जगह चिह्नित कर करीब 85 करोड़ की संपत्ति को जब्त करने के कागज तैयार करके विवेचक मुंडाली थाना प्रभारी को दे दिए है। इसकी मॉनीटरिंग सीओ किठौर रूपाली राय कर रही है। कंपनी का रिकॉर्ड न जुटाने के चलते गैंगस्टर के तहत संपत्ति को जब्त नहीं किया जा रहा है। लगातार देरी करने पर एसपी सिटी ने सीओ किठौर और थाना प्रभारी मुंडाली को मंगलवार तलब किया। उन्होंने दो दिन में कंपनी का भी रिकॉर्ड जुटाने की बात कहीं है।
यह था मामला, अब कसा जा रहा शिकंजा
31 मार्च 2022 को याकूब, उनकी पत्नी संजीदा बेगम, बेटे इमरान और फिरोज सहित 17 लोगों पर खरखौदा थाने में केस हुआ था। फिरोज 27 नवंबर को कोर्ट में सरेंडर होकर जेल चला गया था। वहीं, 50 हजार के इनामी याकूब कुरैशी व इमरान को शुक्रवार रात दिल्ली स्थित चांदनी महल के पास से गिरफ्तार किया गया था। इन्हें 56 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। याकूब और बेटों को पहले धोखाधड़ी के मामले में रिमांड बनेगा। याकूब के खिलाफ 16 मुकदमे है, उनकी भी दोबारा से जांच हो सकती है।