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मोनू गुर्जर के लाइव मर्डर पर चुप्पी: अब आरोपी ईशू और रोबिन ने खोले कई बड़े राज

Wed, 27 Mar 2019 03:11 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 27 Mar 2019 03:11 AM IST
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Meerut gurjar murder case, arrested accused Ishu and Robin opened several secrets
मोनू गुर्जर का फाइल फोटो और जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

मोनू गुर्जर को दायमपुर गांव में साजिश के तहत लाया गया। उसकी हत्या होते कई लोगों ने देखा। लेकिन तमाशबीन बने रहे। यह बात पुलिस की पूछताछ में आरोपी ईशू और रोबिन ने बताई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने कई नाम बताए हैं। मोनू की हत्या के दौरान मौजूद रहे लोग भी जेल जाएंगे। मामला यूपी के मेरठ जिले का है। 

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पुलिस ने बताया कि मोनू गुर्जर को शोभापुर गांव से दायमपुर गांव के जंगल में ले जाकर आरोपियों ने बुरी तरह पीटा था। उस पर ईंटों से प्रहार किए थे। जंगल में आते-जाते कई लोगों ने आरोपियों को अकेले मोनू को ईंटों से कुचलते देखा। लेकिन किसी ने इसका विरोध तक नहीं किया। यही नहीं इसकी सूचना कंट्रोल रूम या थाना पुलिस को भी नहीं दी। बताया गया कि आरोपियों ने इन लोगों को धमकी दी थी। हत्या के बाद भी दो दिन तक मोनू का शव जंगल में पड़ा रहा। लेकिन इसके बावजूद भी पुलिस को सूचना नहीं दी गई। पुलिस के अनुसार ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें हत्या के केस में नामजद किया जाएगा।
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आशीष हत्याकांड में भी आए थे रोबिन व दीपक के नाम 
मोनू के परिजनों ने बताया कि आशीष गुर्जर की हत्या में गोपी पारिया के भाई प्रशांत सहित नौ लोग नामजद हुए थे। पुलिस ने सभी को जेल भेजा था। उस वक्त चर्चा थी कि आशीष की हत्या में दीपक और रोबिन भी शामिल थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें निर्दोष बताकर छोड़ा था। अब मोनू की हत्या में दोनों नामजद हुए हैं। पीड़ित परिवार का कहना कि आरोपी चंदा एकत्र कर गोपी पारिया की हत्या के बदले में कई लोगों को मारने का प्लान बनाने में लगे थे। इसकी जानकारी कई बार पुलिस को दी, लेकिन वह गंभीर नहीं हुई। 
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अभी शांत नहीं हत्यारोपी 
मोनू गुर्जर के ताऊ दर्शन गुर्जर ने बताया कि आशीष की हत्या के दौरान मौके से भागते हुए आरोपियों ने रास्ते में उन पर भी गोली चलाई थी, जिसमें वे बाल-बाल बचे थे। गांव में आरोपी पक्ष के कुछ लोग अभी चंदा कर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि मुकदमे में हत्यारोपियों की मजबूत पैरवी हो सके। आशीष की हत्या के बाद भी आरोपियों ने ऐसे ही चंदा एकत्र किया था। पुलिस प्रशासन को इस पर रोक लगानी चाहिए। आरोप और चर्चा है कि इसमें भीम आर्मी के कई कार्यकर्ता भी शामिल होते थे।

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