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मेरठ ने देश को दिए उन्नत किस्म के 27 लाख सीमन

Fri, 01 Jan 2021 02:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2021 02:08 AM IST
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Meerut gave 27 lakhs of advanced varieties to the country
मेरठ। केंद्रीय गोवंश अनुसंधान केंद्र मेरठ ने देश को 27 लाख उन्नत सांड का सीमन उपलब्ध कराया है। 20 लाख सीमन केंद्र में अभी भी रिजर्व है। इसके अलावा 15 हजार से ज्यादा गोधन पर काम करके फ्रीजवाल नस्ल को पहली बार ट्रेड मार्क दिया। ये बात बृहस्पतिवार को कैंट स्थित केंद्रीय गोवंश अनुसंधान केंद्र में आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम के समापन पर डायरेक्टर डॉ. अभिजित मित्र ने कही।
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उन्होंने कहा कि आज देश में शाकाहारी लोगों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में हमें गोधन को संवर्धन और उन्नत करने की जरूरत है। ताकि आने वाले समय में लोगों को दूध-प्रोटीन उपलब्ध करा सकें। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्नत कृषि के लिए उन्नत बीज की जरूरत होती है, वैसे ही उन्नत पशुओं के लिए उन्नत सीमन की जरूरत होती है। इसको लेकर संस्थान ने उन्नत किस्म के 135 सांड के 27 लाख सीमन देश में विभिन्न जगहों पर भेजे हैं। कुल 47 लाख सीमन तैयार किए गए। गोवंश से सिर्फ दूध की आमदनी नहीं होनी चाहिए। इसका गोबर बहुत उपयोगी है। गोबर से खाद, गमला, दीया बनाया जाए। इसके अलावा किसानों को गन्ने की खेती में गोबर खाद डालने का तरीका सिखाए जाए।
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डायरेक्टर अभिजित मित्र ने कहा कि केंद्र ने 35 मिलिट्री फार्म के साथ मिलकर 15 हजार से ज्यादा फ्रीजवाल उन्नत किस्म की गाय दी हैं। ये देश की एकमात्र सिंथेटिक ब्रीड है। इसके दूध की क्षमता 3628 प्रति किलो 305 दिन है। बाकी देशी गायों की क्षमता रोजाना दो से पांच लीटर प्रतिदिन है। उन्होंने कहा कि मेरठ में गोवंश केंद्र होने के बावजूद इसकी पहचान कम है। ऐसे में गो संस्थान का लोगो बनवाया गया है। आने वाले समय में 50 ब्रीड के एक हजार दुधारू गोवंश यहां रखने की प्लानिंग है।
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कचरा निष्पादन की जानकारी दी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसवीएस राणा रहे। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. जेके सिंह, आयोजक डॉ. नरेश प्रसाद एवं वैज्ञानिक-कर्मचारी मौजूद रहे। इस मौके पर 16 से 31 दिसंबर तक स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान किए गए कार्य के बारे में जानकारी दी गई। स्वच्छता पखवाड़ा में औरंगाबाद गांव में पशु चिकित्सा, फिटकरी गांव में किसान दिवस, महिला वैज्ञानिकों ने शिपुरा गांव की महिलाओं को जागरूक किया। इसके अलावा किसानों को सुरक्षित कचरा निष्पादन की जानकारी दी गई।
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