बदइंतजामी: कूड़ा गाड़ियों को CM की हरी झंडी मिली ड्राइवर नहीं, चार माह बाद भी गृह मंत्रालय से नहीं जुड़ा ITMS
सीएम योगी ने 26 अगस्त को मेरठ पुलिस लाइन में निगम की कूड़ा गाड़ियों को हरी झंडी दिखाते हुए कहा था कि अब ये गाड़ियां घर-घर तक पहुंचेंगी, लेकिन ये गाड़ियां घर घर तो तब पहुंचेंगी जब इन्हें ड्राइवर मिलेंगे। यही नहीं चार माह बाद भी आईटीएमएस को गृहमंत्रालय से नहीं जोड़ा जा सका है।
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मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिन 76 कूड़ा गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई थी उन्हें डेढ़ माह बाद भी ड्राइवर नहीं मिल सके हैं। इन गाड़ियों पर निगम के डिपो में धूल जम रही है। वहीं चार माह बाद भी आईटीएमएस को गृह मंत्रालय के सर्विलांस से नहीं जोड़ा जा सका है।
सीएम योगी ने 26 अगस्त को पुलिस लाइन में निगम की कूड़ा गाड़ियों को हरी झंडी दिखाते हुए कहा था कि अब ये गाड़ियां घर-घर तक पहुंचेंगी। इसके बावजूद इनके पहिये नहीं घूम सके हैं। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह कहते हैं कि नई कूड़ा गाड़ियां निजी कंपनी को सौंप दी गई हैं। चालक कंपनी को ही भर्ती करने हैं। अगले दो-तीन दिन में इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
वहीं दस मई को सीएम ने मेरठ में आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) का अवलोकन करते हुए इसे गृह मंत्रालय के सर्विलांस से जोड़ने के निर्देश दिए थे। इस दिशा में अभी तक कार्य नहीं हुआ है। वहीं नगर निगम के अधिशासी अभियंता अमित शर्मा का कहना है कि शासन को बजट प्रस्ताव भेजा है। बजट मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा।
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दो विभागों के बीच फंसा लाइट एंड साउंड सिस्टम
शहीद स्मारक पर पर्यटन विभाग द्वारा लगाया गया लाइट एंड साउंड सिस्टम अभी तक भी चालू नहीं हो पाया है। इस लाइट एंड सिस्टम का भी लोकार्पण मुख्यमंत्री ने दस मई को ही किया था। जहां पर्यटन विभाग लाइट एंड सिस्टम का हस्तांतरण नगर निगम को किए जाने की बात करता है वहीं नगर निगम ने अभी तक इसके संचालन को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है।
बर्न यूनिट: लोकार्पण को चार माह बीते, शुरू नहीं हुआ इलाज
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में लोकार्पण के चार माह बाद भी बर्न यूनिट में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। करीब तीन करोड़ से बनी बर्न यूनिट का लोकार्पण 10 मई 2022 को सीएम योगी ने किया था। यहां न उपकरण आए हैं और न ही स्टाफ मिल सका है। गंभीर जले हुए मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इलाज कब मिलेगा, इसका किसी को पता नहीं है।
विक्टोरिया पार्क में 2006 में हुए भीषण अग्निकांड में 65 लोगों की मौत हो गई थी, तब अगर बर्न यूनिट होती तो शायद बहुत से लोगों की जान बच जाती। डेढ़ दशक बाद भी स्वास्थ्य विभाग वहीं खड़ा है। इस बर्न यूनिट में पांच बेड की आईसीयू है। 20 बेड का जनरल वार्ड तैयार किया गया है।
मेडिकल में सामान्य तौर पर हर माह 30 से 35 मरीज जले हुए आते हैं। कम जले मरीजों को तो भर्ती कर लिया जाता है, लेकिन 14 से 15 मरीज ऐसे भी आते हैं जिन्हें रेफर करना पड़ता है। कॉलेज मेडिकल प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता का कहना है कि इस बाबत शासन को अवगत कराया जा चुका पत्र व्यवहार चल रहा है।