ईंधन महंगा होने का असर: माल की लागत और ढुलाई दोनों बढ़ी, निर्माण क्षेत्र प्रभावित, उत्पाद महंगे
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर मेरठ के उद्योगों पर दिखने लगा है। उद्योग संगठनों के अनुसार ईंधन महंगा होने से उद्योगों पर हर महीने लगभग 80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा और कई उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर औद्योगिक इकाइयों पर दिखाई देने लगा है। आईआईए, परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन और ध्यानचंद नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अनुसार ईंधन महंगा होने से उद्योगों पर हर माह अब 80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। मेरठ की इंडस्ट्री का मासिक कारोबार लगभग 4000 करोड़ है। ट्रांसपोर्टेशन और कच्चे माल की लागत बढ़ने से खेल, जिम उपकरण, ट्रांसफार्मर और ट्रैक्टर पार्ट्स महंगे हो जाएंगे।
आईआईए के डिवीजनल अध्यक्ष तनुज गुप्ता बताते हैं कि सबसे अधिक असर निर्माण क्षेत्र पर पड़ेगा। सीमेंट, सरिया, ईंट, बालू और अन्य निर्माण सामग्री की ढुलाई सीधे तौर पर डीजल पर निर्भर है। निर्माण कार्यों की लागत में करीब पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी तय है। पहले से ही महंगे कच्चे माल और श्रम लागत के बीच ईंधन की नई कीमतों ने हर किसी का बजट बिगाड़ दिया है।
निर्माण क्षेत्र : पांच प्रतिशत
स्पोर्ट्स : एक प्रतिशत
जिम उपकरण : 2.5 प्रतिशत
दवा : 0.50 प्रतिशत
ट्रांसफार्मर : दो प्रतिशत
ट्रैक्टर पार्ट्स : दो प्रतिशत
पेट्रोल-डीजल की दरें
साधारण पेट्रोल : 97.27
एक्सपी 95
(हाई पावर) : 105.88
डीजल : 90.56
भाव : रुपये/लीटर
सीएनजी के दाम
गेल गैस : 88
आईजीएल : 87.58
भाव : रुपये/किलो
परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुन जैन के मुताबिक शहर के प्रमुख उद्योगों में शामिल खेल सामग्री, जिम इक्विपमेंट, दवा उद्योग, ट्रांसफार्मर निर्माण, ट्रैक्टर पार्ट्स और इंजीनियरिंग उत्पादों पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा। ध्यानचंद नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पुंडीर ने बताया कि रबर ऑयल 100 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर हो गया है। रबर एनबीआर 180 रुपये किलो से 240 रुपये किलो हो गया। माल की ढुलाई, मशीन संचालन और सप्लाई चेन की लागत बढ़ने से उत्पादों की कीमतों में तेजी आ गई है।
2022 के बाद माल ढुलाई हुई महंगी
चैंबर फार्म डेवलपमेंट एंड प्रमोशन ऑफ एमएसएमई के सचिव आशुतोष अग्रवाल ने बताया कि मोहकमपुर, परतापुर, उद्योगपुरम, ध्यानचंद नगर, विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एस्टेट, सरस्वती एस्टेट आदि 60 हजार उद्योग सीधे तौर प्रभावित हुए हैं। कच्चे माल और तैयार माल की ढुलाई 2022 के बाद महंगी हुई है। जरूरी है कि पेट्रोल पर वेट घटाया जाए। अभी उद्योग कमजोर मांग से प्रभावित हैं।
माल की कीमत से ज्यादा हुआ भाड़ा
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष गौरव शर्मा के अनुसार कंस्ट्रक्शन में रोड़ी, डस्ट, बजरपुर का कारोबार करने वालों के लिए 50 टन माल से भरे ट्रक की कीमत सहारनपुर से मेरठ 60 हजार रुपये होती थी। इसमें ट्रक में भरे माल की वास्विक कीमत 30 हजार और भाड़ा 30 हजार था। ऐसे में कुल कीमत 60 हजार कीमत पहुंचती थी। डीजल की कीमत बढ़ने के बाद अब भाड़ा 5 हजार रुपये बढ़ गया है। ऐसे में 50 टन माॅल 30 हजार रुपये का है। इसे सहारनपुर से मेरठ लाने 35 हजार भाड़ा लगेगा। अब गाड़ी 65 हजार में मेरठ आएगी।
वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन तेल महंगा होने से रोजमर्रा का खर्च बढ़ जाएगा। अब ऑनलाइन सामान मंगाने पर भी ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। -सत्यम, निवासी देवपुरी
बढ़ती महंगाई ने गरीब की कमर तोड़ दी है। अब शायद कम खाकर गुजारा करना पड़े। सरकार को बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। -यामीन, निवासी श्याम नगर
बच्चों की स्कूल वैन का किराया बढ़ाना मजबूरी हो जाएगी। कमाई का बड़ा हिस्सा पेट्रोल-डीजल में ही चला जाता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। - आकाश, स्कूल वैन चालक
तेल महंगा होने का असर केवल वाहनों पर नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से दूध, राशन और सब्जियों के दामों पर भी पड़ेगा। -रोहित, निवासी माधवपुरम
चुनाव खत्म होते ही तेल के दाम बढ़ गए हैं। इसका पहले से ही अंदाजा था। लोग पहले ही महंगाई से परेशान थे, अब हर चीज और महंगी हो जाएगी। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ जाएगी। -रोहन, निवासी वेदव्यास पुरी