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मेरठ : पटाखा फैक्टरी हादसा : बार-बार धमाकों से दहल उठा रोहटा
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मेरठ : पटाखा फैक्टरी हादसा : बार-बार धमाकों से दहल उठा रोहटा
मेरठ। रोहटा में दोपहर 12 बजे तक सब ठीक था। इसके बाद यहां की पटाखा फैक्टरी में बार-बार तेज धमाके होते हैं और आग और धुएं का गुबार बढ़ता जाता है। फैक्टरी में पटाखों में विस्फोट और सिलिंडर फटने से रोहटा दहल उठा। दहशत में आए ग्रामीणों ने काफी देर तक हंगामा किया। बाद में पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत किया। इस हादसे का पता लगने के बाद सीएम योगी की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी घटनास्थल की ओर दौड़े और राहत कार्य में सहयोग दिया।
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पटाखा फैक्टरी के पास ग्रीस बनाने की यूनिट है और यहां एक विवाह मंडप भी है। गनीमत रही कि आग यहां तक नहीं पहुंच पाई। पटाखे स्टोर रखने के लाइसेंस के नाम पर यहां कुछ मजदूर अवैध रूप से पटाखे बना रहे थे। दीपावली नजदीक होने के कारण यहां मोटे मुनाफे के चक्कर में तेजी से पटाखे बनाए जा रहे थे। शहर में अन्य कई जगहों पर भी इस तरह अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे हैं। यहां भी ऐसे हादसों की आशंका है। शहर और आसपास के क्षेत्रों के साथ ही सरूरपुर थाने के मैनापूठी, गोटका, जसड़ सुलताननगर में अवैध रूप से आतिशबाजी का सामान तैयार किया जाता है।
आग बुझाने में तीन दमकलकर्मी भी झुलसे
पटाखा फैक्टरी में आग इतनी अधिक थी कि इसे बुझाने में तीन दमकलकर्मी प्रवीण कुमार, जितेंद्र और दीपक भी झुलस गए। एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि इन कर्मियों को भी उपचार दिलवाया जा रहा है।
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शार्ट सर्किट से हादसे की संभावना, ज्यादातर भंडारण सुरक्षित
दमकल की टीम ने फिलहाल शार्ट सर्किट से हादसे की संभावना जताई है। हालांकि अभी घटना की जांच जारी है।
महिलाओं और बच्चों की जिंदगी खतरे में
पहले किए गए निरीक्षणों में भी यह सामने आ चुका है कि ज्यादातर महिलाओं और बच्चों से ही पटाखे बनवाने का काम कराया जाता है। इसलिए उनकी जिंदगी ज्यादा खतरे में रहती है। रोहटा की पटाखा फैक्टरी में दो बार एसडीएम स्तर पर छापा मारा गया और लाखों की कीमत के पटाखे बरामद किए गए।
बिना सुरक्षा उपकरणों के चल रही थी फैक्ट्री
पटाखा फैक्टरी में सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया गया था। बिना अग्नि सुरक्षा उपकरणों के ही पटाखों की फैक्टरी चल रही थी। इस बिंदु पर पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम जांच कर रही है। सवाल अग्निशमन विभाग पर भी उठ रहे है। उन्होंने फैक्टरी में जाकर अग्निशमन यंत्रों की जाकर जांच नहीं की है।
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मेरठ। रोहटा में दोपहर 12 बजे तक सब ठीक था। इसके बाद यहां की पटाखा फैक्टरी में बार-बार तेज धमाके होते हैं और आग और धुएं का गुबार बढ़ता जाता है। फैक्टरी में पटाखों में विस्फोट और सिलिंडर फटने से रोहटा दहल उठा। दहशत में आए ग्रामीणों ने काफी देर तक हंगामा किया। बाद में पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत किया। इस हादसे का पता लगने के बाद सीएम योगी की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी घटनास्थल की ओर दौड़े और राहत कार्य में सहयोग दिया।
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पटाखा फैक्टरी के पास ग्रीस बनाने की यूनिट है और यहां एक विवाह मंडप भी है। गनीमत रही कि आग यहां तक नहीं पहुंच पाई। पटाखे स्टोर रखने के लाइसेंस के नाम पर यहां कुछ मजदूर अवैध रूप से पटाखे बना रहे थे। दीपावली नजदीक होने के कारण यहां मोटे मुनाफे के चक्कर में तेजी से पटाखे बनाए जा रहे थे। शहर में अन्य कई जगहों पर भी इस तरह अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे हैं। यहां भी ऐसे हादसों की आशंका है। शहर और आसपास के क्षेत्रों के साथ ही सरूरपुर थाने के मैनापूठी, गोटका, जसड़ सुलताननगर में अवैध रूप से आतिशबाजी का सामान तैयार किया जाता है।
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आग बुझाने में तीन दमकलकर्मी भी झुलसे
पटाखा फैक्टरी में आग इतनी अधिक थी कि इसे बुझाने में तीन दमकलकर्मी प्रवीण कुमार, जितेंद्र और दीपक भी झुलस गए। एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि इन कर्मियों को भी उपचार दिलवाया जा रहा है।
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शार्ट सर्किट से हादसे की संभावना, ज्यादातर भंडारण सुरक्षित
दमकल की टीम ने फिलहाल शार्ट सर्किट से हादसे की संभावना जताई है। हालांकि अभी घटना की जांच जारी है।
महिलाओं और बच्चों की जिंदगी खतरे में
पहले किए गए निरीक्षणों में भी यह सामने आ चुका है कि ज्यादातर महिलाओं और बच्चों से ही पटाखे बनवाने का काम कराया जाता है। इसलिए उनकी जिंदगी ज्यादा खतरे में रहती है। रोहटा की पटाखा फैक्टरी में दो बार एसडीएम स्तर पर छापा मारा गया और लाखों की कीमत के पटाखे बरामद किए गए।
बिना सुरक्षा उपकरणों के चल रही थी फैक्ट्री
पटाखा फैक्टरी में सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया गया था। बिना अग्नि सुरक्षा उपकरणों के ही पटाखों की फैक्टरी चल रही थी। इस बिंदु पर पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम जांच कर रही है। सवाल अग्निशमन विभाग पर भी उठ रहे है। उन्होंने फैक्टरी में जाकर अग्निशमन यंत्रों की जाकर जांच नहीं की है।