मेरठ: 50 से ज्यादा किसानों पर होगी एफआईआर, पराली नहीं, इस मामले में होगी कार्रवाई
मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन में किसानों ने सेक्टर-दो, पांच, छह, सात, आठ में आवास विकास की जमीन पर फसल बो रखी है। इस कारण मामला शासन तक पहुंच गया है। इसी क्रम में कमिश्नर ने आवास विकास को सख्त कदम उठाने के लिए कहा है।
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जाग्रति विहार एक्सटेंशन में प्रधानमंत्री आवास, प्लॉट, स्कूल आदि को बनाने की योजना है, पर कई वर्षों से अड़ंगा लगा हुआ है। किसान छह प्रतिशत विकसित भूखंड और बढ़ा प्रतिकर मांग रहे हैं। सरकार ने छह प्रतिशत विकसित भूखंड की मांग को नकार दिया गया है।
आवास विकास परिषद की तरफ से प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूरा किया जा चुका है। हापुड़ रोड से गढ़ रोड को जोड़ने वाली इनर रिंग रोड का हिस्सा भी अधूरा पड़ा है। इस सड़क के हिस्से के बन जाने के बाद जाम से राहत मिलेगी। लेकिन किसानों और आवास विकास के बीच बात नहीं बन पा रही है। जिससे सभी विकास कार्य बाधित हो गए हैं।
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पांच सेक्टरों में बो रखी है फसल
किसानों ने जाग्रति विहार के सेक्टर-दो, पांच, छह, सात, आठ में फसल बो रखी है। मेरठ पब्लिक स्कूल को भी जमीन नहीं मिल पाई है। इस कारण भी मामला शासन तक पहुंच गया है। इसी क्रम में कमिश्नर ने आवास विकास को सख्त कदम उठाने के लिए कहा है।
हमारे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। किसानों से कई बार वार्ता हो चुकी है। किसान अपनी दो मांगों पर अड़े हैं। अब किसानों पर एफआईआर की तैयारी पूरी कर ली गई है। - राजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता, आवास विकास परिषद
हम एफआईआर, जेल से डरने वाले लोग नहीं है। जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक धरना जारी रहेगा। - भारत भड़ाना, महामंत्री, अर्जित भूमि किसान संगठन
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शास्त्रीनगर, जाग्रति विहार के 2900 निर्माण अवैध
आवास विकास परिषद द्वारा शास्त्रीनगर, जाग्रति विहार में 2900 निर्मार्णों को अवैध घोषित किया गया है। इसमें 50 वर्ग मीटर के मकान से लेकर व्यावसायिक निर्माण तक शामिल हैं। सभी की सूची आवास विकास परिषद की ओर से एमडीए को भेजी गई है।
आवास विकास के पास सीलिंग के अधिकार नहीं है। एमडीए ने आवास विकास अधिकारियों से कुछ चिन्हित अवैध निर्माण की फाइल भेजने के निर्देश दिए हैं। जिससे नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। हाल ही में शास्त्रीनगर, जागृति विहार के कई स्थानों पर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है।
हालांकि, एक-दो स्थानों पर नए निर्मार्णों पर एमडीए ने आवास विकास अधिकारियों को साथ लेकर सीलिंग की कार्रवाई की है। लेकिन पुराने निर्मार्णों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सेंट्रल मार्केंट की तर्ज पर अन्य कई स्थानों पर ऐसे ही व्यावसायिक कॉम्पलेक्स तैयार होते जा रहे हैं। जाग्रति विहार के कई सेक्टरों में भी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भरमार है।
एमडीए तहसीलदार विपिन कुमार का कहना है कि हमें 2900 अवैध निर्मार्णों की सूची आवास विकास ने सौंपी थी। हालांकि, उसमें 50 वर्ग मीटर तक के निर्माण भी शामिल हैं। हमने कुछ महत्वपूर्ण निर्मार्णों की फाइल आवास विकास से मंगाई है।
आवास विकास के अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार का कहना है कि हमने आवास विकास को सूची भेज दी है। लेकिन नए निर्मार्णों पर सीलिंग करने का ज्यादा फोकस है। हमने एमडीए के साथ मिलकर सीलिंग की कार्रवाई भी की है।