घट रही उर्वरक क्षमता जमीन हो रही बंजर, सेहत पड़ रहा सीधा असर, कृषि वैज्ञानिक जता चुके हैं चिंता
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यहां पैदा होनी वाली फसल और सब्जियां लोगों की सेहत खराब कर रही हैं। डीएन कॉलेज में इस साल दो फरवरी को शुरू हुई लैब में अब तक 75 से अधिक स्थानों की मिट्टी की जांच हो चुकी है। लैब कोआर्डिनेटर डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि हिंडन और काली नदी के आसपास की जमीन में पीएच, कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और दूसरे तत्व मानक से अधिक मात्रा में पाए गए हैं।
गंदे पानी की सिंचाई से यहां पैदा हो रहीं सब्जियां और फसल शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं। वहीं मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी खराब हो रही है। हापुड़ रोड और परतापुर इलाके की जमीन की उर्वरक क्षमता भी खराब पानी की वजह से घट रही है। मवाना रोड और रुड़की रोड पर भी हालात भी ठीक हैं।
कृषि वैज्ञानिक जता चुके हैं चिंता
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक भूमि में लगातार कार्बनिक पदार्थ कम हो रहे हैं। एक ग्राम मिट्टी में 20 लाख से 20 करोड़ तक पाए जाने वाले लाभकारी जीवाणु अब मात्र 10 लाख तक रह गए हैं। हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ रही है। आंकड़े बताते हैं कि एक हेक्टेयर भूमि की ऊपरी परत में नाइट्रोजन की मात्रा कम होने से किसान को करीब तीन से पांच सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस तरह पूरे देश से किसानों की आय का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ मिट्टी को बार-बार उपजाऊ बनाने में खर्च हो जाता है, जबकि वही खर्च पौधे पर हो तो बिना लागत फायदा होगा।
किसानों को दी जाती है सलाह
डॉ. शुक्ला ने बताया कि मिट्टी की जांच के बाद वह किसानों को सलाह देते हैं कि अधिक उत्पादन के चक्कर में अधिक यूरिया का प्रयोग न करें। वर्मी कंपोस्ट और गोबर की खाद का अधिक प्रयोग करें। फसल चक्र अपनाएं। मिट्टी और पानी की नियमित जांच कराएं। नदी और नाले के पानी का प्रयोग न करें। ट्यूबवेल की बोरिंग 240 फीट कराकर सिंचाई करें।
-गहरी जड़ वाली फसल के बाद उथली जड़ वाली फसल जैसे कपास, मेथी, अरहर, गेहूं, चना, धान उगाएं
-अधिक पानी चाहने वाली फसल के बाद कम पानी चाहने वाली फसल उगाएं।
-अधिक पोषक तत्व चाहने वाली फसल के बाद कम पोषक तत्व चाहने वाली फसलें उगाएं।
-दो तीन वर्ष के फसल चक्र में खेत को एक बार खाली छोड़ा जाए।
-दूर पंक्तियों में बोई जाने वाली फसल के बाद घनी बोई जाने वाली फसल उगानी चाहिए
-फसल चक्र में साग सब्जी वाली फसल का समावेश हो
-एक ही प्रकार की बीमारियों से प्रभावित होने वाली फसलों को लगातार एक ही खेत में नहीं उगाएं
फसल चक्र अपनाएं
डॉ. शुक्ला ने बताया कि दूषित पानी से सिंचाई के अलावा फसल चक्र नहीं अपनाने से भी नुकसान हो रहा है। यहां के किसान लगातार गन्ने की फसल उगा रहे हैं। गन्ने में कीटनाशक और यूरिया का ज्यादा प्रयोग भी जमीन की सेहत खराब कर रहा है। अगर किसान जागरूक नहीं हुए तो आने वाले सालों में जमीन बंजर होने लगेगी।
लैब को कराएंगे अपग्रेड
डीएन कॉलेज केप्राचार्य डॉ. बीएस यादव ने बताया कि लैब को अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है। फिलहाल लैब में बतौर कोआर्डिटनर डॉ. एके शुक्ला, बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. एवरेस्ट, डॉ. शैफाली, डॉ. अंशू काम कर रहे हैं।
लोग नहीं हैं जागरूक
लैब में गेस्ट लेक्चरर शशिकांत बताते हैं शुरुआत में हमने निशुल्क मिट्टी-पानी की जांच की। लोग मिट्टी व पानी के सैंपल दे गए, लेकिन रिपोर्ट लेने नहीं आए। इसलिए अब पानी की जांच के लिए 20 रुपये और मिट्टी की जांच के लिए 100 रुपये लिए जाते हैं।
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