EXCLUSIVE: यहां बच्चों के विकास में बाधक बन सकती है फसलें, पड़ रहा शरीर पर असर
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मेरठ के मवाना तहसील क्षेत्र में पैदा हो रहीं फसलें बच्चों के विकास में बाधक बन सकती हैं। वजह यहां उपजाऊ कही जाने वाली जमीनों में माइक्रोन्यूट्रिएंट जिंक और सल्फर की भारी कमी पाई गई है। जिंक एक ऐसा माइक्रोन्यूट्रिएंट है, जो फसल की गुणवत्ता के साथ हमारे शारीरिक विकास के लिए भी जरूरी है। अनाज, सब्जियों और दालों में जिंक की कमी से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता का सामान्य विकास नहीं हो पाता है। शारीरिक वृद्धि और कद की बढ़ोत्तरी में रुकावट आती है। वहीं सल्फर की कमी से तिलहनी फसलों की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के वैज्ञानिक डॉ. राकेश ने बताया कि अक्सर किसान नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम तत्वों वाले रासायनिक खाद का भरपूर प्रयोग करते है। लेकिन माइक्रोन्यूट्रिएंट पर किसानों का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मवाना तहसील से मिट्टी के नमूने लिए गए। जांच में मिट्टी के अंदर माइक्रोन्यूट्रिएंट जिंक और सल्फर की भारी कमी पाई गई।
पहले मानते थे जहर, अब जरूरी तत्व
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राकेश ने बताया कि जिंक हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। ज्यादातर डाक्टर एंटीबायोटिक के साथ अब जिंक टेबलेट देते हैं। पौधे और पशु में 300 प्रकार के एंजाइम होते है। उनके सक्रिय रहने के लिए जिंक की जरूरत होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि 1960 से पहले तक अमेरिकी वैज्ञानिक इसे जहरीला तत्व मानते थे। लेकिन भारतीय वैज्ञानिक डॉ. एएस प्रसाद ने ईरान के कुपोषित बच्चों का ब्लड लेकर इसकी अनुपस्थिति पर शोध किया। इन बच्चों को जिंक डोज देने पर वे स्वस्थ हो गए। इसके बार सारी दुनिया को पता चला कि जिंक जहर नहीं बल्कि जरुरी पोषक तत्व है।
जिंक और सल्फर की कमी के कारण
- असंतुलित मात्रा में अकार्बनिक खाद का प्रयोग।
- जमीन से लगातार और अधिक उत्पादन लेना।
- कार्बनिक खाद का खेतों में कम प्रयोग।
- फसल कटाई के बाद खेत में अवशेषों को जलाना।
ये होगा शरीर पर असर
- अनाज, दलहन, तिलहन फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी।
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सूक्ष्म पोषक तत्वों की शरीर में कमी।
- शरीर की वृद्धिदर में गिरावट, औसत शारीरिक कद में लगातार कमी।
देश भर में हो रहा अध्ययन
डॉ. राकेश ने बताया कि फसलों की गुणवत्ता और पोषण को प्रभावित करने वाले छह माइक्रोन्यूट्रिएंट की मिट्टी में उपलब्धता का अध्ययन चल रहा है। इसको लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइल साइंस सभी जगह से मिट्टी के नमूने ले रही है। जहां के नमूने फेल हो रहे हैं, वहां के लोगों को जिंक, सल्फर को लेकर जागरुक किया जा रहा है।
जिंक कई प्रकार के एंजाइम का घटक है। यह फॉस्फोरेस के अवशोषण को भी नियंत्रित करता है। कोशिकाओं में अकार्बनिक फॉस्फोरस की सांध्रता बढ़ने से पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। जिंक मानव शरीर में इम्युनिटी को बढ़ाने में सहायक है। यह शरीर की कोशिकाओं में मौजूद होता है। यह कोशिका विभाजन, उनकी वृद्धि, घाव भरने में और कार्बोहाइड्रेट के उपापचन में सहायक है। जिंक गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए जरूरी है। -डॉ. आरएसएस सेंगर, बायोटेक विभागाध्यक्ष, कृषि विवि
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