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मीरापुर उपचुनाव: मुनकाद के बेटे की शादी में बसपा नेताओं के न जाने पर राजनीति गर्म, फायदा उठाने की ताक में सपा

Thu, 14 Nov 2024 01:59 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम राजकुमार सैनी, मेरठ
राजकुमार सैनी, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 14 Nov 2024 01:59 AM IST
सार

बसपा नेताओं का कहना है कि वे मुनकाद अली के बेटे की शादी में नहीं गए, क्योंकि अगर वहां सपा या अन्य दलों के नेताओं के साथ उनकी फोटो आ जाती, तो उसके कुछ और ही सियासी मायने निकाले जाते। 

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Meerapur by-election: Political turmoil over BSP leaders not attending Munkad's son's wedding, SP's game begin
मुनकाद अली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मुनकाद अली के बेटे की शादी में बसपाइयों को जाने से रोकना और तीन दलित नेताओं को सजा के रूप में पार्टी से बाहर निकालने का असर मीरापुर विधानसभा उपचुनाव पर पड़ सकता है। सपा नेता इस मुद्दे को चुनाव में भुनाने की तैयारी में हैं। ये चाल कामयाब हुई तो सपा प्रत्याशी सुम्बुल राना को मुस्लिम मतदाताओं में फायदा मिल सकता है।
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हालांकि इस मुद्दे का डैमेज कंट्रोल करने के लिए बसपा ने बाबू मुनकाद अली को मेरठ, बरेली, उत्तराखंड से हटाकर पूर्वांचल के गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या, देवीपाटन का मंडल प्रभारी बनाया है। मुनकाद अली बसपा में राष्ट्रीय महासचिव पद तक ही नहीं पहुंचे, बल्कि राज्यसभा में भी स्थान लिया। इनको बसपा सुप्रीमो मायावती का बेहद करीबी माना जाता रहा है। कई विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इनकी अच्छी भूमिका रही है। 
 
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उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इनमें मीरापुर से मुनकाद अली की बेटी सुम्बुल सपा के सिंबल पर उपचुनाव लड़ रही हैं। बसपा ने मुनकाद अली को मीरापुर से दूर रखा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बसपा हाईकमान के निर्देश पर सात नवंबर को बाबू मुनकाद अली के बेटे की शादी समारोह में बसपा नेताओं को जाने से रोका गया, जो मुस्लिम समाज में चर्चा का विषय बना है। 
 
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मीरापुर सीट पर एक लाख 30 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। इन मतों पर सपा प्रत्याशी सुम्बुल राना, बसपा प्रत्याशी शाहनजर और आसपा प्रत्याशी जाहिद हुसैन का मजबूत दावा है।
मुस्लिम मत पाने के लिए तीनों ही दलों के मुस्लिम प्रत्याशी जोर लगाए हुए हैं। भाजपा के बटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ रहोगे, नारे का असर मुस्लिम मतदाताओं पर भी दिख रहा है। वहीं, बसपा डैमेज कंट्रोल में लग गई है। मुनकाद अली को न सिर्फ पूर्वांचल के चार मंडलों का प्रभारी बनाया गया है, बल्कि पार्टी सूत्रों ने बताया कि सोमवार को मुनकाद ने दिल्ली पहुंचकर बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की है। काफी देर चली वार्ता चली है।
 

मुनकाद के अपमान से जोड़ रही सपा
मुनकाद अली के बेटे की शादी समारोह में बसपा नेताओं के न जाने को सपा के मुस्लिम नेता मुद्दा बना रहे हैं। इसे मुनकाद के अपमान से जोड़ रहे हैं, ताकि इसका फायदा मुनकाद की बेटी और कादिर राना की पुत्रवधू सुम्बुल राना को मिल सके।
 

ये बोले दिग्गज
सभी राजनीतिक दलों की अपनी अलग नीति होती है। सपा मीरापुर में मजबूत चुनाव लड़ रही है। चुनाव जीतने के लिए पार्टी हर पहलू पर काम कर रही है और करेगी।
- शाहिद मंजूर, किठौर विधायक एवं पूर्व मंत्री, सपा।

मुनकाद के यहां सात नवंबर को शादी का कार्यक्रम था। हम सभी लोग चुनाव में लगे हैं। वैसे भी मीरापुर से उनकी बेटी सपा से चुनाव लड़ रही हैं। वह भी वहां पहुंचतीं। कहीं सपा वालों के साथ बसपा वालों के फोटो न हो जाएं, इसलिए बसपा के कुछ लोग कार्यक्रम में नहीं गए थे। मीरापुर चुनाव में इसका असर नहीं पड़ेगा।
- सतपाल पेपला, मंडल को-ऑर्डिनेटर।

 
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