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मेडिकल कॉलेज को जल्द मिलेगा प्लेटलेट्स सेपरेटर
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में रक्त से प्लेटलेट्स निकालने की मशीन जल्द आएगी। इसके लिए शासन से हरी झंडी मिल गई है। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स निकालने की मशीन अक्सर खराब हो जाती है। जिससे कई बार प्लेटलेट्स का अभाव हो जाता है।
मेडिकल कॉलेज स्थित ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मोनिका राठी ने बताया कि वायरिंग में गड़बड़ी की वजह से पुरानी मशीन खराब हो जाती है। नई मशीन के लिए अनुमति मिल गई है। टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही करीब 35 लाख रुपये की मशीन आएगी। उन्होंने बताया कि इस मशीन की मदद से रक्त से प्लेटलेट्स अलग किया जाता है। प्लेटलेट्स हमारे शरीर में रक्त की ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो थक्का बनाकर खून को बहने से रोकती हैं। शरीर में किसी घाव या अन्य कारण से ब्लड वेसल्स से रक्तस्राव होने पर प्लेटलेट्स की मदद से उसे रोका जाता है। प्लेटलेट्स की संख्या नियमित शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। यदि किसी स्थिति में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी या वृद्धि होने लगती है तो कई तरह की बीमारियां होना शुरू हो जाती हैं। आमतौर प्लेटलेट्स की कमी समस्या का कारण बनती हैं। प्लेटलेट्स की जरूरत डेंगू समेत कई गंभीर बीमारियों में पड़ती है। इन्हें रक्त से अलग करने में 50 से 100 मिनट का समय लगता है।
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मेडिकल कॉलेज स्थित ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मोनिका राठी ने बताया कि वायरिंग में गड़बड़ी की वजह से पुरानी मशीन खराब हो जाती है। नई मशीन के लिए अनुमति मिल गई है। टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही करीब 35 लाख रुपये की मशीन आएगी। उन्होंने बताया कि इस मशीन की मदद से रक्त से प्लेटलेट्स अलग किया जाता है। प्लेटलेट्स हमारे शरीर में रक्त की ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो थक्का बनाकर खून को बहने से रोकती हैं। शरीर में किसी घाव या अन्य कारण से ब्लड वेसल्स से रक्तस्राव होने पर प्लेटलेट्स की मदद से उसे रोका जाता है। प्लेटलेट्स की संख्या नियमित शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। यदि किसी स्थिति में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी या वृद्धि होने लगती है तो कई तरह की बीमारियां होना शुरू हो जाती हैं। आमतौर प्लेटलेट्स की कमी समस्या का कारण बनती हैं। प्लेटलेट्स की जरूरत डेंगू समेत कई गंभीर बीमारियों में पड़ती है। इन्हें रक्त से अलग करने में 50 से 100 मिनट का समय लगता है।
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