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मेडिकल कॉलेज खुद बीमार, इलाज की दरकार

Fri, 17 May 2019 03:53 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Fri, 17 May 2019 03:53 AM IST
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Medical college itself needs sick, treatment
मेरठ - फोटो : अमर उजाला
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है। कुछ खामियां हैं और कुछ कर्मचारी ही व्यवस्था को पलीता लगा रहे हैं। खुद मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों ने यह स्वीकार किया है। मेडिकल कॉलेज में 25 बिंदुओं पर तैयार की गई एक गोपनीय रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को बायोमेडिकल वेस्ट की पूरी जानकारी नहीं है। अस्पताल में जगह-जगह मलबे के ढेर लगे हैं। ई-हॉस्पिटल के तहत जो कंप्यूटर वार्डों में उपलब्ध कराए गए हैं, वह ज्यादातर नर्सों ने कमरे में बंद रखे हैं। सिस्टर इंचार्ज कॉलेज स्टोर से प्रिंटर लेने में आनाकानी कर रही हैं। इस वजह से वार्डों में ई-हॉस्पिटल व्यवस्था चालू नहीं हो पा रही है। गायनिक विभाग के दो कमरों में सामान रखा है। उनको खाली नहीं किया गया है। इस कारण अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित नहीं हो सकी है। अस्पताल में इंफेक्शन कंट्रोल की व्यवस्था ठीक नहीं है। दवाइयां, सर्जिकल आइटम और ग्लव्ज सिरेंज का वेस्टेज हो रहा है। हड्डी रोग विभाग के ओटी में प्लास्टर रूम नहीं है। इमरजेंसी ओटी में ऑर्थोपेडिक्स ऑपरेशन टेबल नहीं है। दवाइयां वितरण व्यवस्था सही नहीं है। औषधियों को स्टाक बुक में विधिवत नहीं चढ़ाया जा रहा है।
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वर्जन=====
मरीजों को बेहतर सुुविधा देने के मकसद से यह कवायद की जा रही है। इन सभी बिंदुओं में सुधार करने की हिदायत दी गई है। अस्पताल में बेहतर व्यवस्था और सुधार के मकसद से यह रिपोर्ट तैयार की गई है। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए जाएंगे ये कदम  
- चिकित्सालय में भर्ती सभी रोगियों की केस सीट संबंधित वार्ड की
नर्स के पास उपलब्ध होनी चाहिए। उनके द्वारा ही जमा कराई जानी चाहिए।  
- सभी वार्डों और कार्य स्थलों पर सीसीटीवी लगवाए जाएंगे। एक ही गेट से प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी।
- अस्पताल में जरूरी स्थानों पर इंटरकॉम लगवाए जाएंगे।
- चिकित्सालय में सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड की व्यवस्था की जाएगी।
- वार्डों में भर्ती मरीजों को दवाइयां उनके बेड पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए 10 ड्रेसिंग ट्रॉली और 25 औषधि ट्रॉली मंगाई जाएंगी।
- बायो मेडिकल वेस्ट के लिए छह कूड़ा वाहनों का इंतजाम किया जाएगा। मलबा उठाने के लिए कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
- अस्पताल के कर्मचारी यूनिफार्म और आईकार्ड के साथ रहेंगे।

नौ लाख से ज्यादा आए मरीज
पिछले साल मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 950424 मरीज आए। इनमें से 33289 मरीजों को भर्ती किया गया। मेडिकल कॉलेज में एमसीआई से स्वीकृत कुल बेडों की संख्या 750 है। जबकि 1040 बेड तक इन्हें बढ़ाए जाने की स्वीकृति है।

असाध्य रोगों के इलाज में भी लाचार
असाध्य रोगों के इलाज में भी मेडिकल लाचार है। पिछले साल दिल और लीवर के एक भी मरीज को यहां इलाज नहीं मिला। कैंसर और किडनी के भी सिर्फ 30 मरीजों को ही उपचार मिल सका। इनमें कैंसर के 24 मरीज थे और किडनी के छह मरीज।


चिकित्सकों के 73 पद खाली
मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसरों और चिकित्सकों के 73 पद खाली हैं। इनके अभाव में कॉलेज और अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाए जाने में परेशानी हो रही है। यहां 204 पद स्वीकृत हैं। सिर्फ 131 पद भरे हैं।
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