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मीट विक्रेताओं ने किया लाइसेंस के लिए आवेदन, आप भी जान लीजिए योगी सरकार के ये 11 नियम

Fri, 05 May 2017 08:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर Updated Fri, 05 May 2017 08:36 PM IST
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Meat vendors did application for license, it is important to know these rules of Yogi Sarkar
मीट विक्रेताओं ने किया लाइसेंस के लिए आवेदन

बिजनौर जिले में मीट विक्रेताओं का कारोबार करना सपना ही न रह जाए। जिले में एक भी बूचड़खाना नहीं है। इसके चलते मीट विक्रेताओं के लाइसेंस बनने भी मुश्किल है। ऐसे में मीट व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मीट विक्रेताओं को लाइसेंस बनवाने के लिए कई गाइडलाइन पूरी करनी होगी।      

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प्रदेश में योगी सरकार बनते ही सरकार ने अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों पर रोक लगा दी थी, इससे मीट कारोबारियों में हड़कंप मच गया था। बिजनौर जनपद में नगरपालिका बिजनौर के मात्र 38 मीट विक्रेताओं ने ही पोर्टल पर लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन किया है, लेकिन आवेदन करने वाले 38 व्यापारियों का भी लाइसेंस बनना मुश्किल है। मीट विक्रेताओं को लाइसेंस बनवाने के लिए नगरपालिका, नगर पंचायत व सीओ सर्किल कार्यालय से एनओसी लेनी होगी। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से भी एनओसी लेनी होगी। मीट विक्रेता अगर अन्य जनपद के बूचड़खानों से मीट लाते है तो उन्हें मीट का श्रोत भी दिखाना होगा कि वह कहां से मीट ला रहे हैं और मीट को वह सिर्फ फ्रीजर वाली गाड़ी में ही अपनी दुकान पर ला सकते हैं।      
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मानक पूरे होने पर ही बनेगा लाइसेंस      
अभिहित अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि नगरपालिका बिजनौर क्षेत्र से 38 मीट विक्रेताओं ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। उनका लाइसेंस तभी बनाया जाएगा जब वह मानक पूरा करेंगे। लाइसेंस बनने के बाद खाद्य विभाग के मानक का उल्लंघन होते ही तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। वहीं विभाग की ओर से मीट कारोबारियों को मानक बताने के लिए कैंप भी लगाए जा रहे हैं।      
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लाइसेंस बनवाने के मानक

Meat vendors did application for license, it is important to know these rules of Yogi Sarkar
लाइसेंस के लिए आवेदन

-मीट की दुकान धार्मिक स्थल से 100 मीटर की दूर पर हो व सब्जी की दुकान के आस-पास नहीं हो।      
-मीट विक्रेता पशुओं को दुकान के अंदर नहीं काट सकते।      
-मीट की दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों को सरकारी चिकित्सक से हेल्थ सर्टिफिकेट लेना होगा।      
-मीट की क्वालिटी को पशु चिकित्सक से प्रमाणित कराना होगा।      
-मीट दुकानदार बीमार या प्रेगनेंट जानवरों को नहीं काट सकते हैं।      
-मीट विक्रेता को छह माह में दुकान के अंदर सफेदी करानी होगी।      
-उनके चाकू व दूसरे धारदार हथियार स्टील के बने होने चाहिए।      
-मीट की दुकान में कूड़े के निपटारे के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।      
-मीट विक्रेता को बूचड़खाने से खरीदे मीट का हिसाब-किताब भी रखना होगा, साथ ही मीट को बूचड़खाने से फ्रीजर वाली गाड़ियों में ही लाना होगा।      
-मीट की दुकान में गीजर भी होना चाहिए।      
-दुकानों के बाहर पर्दे या गहरे रंग के शीशे लगे होने चाहिए, ताकि बाहर से किसी को दुकान के अंदर का नजर नहीं आए।

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