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एमडीए का खजाना भरे बिना बाजार गुलजार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 May 2018 12:37 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एमडीए की आय बढ़ाने और वसूली के दावों को उसी के कर्मचारी और अधिकारी हवा में उड़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला प्राधिकरण की योजना पल्लवपुरम फेस-1 के पॉकेट-जे का सामने आया है। जिसमें भूमि खाली कराने के बदले एमडीए ने 30 लोगों को दुकानें तो आवंटित कर दीं। लेकिन 24 आवंटियों से पूरा पैसा ही नहीं वसूला। इन आवंटियों ने भी दुकानों के ताले तोड़कर कब्जा कर उन्हें किराए पर दे दिया। तीन साल की इस सेटिंग से यहां पूरा बाजार ही गुलजार हो गया।
यह है मामला
मेरठ-देहरादून हाइवे पर पल्लवपुरम स्थित पल्हैड़ा चैराहे पर एमडीए ने 400 मीटर भूमि पर 30 दुकानें बनाई थीं। इन दुकानों के आवंटन पत्र 30 आवंटियों के पास वर्ष 2015 में ही पहुंच गए थे। एक दुकान के आवंटी के परिवार में मुखिया की मृत्यु होने पर इस परिवार ने आवंटन पत्र लौटा दिया था। शेष 29 दुकानों में से अभी तक मात्र पांच के आवंटियों ने ही पैसा जमा कर प्राधिकरण से कब्जा पत्र लेकर कब्जा किया है। बाकी आवंटियों ने ताले तोड़कर खुद ही दुकानों पर कब्जा कर लिया और दुकानें खोल लीं।
सब सेटिंग का है खेल
प्राधिकरण के मेट, अवर अभियंता से लेकर ऊपर तक के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे रहे जबकि इन सभी पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का बकाया एमडीए का निकल रहा है।
बदले में कम रखा था रेट
यहां के खसरा नंबर 328 की भूमि पर कुछ लोग दुकानें व आवास बनाकर रह रहे थे। जबकि यह नंबर सड़क के चौड़ीकरण में आ रही थी। ऐसे में एमडीए ने इस जमीन को खाली करा लिया। जमकर हंगामा हुआ तो तय हुआ कि एमडीए दुकानें बनाकर इन परिवारों को देगा। यही कारण रहा कि दुकानों का रेट भी कम रखा गया। आवंटन भी शून्य प्रतिशत पर किया था।
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यह भी रही शर्त
शर्त यह लगाई गई थी कि आवंटियों को पत्र प्राप्ति के एक माह के भीतर कुल धनराशि की 25 प्रतिशत रकम जमा करानी होगी। साथ ही तीन वर्ष की छह छमाही किश्तों में बकाया रकम भी जमा करानी थी। उसमें प्लॉट तथा दुकानें दोनों पर यही शर्त लागू की गयी थी। लेकिन अधिकांश आवंटियों ने तो 25 प्रतिशत की धनराशि तक भी जमा नहीं करायी। कुछ आवंटियों ने मामूली रकम जमा कर ही दुकानों पर कब्जा ले लिया। आवंटन 8 से 10 लाख रुपये में किया गया था। करीब तीन वर्ष पूर्ण होने पर अभी तक दुकानों का पैसा जमा ही नहीं किया गया।
शिकायत पर एक्शन नहीं
इस प्रकरण की शिकायत एमडीए के आला अधिकारियों से भी की जा चुकी है। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला है। अब इस प्रकरण की शिकायत आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार से करने की बात कही जा रही है।
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यह है मामला
मेरठ-देहरादून हाइवे पर पल्लवपुरम स्थित पल्हैड़ा चैराहे पर एमडीए ने 400 मीटर भूमि पर 30 दुकानें बनाई थीं। इन दुकानों के आवंटन पत्र 30 आवंटियों के पास वर्ष 2015 में ही पहुंच गए थे। एक दुकान के आवंटी के परिवार में मुखिया की मृत्यु होने पर इस परिवार ने आवंटन पत्र लौटा दिया था। शेष 29 दुकानों में से अभी तक मात्र पांच के आवंटियों ने ही पैसा जमा कर प्राधिकरण से कब्जा पत्र लेकर कब्जा किया है। बाकी आवंटियों ने ताले तोड़कर खुद ही दुकानों पर कब्जा कर लिया और दुकानें खोल लीं।
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सब सेटिंग का है खेल
प्राधिकरण के मेट, अवर अभियंता से लेकर ऊपर तक के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे रहे जबकि इन सभी पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का बकाया एमडीए का निकल रहा है।
बदले में कम रखा था रेट
यहां के खसरा नंबर 328 की भूमि पर कुछ लोग दुकानें व आवास बनाकर रह रहे थे। जबकि यह नंबर सड़क के चौड़ीकरण में आ रही थी। ऐसे में एमडीए ने इस जमीन को खाली करा लिया। जमकर हंगामा हुआ तो तय हुआ कि एमडीए दुकानें बनाकर इन परिवारों को देगा। यही कारण रहा कि दुकानों का रेट भी कम रखा गया। आवंटन भी शून्य प्रतिशत पर किया था।
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यह भी रही शर्त
शर्त यह लगाई गई थी कि आवंटियों को पत्र प्राप्ति के एक माह के भीतर कुल धनराशि की 25 प्रतिशत रकम जमा करानी होगी। साथ ही तीन वर्ष की छह छमाही किश्तों में बकाया रकम भी जमा करानी थी। उसमें प्लॉट तथा दुकानें दोनों पर यही शर्त लागू की गयी थी। लेकिन अधिकांश आवंटियों ने तो 25 प्रतिशत की धनराशि तक भी जमा नहीं करायी। कुछ आवंटियों ने मामूली रकम जमा कर ही दुकानों पर कब्जा ले लिया। आवंटन 8 से 10 लाख रुपये में किया गया था। करीब तीन वर्ष पूर्ण होने पर अभी तक दुकानों का पैसा जमा ही नहीं किया गया।
शिकायत पर एक्शन नहीं
इस प्रकरण की शिकायत एमडीए के आला अधिकारियों से भी की जा चुकी है। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला है। अब इस प्रकरण की शिकायत आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार से करने की बात कही जा रही है।