एमडीए की बड़ी कार्रवाई: पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की मीट फैक्ट्री पर लगाई गई सील, जमकर हंगामा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Priyesh Mishra Updated Tue, 12 Feb 2019 11:03 AM IST
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पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी की फैक्ट्री को सील करने के लिए एक तरफ एमडीए और प्रशासन पूरी तैयारी के साथ अपने तयशुदा समय पर फैक्ट्री के गेट पर पहुंच गई। यहां टीम के पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई और टीम को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोक दिया। किसी तरह पुलिस फोर्स के साथ एमडीए अधिकारी फैक्ट्री के अंदर घुसे और कार्रवाई शुरू कराई।
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हालांकि मीट फैक्ट्री को सील करने की कार्रवाई केवल आधा घंटे में ही निपट गई। यहां सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ, व कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मीट फैक्ट्री के भीतर प्लांट के एक हिस्से को सील किया। इस दौरान वीडियोग्राफी कराई गई है।


एमडीए अधिकारियों के अनुसार जमीन विवाद को लेकर जो भी समस्याएं हैं उन्हें लेकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। इसमें प्रशासन के अनुरूप आगे कार्रवाई की जाएगी। यह प्रशासन के मानकों के अनुरूप नहीं थी इसी वजह से शासन ने इसके कैंसिलेशन का आदेश दिया था। प्राधिकरण के तकरीबन तीस अधिकारियों के साथ प्लांट की सभी मशीनरी को सील कर दिया है। 

गौरतलब है कि इससे बचने के लिए याकूब कुरैशी ने फैक्टरी में मंगलवार को ही बसपा का सम्मेलन रख दिया है। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पुलिस प्रशासन को फैक्टरी पर कार्रवाई करना आसान नहीं रहा। अलफहीम मीटेक्स पर कार्रवाई के लिए एमडीए तथा प्रशासन ने 12 फरवरी की तारीख तय कर रखी थी। मुख्य रूप से ग्रीन वर्ज में बने फैक्टरी के भाग पर सील लगानी थी। उधर याकूब बसपा से लोकसभा क्षेत्र प्रभारी हैं। इसी को लेकर याकूब ने मंगलवार को फैक्ट्री पर कार्यकर्ता सम्मेलन बुला रखा है।  

पहले  भी हो चुका है ऐसा     
करीब चार वर्ष पूर्व प्रदूषण, पशु पालन, एमडीए व पुलिस प्रशासन की टीम जब इस फैक्ट्री में जांच करने गई थी। यहां सैकड़ों लोग विरोध में आ गए थे। किसी भी विभाग की टीम को अंदर ही नहीं घुसने दिया गया था। टीम जबरन अंदर घुसी तो भीड़ ने अधिकारियों को घेरकर बंधक बना लिया था। अंतत: टीम को बिना कार्रवाई के ही लौटना पड़ा था।

हो सकता है टकराव     
ताजा जानकारी के अनुसार जिस प्रकार से फैक्ट्री सील करने की कार्रवाई के लिए पुलिस और एमडीए की टीम यहां पहुंची है और फैक्ट्री सील करने में काफी मुश्किल हो रही है। इस तरह टीम को भारी पुलिस बल की जरूरत होगी। यदि सील की कार्रवाई के दौरान टकराव की स्थिति बन रही है। कार्रवाई में डीएम अनिल ढींगरा ने सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, चार सीओ, एक थाना प्रभारी, 18 उपनिरीक्षक, 46 कांटेबल, 18 महिला कांस्टेबल सहित दंगा नियंत्रण, उपकरण, फायर ब्र्रिगेड की दो गाड़ियां और पीएसी की दो प्लाटून की मंजूरी दे दी है।

हाईकोर्ट में नहीं हो सकी सुनवाई
प्रकरण को लेकर याकूब पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसके लिए सोमवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो पाई। माना जा रहा है मंगलवार को इस पर सुनवाई होगी। याकूब पक्ष को यह उम्मीद थी कि शायद सोमवार को स्टे मिल जाएगा पर ऐसा नहीं हो सका।

बीच का रास्ता निकालने की मशक्कत
मामले में सोमवार रात को ही बीच का रास्ता निकालने की कवायद शुरू हो गई थी। माना जा रहा था कि याकूब पक्ष रात को ही यह लिखकर दे देगा कि वह खुद ही संचालन बंद कर लेंगे। ऐसे में इतने ज्यादा लाव लश्कर की जरूरत नहीं। एमडीए की टीम धीरे से सील लगाने की कार्रवाई कर देगी। यानी काम भी हो जाएगा और हंगामा भी नहीं होगा।

एमडीए ने जितना मांगा उतना फोर्स दे दिया है। पीएसी तक दी गई है। यह तो तय है कि कार्रवाई होगी। किसी तरह का विरोध भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एमडीए टीम को सील करके ही लौटना चाहिए। -अनिल ढींगरा, डीएम
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