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एमसीआई टीम ने पूछा मेडिकल में क्यों घट रही है मरीजों की संख्या?
ब्यूरो/ अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 18 Mar 2016 01:14 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए पहुंची एमसीआई की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को जैसे ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की टीम पहुंची तो अफरातफरी से मच गई। पूरे संसाधन और फैकल्टी उपलब्ध कराने के बाद भी कॉलेज में मरीजों की घटती संख्या पर टीम ने चिंता व्यक्त की।
निरीक्षण के दौरान टीम सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. गौरव से सवाल पूछती रही, जवाब नहीं मिलने पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताई। दो दिन के निरीक्षण पर आई टीम के एक ही दिन में लौट जाने पर कॉलेज प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटों को 100 से बढ़ाकर 150 किया गया है। जब तक पहला बैंच पासआउट नहीं हो जाता है तब तक एमसीआई द्वारा नियमित अंतराल पर निरीक्षण किया जाता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बढ़ाई गई सीटों के सापेक्ष कॉलेज प्रशासन छात्रों को प्रैक्टिस के लिए संसाधन मुहैया करा पा रहा है या नहीं।
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टीम सुबह करीब साढ़े दस बजे प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता के पास पहुंची और 20 मिनट के बाद ही निरीक्षण शुरू कर दिया। टीम पहले इमरजेंसी पहुंची और मरीजों से जुड़ा सारा रिकार्ड खंगाला, पूछा गया कि मरीज कितने घंटे के बाद वार्ड में शिफ्ट किया जाता है और कितना स्टाफ एक टाइम पर इमरजेंसी में तैनात रहता है।
टीम ने इमरजेंसी की पहली मंजिल और ट्रामा सेंटर में इलाज की सुविधा न होने पर नाराजगी जताई। सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह ने बताया कि ट्रामा सेंटर की बिल्डिंग का पूरा पैसा केंद्र सरकार से नहीं आया है, बाकि की डिमांड भेजी गई है, लेकिन इमरजेंसी की पहली मंजिल का काम पूरा न होने का वे कोई जवाब नहीं दे पाये। इसके बाद टीम ने आईसीयू, आईएसयू वार्ड से लेकर सामान्य ओटी के साथ ही ईएनटी, आई से लेकर हड्डी विभाग तक की ओटी को देखा। उसके बाद वार्डों में भर्ती मरीजों से भी जानकारी ली।
वार्डों में मिली भारी गंदगी
टीम जब निरीक्षण के दौरान वार्डों में पहुंची तो वहां गंदगी मिली। कई जगह वार्ड के अंदर ही डस्टबिन रखे थे, जो ऊपर तक भरे थे, जिस पर टीम ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिरकार एक वार्ड में कितने वार सफाई होती है। अगर समय से सफाई होती है तो फिर इस तरह से गंदगी क्यों फैली है? जिस पर अस्पताल प्रशासन के अधिकारी संतोष जनकर जवाब नहीं दे पाए।
सर्जरी की लिस्ट ने उड़ाए होश
निरीक्षण के बीच असली दिक्कत सर्जरी की लिस्ट मांगे जाने पर गई। टीम ने कॉलेज प्रशासन से सर्जरी की लिस्ट मांगी तो उसमें पांच चिकित्सकों की यूनिट बनाकर तैयार की गई लिस्ट दे दी गई। एमसीआई टीम ने कहा कि यूनिट वाइज नहीं बल्कि प्रत्येक चिकित्सक के नाम वाइज सर्जरी की लिस्ट दी जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एक चिकित्सक महीने में कितने ऑपरेशन कर रहा है?
निरीक्षण का यूनिट से नहीं बल्कि प्रत्येक चिकित्सक से मतलब है, क्योंकि यहां सभी की चिकित्सा सेवा को देखना है। कॉलेज प्रशासन से शुक्रवार तक प्रत्येक चिकित्सक की लिस्ट बनाकर देने के लिए कहा गया है। टीम ने पूछा कि आखिरकार मेडिकल कॉलेज में मरीजों और सर्जरी की संख्या क्यों घट रही है? जबकि सीटें बढ़ी हैं और कॉलेज में फैकल्टी की स्थिति में भी सुधार आया है। यह चिंता का विषय है, जिसको लेकर कुछ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
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निरीक्षण के दौरान टीम सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. गौरव से सवाल पूछती रही, जवाब नहीं मिलने पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताई। दो दिन के निरीक्षण पर आई टीम के एक ही दिन में लौट जाने पर कॉलेज प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है।
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मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटों को 100 से बढ़ाकर 150 किया गया है। जब तक पहला बैंच पासआउट नहीं हो जाता है तब तक एमसीआई द्वारा नियमित अंतराल पर निरीक्षण किया जाता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बढ़ाई गई सीटों के सापेक्ष कॉलेज प्रशासन छात्रों को प्रैक्टिस के लिए संसाधन मुहैया करा पा रहा है या नहीं।
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टीम सुबह करीब साढ़े दस बजे प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता के पास पहुंची और 20 मिनट के बाद ही निरीक्षण शुरू कर दिया। टीम पहले इमरजेंसी पहुंची और मरीजों से जुड़ा सारा रिकार्ड खंगाला, पूछा गया कि मरीज कितने घंटे के बाद वार्ड में शिफ्ट किया जाता है और कितना स्टाफ एक टाइम पर इमरजेंसी में तैनात रहता है।
टीम ने इमरजेंसी की पहली मंजिल और ट्रामा सेंटर में इलाज की सुविधा न होने पर नाराजगी जताई। सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह ने बताया कि ट्रामा सेंटर की बिल्डिंग का पूरा पैसा केंद्र सरकार से नहीं आया है, बाकि की डिमांड भेजी गई है, लेकिन इमरजेंसी की पहली मंजिल का काम पूरा न होने का वे कोई जवाब नहीं दे पाये। इसके बाद टीम ने आईसीयू, आईएसयू वार्ड से लेकर सामान्य ओटी के साथ ही ईएनटी, आई से लेकर हड्डी विभाग तक की ओटी को देखा। उसके बाद वार्डों में भर्ती मरीजों से भी जानकारी ली।
वार्डों में मिली भारी गंदगी
टीम जब निरीक्षण के दौरान वार्डों में पहुंची तो वहां गंदगी मिली। कई जगह वार्ड के अंदर ही डस्टबिन रखे थे, जो ऊपर तक भरे थे, जिस पर टीम ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिरकार एक वार्ड में कितने वार सफाई होती है। अगर समय से सफाई होती है तो फिर इस तरह से गंदगी क्यों फैली है? जिस पर अस्पताल प्रशासन के अधिकारी संतोष जनकर जवाब नहीं दे पाए।
सर्जरी की लिस्ट ने उड़ाए होश
निरीक्षण के बीच असली दिक्कत सर्जरी की लिस्ट मांगे जाने पर गई। टीम ने कॉलेज प्रशासन से सर्जरी की लिस्ट मांगी तो उसमें पांच चिकित्सकों की यूनिट बनाकर तैयार की गई लिस्ट दे दी गई। एमसीआई टीम ने कहा कि यूनिट वाइज नहीं बल्कि प्रत्येक चिकित्सक के नाम वाइज सर्जरी की लिस्ट दी जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एक चिकित्सक महीने में कितने ऑपरेशन कर रहा है?
निरीक्षण का यूनिट से नहीं बल्कि प्रत्येक चिकित्सक से मतलब है, क्योंकि यहां सभी की चिकित्सा सेवा को देखना है। कॉलेज प्रशासन से शुक्रवार तक प्रत्येक चिकित्सक की लिस्ट बनाकर देने के लिए कहा गया है। टीम ने पूछा कि आखिरकार मेडिकल कॉलेज में मरीजों और सर्जरी की संख्या क्यों घट रही है? जबकि सीटें बढ़ी हैं और कॉलेज में फैकल्टी की स्थिति में भी सुधार आया है। यह चिंता का विषय है, जिसको लेकर कुछ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।