बसपा-सपा की राहें अलग होने पर बोल नेता, आलाकमान का निर्णय सिर माथे पर
वेस्ट यूपी की बात करें तो केवल यहीं पर भाजपा के विजयी रथ को गठबंधन ने झटका दिया। सहारनपुर की सीट भाजपा से छीन ली तो बिजनौर और नगीना में भी भाजपा को पटखनी दे दी। तीनों ही सीटें बसपा के खाते में गई। चुनाव बाद ही यह माना जा रहा था कि अब गठबंधन शायद ही आगे चले। यही हुआ और बसपा सुप्रीमो ने इससे अलग होने की बात कह दी।
प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन को लोगों ने प्यार दिया। बसपा का इससे बाहर होना उसका अपना फैसला है। इस बारे में प्रतिक्रिया देना जल्दबाजी होगी। -डॉ. राजकुमार सांगवान, प्रदेश संगठन प्रभारी रालोद
बड़ों की बातें वही जानें
यह बड़ों का निर्णय था। उन्होंने ही अब अलग होने का निर्णय लिया होगा। इसमें हम जैसे छोटे कार्यकर्ता क्या कह सकते हैं। बड़ों की बातें वही जानें। -शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री, सपा
अभी कुछ नहीं
इस मामले में जब तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कोई बयान न आ जाए, तब तक मैं कुछ नहीं कह सकता। अभी उनकी तरफ से कोई बयान इस बारे में नहीं आया है। -आदिल चौधरी, महानगर अध्यक्ष सपा
अधिकार केवल बहनजी को
बसपा अनुशासित पार्टी है। हमारे यहां निर्णय लेने का अधिकार केवल बहनजी को है। गठबंधन करने या अलग होने पर जो भी उन्होंने निर्णय लिया है वह बिल्कुल सही है। -सुभाष प्रधान, जिलाध्यक्ष बसपा
मंथन शुरू : जिलाध्यक्ष छोड़कर पूरी जिला कमेटी भंग
चुनावी नतीजों के बाद चल रही समीक्षा के परिणाम के रूप में बसपा में ऊपर से लेकर नीचे तक फेरबदल का शुरू हो गया है। मौजूदा जोन इंचार्ज (कोऑर्डिनेटर), जिला व विधानसभा प्रभारियों को तो हटाया ही गया है, साथ ही जिलाध्यक्ष को छोड़कर पूरी जिला कमेटी भी भंग कर दी गई है।
माना जा रहा है कि नए सिरे से कमेटियों का गठन किया जाएगा लोकसभा चुनावों का असर अब आने लगा है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने फेरबदल शुरू कर दिया है। पुराने दिग्गजों को फिर से यूपी में कमान दी जा रही है।
राज्यसभा सदस्य बाबू मुनकाद अली को पांच मंडलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है तो वेस्ट यूपी में भी नगीना से सांसद बने गिरीश चंद्र को नई कमान दी गई है। इसके अलाव स्थानीय स्तर पर भी फेरबदल किए जाने के लिए कमर कस ली गई है।
मेरठ में गठबंधन ने तगड़ा चुनाव लड़ा। हालांकि बसपा के हाजी याकूब कुरैशी यहां भाजपा उम्मीदवार राजेन्द्र अग्रवाल से लगभग 47 सौ वोटों के अंतर से हार गए। लेकिन गठबंधन ने यह दिखाया कि उसकी चुनावी तैयारी कम नहीं थी। ऐसे में यहां की भी समीक्षा की गई है।
बताया जा रहा है कि जिला स्तर पर तगड़ी फेरबदल की जा रही है। मेरठ के अलावा अन्य जिलों में जिलाध्यक्ष बरकरार रखे गए हैं। लेकिन पूरी जिला कमेटी को भंग कर दिया गया है। अब नए सिरे से यह गठन किया जाएगा। देखा जाएगा कि किसने इस चुनाव में कितना काम किया। इसी आधार पर जिम्मेदारियां तय की जाएगी।
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