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नया साल बनाना इस्लाम में जायज नहीं, उलेमा बोले- 'हमारे यहां इन चीजों की इजाजत नहीं'

Tue, 01 Jan 2019 07:38 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 01 Jan 2019 07:38 AM IST
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Maulana Mufti Tariq Kasami says Celebrating New Year is not justified in Islam
प्रतीकात्मक तस्वीर
एक जनवरी को नया साल मनाना और एक दूसरे को इसकी मुबारकबाद देने को देवबंदी उलमा ने इसे नाजायज करार दिया है। उलमा का कहना है कि इस्लाम में इन चीजों की इजाजत नहीं है, जबकि हिंदू धर्मगुरु ने भी एक जनवरी को अंग्रेजों की देन बताते हुए नया वर्ष चैत्र शुक्ल में मनाए जाने को कहा है।
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मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी ने कहा कि नया साल मनाना यह कोई इस्लामी हुक्म नहीं है और न मुसलमानों को इससे जुड़ना चाहिए। 
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सालों का बदलना सालों का आना महीनों का गुजरना यह सब हिसाब और किताब के लिहाज से होता है। इससे ज्यादा इसकी कोई हैसियत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लाम हर उस चीज से मना करता है जिसमें बेशर्मी हो। 
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इसलिए ऐसी चीजों का ताल्लुक मजहब-ए-इस्लाम से नहीं है। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि  हिंदू धर्म के आधार पर यह नया साल नहीं है। 

नया साल शास्त्रों के अनुसार और सनातन धर्म के अनुसार चैत्र माह में आता है पहले नवरात्र में हमारा नया साल शुरू होता है उसे ही मनाना चाहिए। उन्होंने सभी युवाओं से अपील करते हुए कहा कि एक जनवरी अंग्रेजों की देन है हमारा नया साल चैत्र माह में मनाया जाता है।
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