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तीन तलाक बिल: मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के साथ न्याय नहीं होगा : मौलाना महमूद मदनी

Thu, 01 Aug 2019 02:21 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 01 Aug 2019 02:21 AM IST
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Maulana Mahmood Madani said Muslim divorced women will not be justice
मौलाना महमूद मदनी - फोटो : अमर उजाला

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने मंगलवार को राज्यसभा में पारित हुए तीन तलाक बिल को मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय करने वाला करार दिया। राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस बिल से मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के साथ न्याय नहीं होगा। 

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मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को कहा कि इस कानून के तहत पीड़ित महिला का भविष्य अंधकारमय हो जाएगी और उसके लिए दोबारा निकाह और नई जिंदगी शुरू करने का रास्ता बिल्कुल खत्म हो जाएगा। इस तरह तो तलाक का असल मकसद ही समाप्त हो जाए साथ ही पुरुष को जेल जाने की सजा महिला और उसके बच्चों को भुगतनी पड़ेगी। 
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मौलाना मदनी ने कहा कि जिन लोगों के लिए यह कानून बनाया गया है उनके प्रतिनिधियों, धार्मिक चिंतकों, विभिन्न शरीयत के कानूनी विशेषज्ञों और मुस्लिम संगठनों से कोई सुझाव नहीं लिया गया। सरकार हठधर्मी रवैया अपनाते हुए इंसाफ और जनमत की राय को रौंदने पर आमादा नजर आती है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि इस कानून के पीछे मुसलमानों पर किसी न किसी तरह यूनिफार्म सिविल कोड थोपने का प्रयास किया जा रहा है और इसका उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के इंसाफ के बजाए मुसलमानों के धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित करना है।

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मौलाना मदनी ने कहा कि भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत मुसलमानों के धार्मिक और पारिवारिक मामलों में अदालतों व संसद को हस्तक्षेप करने का अधिकार हरगिज नहीं है। मुसलमान हर सूरत में शरीयती कानून का पालन करना अपना कर्तव्य समझता है और पालन करता रहेगा। 

उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि तलाक-ए-बिद्दत से पूरी तरह बचें और शरीयत के हुक्म के मुताबिक निकाह, तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों को तय करें। इसके साथ ही घरेलू विवादों के मामलों में दीनी पंचायत के द्वारा फैसले का रास्ता अपनाएं और सरकारी अदालतों व मुकदमेबाजी से परहेज करें।

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