यूपी: खौफजदा महिलाओं ने छोड़ा गांव, मासूमों की सुरक्षा में पीएसी तैनात, ये है मामला
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सहारनपुर जनपद में मासूम बच्चों पर मंडरा रहे खतरे से डरी सहमी दयालपुर की महिलाओं ने गांव छोड़ दिया। गांव की 20-25 महिलाएं अपने बच्चों को लेकर अपने मायके चली गई हैं। ग्रामीणों का कहना, कि वह प्रशासन के भरोसे अपने बच्चों की जिंदगी दांव पर नहीं लगा सकते। पिछले 18 दिन से दयालपुर गांव में दहशत का माहौल है।
बताया गया कि 26 जून की रात में रजनीश के तीन महीने के बेटे अभिमन्यु और इसके बाद ओमकरण के 28 दिन के मासूम बच्चे की मौत के बाद से पूरा गांव दहशत में आ गया था।
शुरू में गांव के लोग इन मासूम बच्चों की मौत के जिम्मेदार आवारा कुत्तों को मानकर चल रहे थे। प्रशासन ने पुलिस, पीएसी और वन विभाग की टीम की मदद से गांव के आसपास जंगल में मौजूद सभी आवारा कुत्तों को कई दिन अभियान चलाकर पकड़वा लिया था, लेकिन इसके बाद भी दुधमुंहे बच्चों पर कुत्ते की तरह दिखने वाले जानवर द्वारा हमला किए जाने की घटना से ग्रामीण सकते में आ गए।
तीन दिन पहले ही 10 जून की रात में मोनू के 8 महीने के बच्चे को इस जानवर ने उठाने का प्रयास किया था। इससे पहले भी कई बच्चों पर यह जानवर हमला करने का प्रयास कर चुका है।
वहीं गांव में पीएसी की तैनाती और वन विभाग की टीम द्वारा लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जाने के बाद भी इस जानवर को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई, कि आखिर यह कौन सा जानवर है?
दो दिन पहले वन विभाग की टीम द्वारा गांव के पास जंगल में गन्ने के खेत के पास लगाए गए मोशन सेंसर कैमरे में आई कुत्ते की तरह दिखने वाले जानवर की तस्वीर भी साफ न होने के कारण विशेषज्ञों की टीम भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
पीएसी की तैनाती के बाद भी जानवर द्वारा हमले की घटनाओं से डरी सहमी गांव की महिलाओं ने अपने बच्चों को लेकर गांव छोड़ दिया। अब तक गांव से करीब 20-25 महिलाएं अपने बच्चों को लेकर मायके चली गई हैं। महिलाओं का कहना है, कि वह अपने बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाल सकतीं।
उधर, ग्रामीणों का भी यहीं कहना है कि जब पीएसी उनकी सुरक्षा नहीं कर पा रही और वन विभाग भी हमलावर जानवर का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम हो गया है, तो ऐसे में वह अपने बच्चों की जिंदगी दांव पर नहीं लगा सकते।
ग्राम प्रधान दीपक सैनी कहते हैं कि 28 जून को दूसरी घटना के बाद से गांव में पीएसी तैनात है। वन विभाग की टीम भी गांव में डेरा डाले हुए है। इसके बावजूद भी हमलावर जानवर लगातार घरों में घुसकर बच्चों को उठाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में महिलाओं के सामने सिर्फ अपने बच्चों को लेकर गांव छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।
10 जुलाई की तड़के दो बजकर 54 मिनट पर जंगल में लगाए मोशन सेंसर कैमरे में कुत्ते की तरह दिखने वाले जानवर की तस्वीर कैद हुई थी, जो साफ नहीं थी, जिसे जांच के लिए वन्य जीव विभाग की डब्ल्यूडब्ल्यूएफ यूनिट देहरादून भेजा गया था, लेकिन वहां भी जांच के दौरान जानवर के बारे में स्पष्ट नहीं हो पाया। सोमवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम जांच के लिए दयालपुर पहुंचेगी। अब तक गांव के आसपास जंगल में कुत्तों और गीदड़ों के पद चिह्न मिले हैं।
- आरएन टिमौटी, रेंजर शाकंभरी देवी वन रेंज क्षेत्र
इन महिलाओं ने छोड़ा गांव मोनिका पत्नी अमित ने अपने एक साल के बच्चे, सपना पत्नी सौरभ ने अपने 6 माह के बच्चे, आशु पत्नी सिपिन कुमार ने 2 माह के बच्चे, कोमल पत्नी सीपी सिंह ने अपने डेढ़ साल के बच्चे, मनीषा पत्नी मयंक अपने 2 वर्ष के बच्चे, पूजा पत्नी सतीश अपने 2 वर्ष के बच्चे, लक्ष्मी पत्नी राजू अपने 1 माह के बच्चे, नीलम पत्नी पदम अपने डेढ़ वर्ष के बच्चे, पूनम पत्नी विजय अपने 1 माह के बच्चे, सुमन सैनी पत्नी मोनू अपने 6 माह के बच्चे, सुमन पत्नी सोनू अपने 3 माह के बच्चे, शब्बो पत्नी अनुज अपने 2 माह के बच्चे, सोनिया पत्नी हरिराम अपने 2 माह के बच्चे, ममता पत्नी राजेश अपने 1 वर्ष के बच्चे, मीनाक्षी पत्नी सोनी अपने 8 माह के बच्चे, सोनिया पत्नी बृजपाल अपने 3 माह के बच्चे, रूपा पत्नी अरुण अपने 1 वर्ष के बच्चे, मौसम पत्नी अजय अपने 6 माह के बच्चे, सीता पत्नी राजू अपने 1 वर्ष के बच्चे, मनीषा पत्नी परवीन अपने 1 वर्ष के बच्चे, शशि पत्नी विपिन अपने डेढ़ वर्ष के बच्चे, आरजू पत्नी शिवकुमार अपने 4 माह के बच्चे, मंजू पत्नी अरविंद अपने 7 महीने के बच्चे और अनुराधा पत्नी ग्राम प्रधान दीपक सैनी अपने 5 माह के बच्चे के साथ गांव छोड़कर मायके चली गई हैं।
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