फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Many shops will be closed due to the condition of leaving the set back.

Meerut News: सेट बैक छोड़ने की शर्त से खत्म हो जाएंगी तमाम दुकानें

Fri, 10 Apr 2026 03:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 03:02 AM IST
विज्ञापन
Many shops will be closed due to the condition of leaving the set back.
अमर उजाला....सील लगने के बावजूद सेंट्रल मार्केट की दुकानों को  आवास में तब्दील किया जा रहा है।
शास्त्रीनगर का प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट बाजार देखते ही देखते उजड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 जनवरी को दिए गए आदेश के बाद से ही व्यापारी लगातार स्वयं ही अनाधिकृत निर्माण को ध्वस्त करने में जुटे थे लेकिन अब सीलिंग की कार्रवाई के बाद बाजार की पूरी रौनक गायब हो गई है। बंद के चलते मुख्य रास्तों से लेकर गलियों तक में वीरानी छाई रही। व्यापारियों में इस बात को लेकर भारी चिंता है कि यदि निर्धारित सेट बैक छोड़ा गया तो उनकी दुकानों का अस्तित्व ही पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
विज्ञापन




इस मामले में अप्रैल माह के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट में चार बार सुनवाई हुई। सबसे पहले 2 अप्रैल को हुई सुनवाई में न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने अवैध निर्माण पर आदेशों का अनुपालन न होने पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए आवास एवं विकास परिषद के चेयरमैन तथा मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी. गुरुप्रसाद को तलब किया। यही नहीं मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद द्वारा पूर्व में बाजार में ध्वस्तीकरण न किए जाने के आदेश पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब कर विस्तृत स्पष्टीकरण (डिटेल्ड एक्सप्लेनेशन) के साथ माफीनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
विज्ञापन




स्कूल और बैंकों को भी नहीं मिली राहत

अगली सुनवाई 6 अप्रैल को हुई जिसमें आवास एवं विकास परिषद ने 44 उन आवासीय भवनों की सूची सौंपी जिनमें पूर्णतया व्यावसायिक गतिविधियां संचालित थीं। कोर्ट को व्यापारियों द्वारा स्वतः बंद की गई दुकानों और हटाए गए अतिक्रमण का ब्योरा भी दिया गया जिसके बाद कोर्ट ने इन सभी अवैध निर्माणों को सील करने का आदेश देते हुए बृहस्पतिवार की तिथि नियत की थी। बृहस्पतिवार की सुनवाई में खंडपीठ ने किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया। स्कूल और बैंक प्रबंधन द्वारा रियायत की अपील की गई जिसे अदालत ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उन्हें बच्चों सहित अन्य लोगों की जान की सुरक्षा की अधिक चिंता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




व्यापारियों का दर्द: जीवनभर की कमाई पर संकट

व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने 35-40 साल की कड़ी मेहनत से इस बाजार को खड़ा किया था जो अब एक झटके में खत्म हो रहा है। स्थिति यह है कि गलियों में कई व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर शटर हटा दिए हैं और वहां दीवार, गेट या खिड़कियां लगा दी हैं। बाजार के नक्शे के अनुसार सेट बैक छोड़ने की मजबूरी ने दुकानों के वजूद पर सवालिया निशान लगा दिया है।

आवासीय संपत्तियों हेतु
क्षेत्रफल - फ्रंट सेट बैक (अग्रभाग) - रियर सेट बैक (पश्चभाग) - साइड सेट बैक 1 - साइड सेट बैक 2

150 वर्ग मी. से कम - 1 मी. - 0 - 0 - 0

150 से 300 वर्ग मी. से कम - 3 मी. - 1.5 मी. - 0 - 0

300 से 500 वर्ग मी. से कम - 3 मी. - 3 मी. - 0 - 0

व्यावसायिक संपत्तियों हेतु
क्षेत्रफल - फ्रंट सेट बैक (अग्रभाग) - रियर सेट बैक (पश्चभाग) - साइड सेट बैक 1 - साइड सेट बैक 2

100 वर्ग मी. से कम - 1.5 मी. - 0 - 0 - 0

100 से 300 वर्ग मी. से कम - 3 मी. -1.5 मी. - 0 - 0

300 से 1000 वर्ग मी. से कम - 4.5 मी. - 3 मी. - 1.5 मी. - 1.5 मी.


विशेष नोट: नए ले-आउट में कोने वाले भूखंडों में पार्श्व (साइड) सेट-बैक, अग्रभाग के सेट-बैक के समान ही होगा। पूर्व अनुमोदित ले-आउट में, यदि सेट बैक निर्धारित नहीं है, तो 500 वर्ग मीटर तक के कोने के भूखंड में न्यूनतम पार्श्व सेट बैक 1.5 मीटर अनिवार्य होगा। इससे अधिक क्षेत्रफल होने पर तालिका के अनुसार पार्श्व सेट-बैक देना होगा।


क्या होता है सेट बैक
इमारत या घर और प्लॉट की सीमा के बीच छोड़ी गई खाली जगह है। यह सुरक्षा, वेंटिलेशन और धूप के लिए अनिवार्य की गई न्यूनतम दूरी है जो बिल्डिंग को बाउंड्री से पीछे (आगे, पीछे या किनारे) बनाकर छोड़ी जाती है। यह खुला स्थान न केवल भवन के चारों ओर पर्याप्त हवा और प्रकाश सुनिश्चित करता है बल्कि आपातकालीन स्थितियों में बचाव कार्यों के लिए भी सुगमता प्रदान करता है। विभिन्न नगर पालिकाओं और विकास प्राधिकरणों द्वारा भवन निर्माण नियमों के तहत सेट बैक के संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किए जाते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed