मायावती के दांव से बसपा में फूट रही बगावत की चिंगारी, कहीं ये दिग्गज नेता रोक न दे हाथी चाल
लोकसभा चुनाव में लगे झटके के बाद बसपा सुप्रीमो लगातार संगठन में फेरबदल का दांव चल रही हैं। जिससे कहीं न कहीं पार्टी में बगावत की सुगबुगाहट भी शुरू हो चुकी है। बगावत के उठते इन सुरों को देखते हुए हाईकमान ने कोऑर्डिनेटरों को सतर्क कर दिया है। जैसे ही किसी नेता या पदाधिकारी की पार्टी को लेकर निष्ठा संदिग्ध नजर आए, उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाया जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐसे कई नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। लेकिन अहम बात ये है कि अब इन नेताओं ने भी पार्टी से दो-दो हाथ करने का मन बना लिया है। जिसके तहत बसपा छोड़ो मुहिम शुरू हो चुकी है। जल्दी ही कई बड़े नेताओं के बसपा छोड़ने का दावा पार्टी से बाहर किए गए नेता कर रहे हैं। ऐसे में साल 2022 की तैयारी में कहीं ये बागी नेता हाथी की चाल प्रभावित न कर दें।
मायावती ने इन्हें दिखाया बाहर का रास्ता
बसपा अध्यक्ष मायावती ने अनुशासनहीनता और बगावत की शंका में सबसे पहले सहारनपुर के पूर्व विधायक रविंद्र मोल्हू और वहां के जिलाध्यक्ष को विधानसभा उपचुनाव के दौरान बाहर का रास्ता दिखाया था। हाल ही में नगर निगम मेरठ की महापौर सुनीता वर्मा, उनके पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा को पार्टी से निकाल दिया। सुनीता वर्मा यूपी में बसपा की इकलौती मेयर हैं। उनके पति योगेश वर्मा भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा के बड़े दलित नेता माने जाते हैं। दो अप्रैल 2018 के दलित आंदोलन में भी योगेश वर्मा की अहम भूमिका रही थी।
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कई और को किया किनारे
नवंबर माह में ही आगरा के पूर्व एमएलसी सुनील कुमार चित्तौड़, पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन, पूर्व एमएलसी वीरू सुमन, पूर्व विधायक कालीचरण, पूर्व जिलाध्यक्ष भारतेंदु अरुण और मलखान सिंह व्यास, दो पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह और संतोष आनंद के साथ ही मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष कमल गौतम को निष्कासित कर दिया। जबकि इनसे पहले मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा के पूर्व विधायक विजय यादव और गाजियाबाद के मुरादनगर के पूर्व विधायक वहाब चौधरी पार्टी से निकाले जा चुके हैं।
पश्चिमी यूपी में चलेगी बसपा छोड़ो मुहिम
मेरठ के हस्तिनापुर विधानसभा से विधायक रहे योगेश वर्मा और उनकी पत्नी महापौर सुनीता वर्मा बसपा से निष्कासित होने के बाद पार्टी नेतृत्व से दो-दो हाथ करने की तैयारी में लग गए हैं। उन्होंने दो दिन पूर्व एक जनसभा कर अपने इरादे भी साफ कर दिए। जिसमें दोनों ने कहा कि इस समय कोऑर्डिनेटरों की कार्यशैली से जो भी नेता नाराज हैं, उनसे संपर्क किया जा रहा है। शीघ्र ही बड़ी संख्या में बसपा से ये लोग अलग हो जाएंगे। इसके लिए बसपा छोड़ो मुहिम शुरू कर दी गई है। सर्वसमाज के लोग इस अभियान से जोड़े जाएंगे।
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विधानसभा चुनाव की तैयारी हो सकती है प्रभावित
बसपा से बाहर किए गए नेता जिस तरह अब बगावत कर आक्रामक रूप में आ गए हैं। उससे बसपा की साल 2022 के विधानसभा को लेकर चल रही तैयारी प्रभावित हो सकती है। क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यदि देखें तो बसपा के पास अब कोई ऐसा प्रभावी नेता नजर नहीं आ रहा है, जो अपने दम पर हजारों की भीड़ जुटा सके। लगातार हो रही कार्रवाई की जद में अनुसूचित जाति के नेता ही नहीं अन्य जाति और वर्ग के नेता भी आ रहे हैं। जिसके चलते ये नेता बगावत कर पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अनुशासनहीनता पर हुई है कार्रवाई
विधान परिषद में बीएसपी के सचेतक एमएलसी और तीन राज्यों में संगठन प्रभारी अतर सिंह राव का कहना है कि जिन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई हुई है, वह पार्टी विरोधी कामों में लिप्त थे। बसपा का कोई भी निष्ठावान कार्यकर्ता पार्टी नहीं छोड़ेगा।
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