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मौन में इंसान बाहर और भीतर से रहता है शांत
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ चल रहा है। आज छठे दिन सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री, विवेक शास्त्री ने क्रियाओं का शुभारंभ हुआ। प्रवचन के दौरान महाराज ने कहा कि मौन में इंसान बाहर और अंदर से शांत रहता है।
आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य गजेंद्र जैन, वासुज जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक का गजेंद्र जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य मोहित जैन, सलिल जैन, मेघा जैन, सानवी जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन हंस कुमार जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। विधान में आज 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। बुधवार को 251 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ चंदन भैया ने किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्यूजिक पार्टी की मधुर लहरी पर सुरभि जैन, रंजीता जैन ने भजन प्रस्तुत किया। निर्वाण भूषण जी महाराज ने कहा कि मौन में इंसान बाहर से भी शांत रहता है और भीतर भी शांति रहती है। इसलिए जैन दर्शन में मौन को साधना बताया गया। मौन रहकर ही नमो को जागृत किया जा सकता है। आदमी मौन को तो स्वीकार करता है लेकिन मुखरता को नहीं। हमारी धारणा सुनने की कम और सुनाने की ज्यादा रहती है। इसलिए सत्संग में मनुष्य का मन नहीं लगता, क्योंकि वहां सुनना ज्यादा पड़ता है। आज के विधान का विसर्जन मीना जैन, आरके जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन पूनम जैन, गजेंद्र जैन, विकास जैन, वासु जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन चंचल जैन, मनोज जैन, राजकुमार, पलक पारस जैन हस्तिनापुर ने किया। प्रश्नमंच के बाद विजेताओं को विपिन जैन दुर्गापुर पं. बंगाल एवं मनोज जैन पारस जैन की ओर से पुरस्कार दिए गए। मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि का सहयोग रहा। क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, अरुण कुमार जैन धन प्रकाश जैन, अनिल कुमार जैन का सहयोग रहा।
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आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य गजेंद्र जैन, वासुज जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक का गजेंद्र जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य मोहित जैन, सलिल जैन, मेघा जैन, सानवी जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन हंस कुमार जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। विधान में आज 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। बुधवार को 251 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ चंदन भैया ने किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्यूजिक पार्टी की मधुर लहरी पर सुरभि जैन, रंजीता जैन ने भजन प्रस्तुत किया। निर्वाण भूषण जी महाराज ने कहा कि मौन में इंसान बाहर से भी शांत रहता है और भीतर भी शांति रहती है। इसलिए जैन दर्शन में मौन को साधना बताया गया। मौन रहकर ही नमो को जागृत किया जा सकता है। आदमी मौन को तो स्वीकार करता है लेकिन मुखरता को नहीं। हमारी धारणा सुनने की कम और सुनाने की ज्यादा रहती है। इसलिए सत्संग में मनुष्य का मन नहीं लगता, क्योंकि वहां सुनना ज्यादा पड़ता है। आज के विधान का विसर्जन मीना जैन, आरके जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन पूनम जैन, गजेंद्र जैन, विकास जैन, वासु जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन चंचल जैन, मनोज जैन, राजकुमार, पलक पारस जैन हस्तिनापुर ने किया। प्रश्नमंच के बाद विजेताओं को विपिन जैन दुर्गापुर पं. बंगाल एवं मनोज जैन पारस जैन की ओर से पुरस्कार दिए गए। मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि का सहयोग रहा। क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, अरुण कुमार जैन धन प्रकाश जैन, अनिल कुमार जैन का सहयोग रहा।
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