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सीमाओं में बंटे शहर के मुख्य मार्ग, लगाए बोर्ड

Sun, 24 Jan 2021 02:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2021 02:08 AM IST
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Main routes of the city divided into boundaries, put up boards
मेरठ। अभी तक कोई घटना होने पर थानों का सीमा विवाद हल नहीं हो पाता था, लेकिन अब सरकारी विभाग भी इस श्रेणी में आ गए हैं। नगर निगम ने शहर की प्रमुख सड़कों पर सीमा शुरू और समाप्त के बोर्ड लगा दिए हैं। जिससे आने-जाने वाले लोगों को सीमा क्षेत्र के बारे में पता चल सके। शहर में बिजली बंबा बाईपास, रुड़की रोड व कंकरखेड़ा क्षेत्र में ऐसे ही बोर्ड लगाकर सीमा क्षेत्र को बांट दिया गया है।
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शहर के सबसे व्यस्ततम बाईपास बिजली बंबा बाईपास को दो भागों में बांट दिया गया है। हापुड़ रोड से शुरू होने वाले बिजली बंबा बाईपास को बजौट गांव के पहले रास्ते पर नगर निगम ने अपनी सीमा को समाप्त बता दिया है। वहीं, इससे आगे का क्षेत्र ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया गया है। इसके बाद बाईपास के बाएं हाथ पर स्थित आम के बाग से फिर नगर निगम ने सीमा शुरू का बोर्ड लगा दिया है। इससे साफ है कि लगभग सात किमी के इस बाईपास में से तीन किलोमीटर का हिस्सा नगर निगम से हट गया है। इसके अलावा रुड़की रोड पर भी जीरो माइल से आगे सेना क्षेत्र में कैंट बोर्ड और उससे आगे पल्लवपुरम तक नगर निगम की सीमा आएगी। यही हाल कंकरखेड़ा का भी है। यहां भी कैंट बोर्ड और नगर निगम की सीमा आपस में मिलती है। इसी को देखते हुए ये कार्य किया गया है।
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इसलिए करना पड़ा सीमा क्षेत्र चिन्हांकन
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अचानक दौरे की सूचना से नगर निगम हरकत में आ गया था। सड़क मार्ग से परतापुर हवाई पट्टी से मेडिकल के दौरे की सूचना पर बिजली बंबा बाईपास पर सफाई करानी पड़ी। जिसके बाद नगर निगम को सीमा क्षेत्र के चिन्हांकन की याद आई। नगर निगम ने इस बाईपास को मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सफाई कर चमका दिया था। इसी को देखते हुए नगर निगम ने अपने सीमा समाप्ति और शुरू होने के बोर्ड लगा दिए हैं, जिससे अचानक मुख्यमंत्री के आने से नगर निगम पर गाज न गिरे। यही हाल अन्य सड़कों का किया जा रहा है। रुड़की रोड पर भी ऐसे ही बोर्ड लगाए गए हैं। यहां कैंट बोर्ड का क्षेत्र बताते हुए अपने क्षेत्र से पल्ला झाड़ लिया है, जिससे इस सड़क के बारे में भी शहरवासियों को पता चल सके।
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विकास कार्यों में आसानी होगी
सीमा क्षेत्र चिन्हांकन करने के बाद विकास कार्यों को करने में आसानी होगी। वहीं, जो शिकायतें हमारे पास आती थी वो भी कम आएंगी। इससे आम लोगों को भी पता लग जाएगा क्षेत्र किसके अधिकार क्षेत्र में हैं। -राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
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