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आठ की उम्र में खोयी, 11 की उम्र में मिली महशर
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Fri, 01 Apr 2016 01:33 AM IST
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मेरठ में महशर परिजनों और पुलिस के साथ।
- फोटो : अमर उजाला
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तीन साल से लापता बेटी महशर के साथ ही जाहिद के घर में खुशियां भी लौट आईं। बच्ची न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है, लेकिन जिसके नसीब में मां का आंचल और पिता का साया लिखा हो तो उसे कुदरत की कौन सी ताकत उनसे अलग कर सकती है। एक तरह से बच्ची के मिलने की उम्मीद छूटने के साथ ही आंसू भी सूख चुके थे, लेकिन बृहस्पतिवार को उनकी बेटी सामने आई तो खुशी के आंसू छलक उठे।
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भावनपुर थानाक्षेत्र के पचपेड़ा गांव निवासी जाहिद की बेटी महशर करीब तीन साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। उस वक्त महशर आठ साल की थी। बच्ची की तलाश में परिजन से जो बना, वो किया। थाने से लेकर पुलिस अफसरों से मिलकर बेटी को ढूंढने की फरियाद की, लेकिन तीन साल का लंबा समय बीतने के चलते उसके मिलने की उम्मीद खत्म सी हो चुकी थी, लेकिन प्रयास जारी थे।
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शुक्रताल आश्रम में पहुंची बच्ची
उधर, परिजनों से बिछड़ने के बाद महशर एक अजनबी व्यक्ति को मिली। परेशानी यह थी कि महशर न तो बोल सकती है और न ही सुन सकती है। ऐसे में उसके माता-पिता का पता न लगने पर उस व्यक्ति ने उसे शुक्रताल (मुजफ्फरनगर) स्थित एक आश्रम में पहुंचा दिया। आश्रम की तरफ से भी उसके परिजनों को खोजने की कोशिश बेकार साबित हुई।
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‘अमर उजाला’ में छपा विज्ञापन
बच्ची महशर को ढूंढने की जिम्मेदारी थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) पुलिस के पास थी। पुलिस विभाग की तरफ से बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ में महशर की गुमशुदगी का विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था। आश्रम के संचालकों ने जब यह विज्ञापन देखा तो महशर को पहचान लिया। दर्ज नंबर के आधार पर आश्रम प्रबंधन ने थाना एएचटीयू प्रभारी से फोन पर संपर्क कर महशर के बारे में जानकारी दी। जिस पर पुलिस टीम आश्रम से बच्ची को मेरठ ले आई।
खुशी के मारे रो पड़ी मां
पुलिस ने जाहिद को जब फोन करते हुए थाने बुलाया तो जाहिद अपनी पत्नी के साथ तुरंत पहुंच गए। तीन साल बाद बेटी महशर को देखते ही मां ने उसे दौड़कर गले लगा लिया। आंखें खुशी के आंसुओं से भीग गईं। पुलिस ने जब महशर से इशारे में जहिद और उनकी पत्नी के साथ जाने की बात कही तो महशर ने भी इशारों में ही सहमति दे दी। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने महशर को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया। जिसके बाद बच्ची परिजनों को सौंप दी गई।
शुक्रिया! मेरी लाड़ली ढूंढ ली
पुलिस ने जाहिद से जब पूछा कि तुमने महशर को कहां-कहां ढूंढा तो जाहिद ने बोला कि यह पूछो कि उसको हमने कहां-कहां नहीं ढूंढा। उनकी बच्ची बोल नहीं सकती, इसलिए रोजाना डर सताता था कि ना जाने बेटी किस हालत में होगी। अब तो बच्ची की उम्मीद खत्म सी होने लगी थी। आपका शुक्रिया कि आपने मेरी लाड़ली ढूंढ ली।