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महामंडलेश्वर यतींद्रानंद महाराज ने कहा- न्यायालय ने स्कंदपुराण के आधार पर सुनाया राम मंदिर का फैसला

Sun, 24 Nov 2019 12:13 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Sun, 24 Nov 2019 12:13 AM IST
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Mahamandaleshwar Yatindranand Maharaj said the court has order the Ram temple on basis of Skandpuran
महामंडलेश्वर यतींद्रानंद महाराज - फोटो : अमर उजाला

संस्कृत की गौरवमयी विजयी गाथा एवं उत्थान के लिए आयोजित प्रांतीय संस्कृत सम्मेलन में धर्म गुरु महामंडलेश्वर यतीन्द्रानंद महाराज और महामंडेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने संस्कृत के इतिहास की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की आत्मा है, यह भाषा दुनिया की सभी भाषाओं की जननी है। महामंडलेश्वर यतींद्रानंद महाराज ने कहा कि अयोध्या मामले में न्यायालय ने स्कंदपुराण को आधार बनाकर ही फैसला सुनाया है, जिसको सभी ने स्वीकार किया। स्कंदपुराण को कोई नहीं नकार सकता है। 

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जनमंच सभागार में द दून वैली पब्लिक स्कूल के तत्वावधान और महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज की अध्यक्षता में प्रांतीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित और मां सरस्वती की वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि के रूप महामंडलेश्वर यतीन्द्रानंद महाराज व महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज, विशिष्टि अतिथि के रूप में संस्कृत भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रताप सिंह व उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रेमचंद शास्त्री शामिल हुए। इसके पश्चात बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
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महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने शिव तांडव स्त्रोत के कुछ श्लोक सुनाकर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। इसके साथ ही उन्होंने श्रीमद्भागवत कई श्लोकों को सुनाकर भगवान श्री कृष्ण के संदेश लोगों तक पहुंचाया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी प्रशासन एसबी सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विनोद कुमार, नगर मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा, दून वैली पब्लिक स्कूल के चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता, प्रधानाचार्य सीमा शर्मा, जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलवी फरीद, भाजपा महानगर अध्यक्ष राकेश जैन, पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय, कई संस्कृत विद्यालयों के अध्यापक, आचार्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस मौके पर हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कायम करने में योगदान देने पर आरिफ अंसारी और नौशाद अंसारी को सम्मानित किया गया।

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संस्कृत को बढ़ावा देना हम सबका कर्तव्य : मंडलायुक्त 

मंडलायुक्त संजय कुमार ने कहा कि संस्कृत विश्व की तमाम भाषाओं की जननी है। हम सबकी की जिम्मेदारी बनती है कि संस्कृत के बारे में नई पीढ़ी को अवगत कराएं और विद्यालयों में भी इस भाषा को अनिवार्य किया जाए। संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में नहीं बल्कि प्रथम भाषा के स्प में देखा जाए और समझा जाए। 

संस्कृत देवों की वाणी: डीएम 
जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि संस्कृत देवों की वाणी है। देश की गुलामी से पूर्व संस्कृत भाषा ही भारत में बोली जाती थी, लेकिन अंग्रेजों ने इससे बदल लिया, लेकिन संस्कृत भाषा को कभी खत्म नहीं किया जा सकता है। 

संस्कृत भाषा नहीं, बल्कि संस्कार: एसएसपी 
एसएसपी दिनेश कुमार ने कि संस्कृत भाषा नहीं बल्कि संस्कार है। भविष्य में अच्छा करने के लिए हमें अपने इतिहास को जानना होगा। संस्कृत को आज विज्ञान भी मान रहा है। विश्व स्तर पर हुए सर्वे में साबित हो चुका है कि संस्कृत के श्लोकों से लोगों की बीमारियां भी दूर हुई हैं।

संस्कृत भाषा के साथ ही विज्ञान: प्रताप 

संस्कृत भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रताप सिंह ने संस्कृत भाषा में विचार रखते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के साथ ही विज्ञान भी है। यह वर्तमान में साबित भी हो चुका है। 200 वर्ष पढ़ाई-लिखाई की भाषा संस्कृत ही थी, लेकिन देश की गुलामी के समय इसे बदला गया। आवश्यकता है बच्चों को बचपन से ही संस्कृत भाषा आदत डालें।  

पूरी दुनिया अपनाएगी संस्कृत: शास्त्री 
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि संस्कृत हमारी पहचान है। वो समय आ गया है, जब पूरी दुनिया संस्कृत भाषा को अपनाएगी। दूसरे देश संस्कृत के प्रभाव और इसको समझने में लगे हैं। इसलिए हमें संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना चाहिए और सरकारी कार्यालयों में इस भाषा का प्रयोग अनिवार्य होना चाहिए। 

त्रुटि बनी चर्चा का विषय, नहीं बंटे प्रशस्ति पत्र
जनमंच सभागार में आयोजित हुए प्रांतीय संस्कृत सम्मेलन मंच पर स्क्रीन पर प्रदर्शित बैनर हुई त्रुटि चर्चा का विषय बन गई क्योंकि, संस्कृत भाषा को लेकर कार्यक्रम हुआ, लेकिन लिखने में हुई गलती चर्चाओं में रही। बैनर पर एक जगह संगठन को संघठन लिखा गया था। इसको लेकर चर्चा रही। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र दिए जाने थे, लेकिन उनमें कई खामियां थीं, जिसे देखते हुए आयोजकों ने उन्हें बांटने से रोक लिया। द-दून वैली पब्लिक स्कूल के प्रबंधक राज किशोर गुप्ता का कहना है कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्णय दो दिन पहले हुआ। आनन-फानन में बैनर पर छोटी से गलती हो गई, लेकिन प्रशस्ति पत्र की गलतियों को देख लिया गया। इसलिए नहीं बांटा गया।

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