फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Maa Tujhe Pranam: Many poets participated in the program of Amar Ujala including the poet Dr. Hariom Panwar

मां तुझे प्रणाम: ...जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे, कवि सम्मेलन में क्रांतिवीरों की शहादत को किया याद

Mon, 17 Aug 2020 01:53 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 17 Aug 2020 01:53 PM IST
विज्ञापन
Maa Tujhe Pranam: Many poets participated in the program of Amar Ujala including the poet Dr. Hariom Panwar
अमर उजाला की ओर से आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में प्रस्तुति देते डॉ. हरिओम पंवार और प्रो. अशोक चक्रधर। - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला मां तुझे प्रणाम अभिनव अभियान के तहत ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला काव्य कैफे की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन जरा याद करो कुर्बानी में शब्द शिल्पियों ने क्रांतिवीरों की शहादत का मार्मिक चित्रांकन किया।

विज्ञापन


हास्य के हस्ताक्षर प्रो. अशोक चक्रधर एवं ओज कवि डॉ. हरिओम पंवार ने काव्य पाठ किया। साथ ही अमर उजाला काव्य कैफे की परंपरा का निर्वहन करते हुए तीन युवा कवि राहुल शर्मा, प्रवीण कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ एवं डॉ. राहुल अवस्थी ने कविता पढ़ी। कवियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविताएं सुनाकर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को यादगार बना दिया। देश को आजादी दिलाने में अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों से लेकर कारगिल में शहादत देने वाले वीरों को कविताओं से श्रद्धांजलि दी।
विज्ञापन


पहली रोटी खाने के बाद... 
गाइडलाइन का पालन करते हुए ऑनलाइन काव्य सम्मेलन को देशभर के लोगों ने फेसबुक व यूट्यूब पर सुना और साझा किया। अमर उजाला के सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कवि सम्मेलन का लाइव प्रसारण हुआ। जिसमें श्रोताओं ने ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से सराहना की। कवि सम्मेलन के सूत्रधार की जिम्मेदारी संभालते हुए प्रो. अशोक चक्रधर ने हिंदी काव्य साहित्य की महानतम विभूतियों को नमन किया। चंद संस्मरणों को साझा करते हुए उन्होंने सम्मेलन का आगाज किया। उन्होंने कहा कि पहली रोटी खाने के बाद पेट खाली कहां रह जाता है। गंगालाल यही तो मलाल है, इस समय तो बस एक रोटी का सवाल है। खाने की मेज पर जमीन पर बैठे हो या सेज पर सच तो ये है कि टीवी ने उस वक्त बहुत रुलाया जब भी तिरंगे में लिपटा कोई ताबूत आया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


...आजादी के लिए जवानी दे डाली
कवि डॉ. हरिओम पंवार ने कहा कि आज के दिन हम देश की आजादी के लिए जिन्होंने प्राण न्यौछावर किए उनको याद किए बिना जश्न नहीं मना सकते। कोरोना वारियर्स ने भी व्रत लेकर इसमें बड़ा योगदान दिया है। केशव के पांचन्यजय व कारगिल शहीद मेजर मनोज तलवार समेत सभी शहीदों की शहादत को नमन करते हुए उन्होंने कहा किजो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे, भारत माता की जय कहकर फांसी पर चढ़ जाते थे, जिन बेटों ने आजादी के लिए जवानी दे डाली, आजादी के हवन कुंड के लिए कहानी दे डाली, दूर गगन के तारे उनके नाम दिखाई देते हैं, उनके स्मारक भी चारों धाम दिखाई देते हैं। वे देवों की लोकसभा के अंग बने बैठे होंगे। वे सतरंगी इंद्रधनुष के रंग बने बैठे होंगे, उन बेटों की याद भुलाने की नादानी मत करना, इंद्रधनुष के रंग चुराने की नादानी मत करना। 

...एक खींची हुई काल की लकीरों को प्रणाम
युवा कवि डॉ. राहुल अवस्थी ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता सुनाकर सभी को जोश से भर दिया। उन्होंने सुनाया कि मां को है प्रणाम, है प्रणाम मां की माटी को, माटी पे लिखित तदबीरों को प्रणाम है, देश की स्वतंत्रता के शानदार पृष्ठों पर, एक खींची हुई काल की लकीरों को प्रणाम है। पीरों के समानवाद मन में विराजमान ऐसी तकदीरों वाली पीरों को प्रणाम है। क्रांति की भवानी पे निसार दी जवानी, ऐसे स्वाभिमानी बलिदानों वीरों को प्रणाम है। 

मैं तुझे हिंदुस्तान कहूं या कि अपनी पहचान कहूं...
कवि प्रवीण कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ ने माटी वंदन गीत सुनाते हुए कहा कि एक जोगी खड़ताल उठाकर अपने स्वर में गाए, अपनी माटी के वंदन में गीत अनोखा गाए, गाए बस गाता जाए, फिर-फिर मुड़कर यह गाए। मैं तुझे हिंदुस्तान कहूं या कि अपनी पहचान कहूं, मैं तुझे हिंदुस्तान कहूं या कि अपनी पहचान कहूं। समर्पण है परवाने का, भंवर की प्रीत निराली है, हार है जहां बहुत प्यारी, हार की जीत निराली है। दूसरे के दुख में रोना जहां की रीत निराली है। 

बात सुनाऊं मैं तुमको आजादी के मतवालों की
कवि राहुल शर्मा अक्षत ने कविता का आगाज राजनीति पर कटाक्ष से किया। अक्षत ने कहा कि संविधान की करें जो मर्यादा छिन्न भिन्न, उन्हें अपना ही संविधान कैसे सौंप दें, इंच-इंच बेच खाई देश की जिन्होंने, कहो उन्हें ये वसुंधरा महान कैसे सौंप दें। सत्ता हेतु चोर गठबंधन बना ही लेते, उन्हें इस देश की कमान कैसे सौंप दें। जिनकी रगों में खून है देशद्रोहियों का उन्हें ये समूचा हिंदुस्तान कैसे सौंप दें। क्रांतिकारी शहीदे आजम भगत सिंह और दूसरे क्रांतिकारियों पर पंक्ति पढ़कर उन्होंने हर किसी को भाव विभोर कर दिया। बात सुनाऊं मैं तुमको आजादी के मतवालों की, देख हौसले जिनके छाती फट जाती थी तो कालों की।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed